गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

डीएवी गर्ल्‍स कालेज में सीनियर्स के लिए विदाई समारोह

-पारूल ढिंगरा बनी मिस फेयरवेल-
-सवि मग्गो को मिला मिस ऑलराउंडर का खिताब-
-ढोल जगीरों दा ....पर जमकर लगे ठुमके-


डीएवी गल्र्स कालेज में वीरवार को सीनियर्स के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जिसकी थीम महफिल मुटियारां दी रही। इस दौरान छात्राओं ने पंजाबी गीतों पर जमकर ठुमके लगाएं। 
समारोह में पारूल ढिंगरा को मिस फेयरवेल तथा अंकिता को मिस ईव के खिताब से नवाजा गया। जबकि बीए मॉस कम्यूनिकेशन अंतिम वर्ष की छात्रा सवि मग्गो को मिस ऑलराउंडर का खिताब मिला। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया तथा सीनियर्स के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डा. सुषमा आर्य ने कहा कि छात्राओं ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर तथा पदक जीतकर डीएवी गल्र्स कालेज का नाम भारत ही नहीं, अपितु, विश्व स्तर पर चमकाया है। जिन छात्राओं ने कालेज में तीन साल या फिर पांच साल तक पढ़ाई की है, उनके सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन किया गया है। उन्होंने छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और परीक्षा में अच्छे मॉक्र्स प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया। विदाई समारोह के दौरान प्रीति ने डोला रे डोला गीत पर डांस कर समां बांध दिया। वहीं शीतल ने मेरा झुमका उठाके लाया यार वे, आजा नच ले गीत पर नृत्य प्रस्तुत कर पंडाल में माधुरी दीक्षित के डांस की यादों को ताजा कर दिया।


 कैटवॉक में सवि मग्गो, कृति शर्मा, रीना, सर्वजीत कौर, पारूल ढिंगरा, रूचि, हर्षा, स्मिता, आकांक्षा, विदुषी, अंकुर सहित २५ से ज्यादा छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने लक २० एट कुड़ी दा, ढोल जगीरों दा, मुंदरी बनाई फिरे, ओ ओ हनी सिंह, मिक्स भंगड़ा सहित अन्य पंजाबी गीतों पर छात्राओं ने गिद्दा प्रस्तुत कर माहौल में पंजाबियत घोल दी। मिस फेयरवेल, मिस ईव, मिस ऑल राउंडर व अन्य का चयन करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं करवाई गई। 






अंत में पारूल ढिंगरा को मिस फेयरवेल, अंकिता को मिस ईव, सवि को मिस ऑल राउंडर, हर्षा को मिस थीम, आकांक्षा को मिस ब्यूटीफुल स्माइल, विदुषी को मिस टैलेंटिड, अंकुर कांबोज को मिस पंचुवल के खिताब से नवाजा गया। टीचर्स के लिए आयोजित म्यूजिकल चेयर रेस में कॉमर्स विभाग की प्राध्यापिका मीनू गुलाटी विजेता रहीं। निर्णायक मंडल में डोली लांबा, नेहा सहगल, मीनू गुलाटी व पसमीन शामिल रहीं। 


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मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

यमुनानगर में हुये ब्लॉगर सम्मेलन की अखबारों में धूम

गत रविवार को यमुनानगर में हुये चिट्ठाकार सम्मेलन की आज के समाचार-पत्रों में धूम रही। आइये नजर डालते हैं इस कार्यक्रम सम्बन्धी कुछ प्रमुख अखबारों की कतरनों पर।

दैनिक जागरण

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पंजाब केसरी

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दैनिक भास्कर

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अमर उजाला

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हरिभूमि

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दैनिक ट्रिब्‍यून

» दैनिक ट्रिब्‍यून के पेज नं0 4 पर न्‍यूज 
  
पूरा समाचार यमुनानगर-हलचल पर यहाँ पढ़ा जा सकता है।

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यमुनानगर में हुआ इंटरनेट हिंदी लेखक सम्मेलन

हमारे हाथ में इंटरनेट पर हिंदी रूपी ऐसी तलवार है जिससे हम बहुत कुछ कर सकते हैं लेकिन वास्तव में हम उससे घास ही खोद रहे हैं। उक्त बात ब्लॉगर  मिलन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि यमुनानगर की प्रवासी साहित्यकार डॉ. कविता वाचक्नवी ने कही।

यमुनानगर में संपन्न हुए ब्लॉगर सम्मेलन में हिन्दी चिट्ठाकार (ब्लॉगर) एकत्रित हुये। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लंदन से पधारी साहित्यकार डॉ. कविता वाचक्नवी हिन्दी भारत नामक ब्लॉग की संचालिका हैं जिस पर हिन्दी भाषा, साहित्य एवं समसामयिक विषयों पर अपने विचार लिखती हैं और स्त्रीविमर्श की मुखर लेखिका हैं।

ब्लॉगिंग के द्वारा हिन्दी साहित्य के प्रसार के बारे में विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति का बेहतरीन माध्यम है। यहाँ पर हम खुद लेखक और खुद ही प्रकाशक हैं इसलिए विचारों की अभिव्यक्ति के बीच कोई बाधक नहीं है। सबसे बड़ी बात कि हमें बिना कुछ खर्च किए एक बड़ा पाठक वर्ग मिल जाता है। उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए इसके कंप्यूटरीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। आज की युवा पीढ़ी के लिए उन्होंने हिंदी की पुस्तकों के डिजिटलाइजेशन पर  विशेष बल दिया। उन्होने कहा कि सरकार को कंप्यूटर के क्षेत्र में हिंदी समर्थन को अनिवार्य बनाना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि हिंदी उत्थान की दिशा में विदेशों में भारत की अपेक्षा अधिक काम हो रहा है क्योंकि वे हिंदी की मार्किट पर कब्जा जमाना चाहते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित  चिट्ठाकार गणित अध्यापक श्रीश बेंजवाल हिन्दी कम्प्यूटिंग विशेषज्ञ हैं तथा हिन्दी में ई-पण्डित नामक लोकप्रिय टैक्नोलॉजी ब्लॉग चलाते हैं। वे यमुनानगर के पहले हिन्दी ब्लॉगर हैं। डॉ॰ प्रवीण चोपड़ा रेलवे में चिकित्सक हैं तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सम्बन्धी ब्लॉग सेहतनामा और मीडिया डाक्टर चलाते हैं। दर्शनलाल बवेजा विज्ञान अध्यापक हैं, विज्ञान लेखन में सक्रिय हैं तथा विज्ञान गतिविधियाँ नामक ब्लॉग चलाते हैं। रविन्द्र पुंज ग्राफिक्स डिजाइनर हैं तथा यमुनानगर हलचल नामक न्यूज ब्लॉग और आरकेपुंज नामक ब्लॉग चलाते हैं। हिन्दी अध्यापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उमेश प्रताप वत्स कवि एवं कथाकार हैं तथा उमेश का अखाड़ा नामक ब्लॉग लिखते हैं।

कार्यक्रम में हिन्दी ब्लॉगिंग के स्वरूप तथा प्रचार-प्रसार के बारे में विचार विमर्श हुआ। प्रवीण चोपड़ा तथा दर्शनलाल बवेजा ने विज्ञान एवं स्वास्थ्य ब्लॉगिंग सम्बंधी अपने अनुभव साझा किये। रविन्द्र पुंज ने ब्लॉग को पत्रकारिता के माध्यम के तौर पर प्रयोग करने सम्बंधी जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन उमेश प्रताप वत्स ने अपनी कविता से किया। यमुनानगर के हिन्दी ब्लॉगरों का प्रयास है कि इंटरनेट पर हिन्दी भाषा लोकप्रिय हो और अधिक से अधिक यमुनानगर वासी इससे जुड़ें।
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गौरतलब है कि ब्लॉग एक डायरी शैली की वेबसाइट होती है तथा ब्लॉग लिखने वाला ब्लॉगर कहलाता है। हिन्दी में ब्लॉग को चिट्ठा तथा ब्लॉगर को चिट्ठाकार कहा जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो इंटरनेट को लेखन के माध्यम के तौर पर प्रयोग करने वाला ब्लॉगर कहलाता है।
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मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

तकनीक और जानकरी से अपने आप को योग्‍य और कुशल बनाएं - योगेंद्र

"मीडिया क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगो को बदलते वक्त की तकनीक के  मुताबिक अपने आप को ढालने की जरुरत है ताकि वह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल रोजाना के कार्यों में  करते हुए वह बेहतर  परिणाम दे सकें . चाहे वह क्षेत्र फिल्म , कैमरा , फोटोग्राफी , एडिटिंग या अन्य क्षेत्र ही  क्यों न हो. हर जगह रोज बदलती तकनीक ने अपना कमाल दिखाना  शुरू कर दिया है, इसलिए मीडिया के विद्यार्थियों को भी कहिये वह अपने क्षेत्र की नयी तकनीक और जानकरी हासिल कर के अपने आप को पूरी तरह से योग्य और कुशल  बनाये ताकि उनका निष्पादन , गुणवत्ता पूर्ण साबित  हो सके . " 
यह बात दूरदर्शन के सेवा निवृत चीफ प्रोडूसर और देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों के मुख्य मीडिया प्रिशिक्षक श्री योगेंदर नाथ जौहरी ने गुरु नानक खालसा कॉलेज के जनसंचार एवं मीडिया प्रोदोयोगिकी विभाग के द्वारा आयोजित तीन दिवसीय मीडिया वर्कशॉप के समापन अवसर पर मीडिया विद्यार्थियों  को संबोधित करते हुए कहे . श्री जौहरी ने कहा की सच्चा विद्यार्थी वही है  जो जरुरत की बातों को मन  लगा कर सीखे और अपना ज्ञान बढ़ा सके ताकि उस ज्ञान और अनुभव के  आधार पर विद्यार्थी अपने जीवन का मजबूती से निर्माण कर सके . वर्क शॉप के अंतिम दिन श्री जौहरी ने मीडिया विद्यार्थियों  को कैमरों के संचालन की बारीकियों और अन्य पहलुओ पर विस्तार से जानकारी दी. इस से पूर्व इस वर्कशॉप की शुरवात देश के जाने माने विडियो और फोटोग्राफर डी मेंक्कुंन ने की. मौके पर उन्होंने मीडिया विद्यार्थियों को विडियोग्राफी  और फोटोग्राफी की महत्वपूर्ण  और बारीक़ जानकारी देते हुए कहा की एक ईमानदार और लगनशील विडियोग्राफर  और फोटोग्राफर एक मृतप्राय विषयवस्तु में जान फूंक सकता है. उन्होंने कहा की एक जीवंत फोटोग्राफी के लिए वक्त की कोई सीमा नही होती. उन्होंने डिसकवरी, हिस्टरी और नेशनल जेओग्राफी जैसे  चैनलों  का उदाहरण  देते हुए  बताया की इन चैनलों  में दिखाए जाने वाले दुर्लभ दृश्य एक फोटोग्राफर, विडियोग्राफर कितनी मेहनत के साथ कवर करता होगा इसकी कल्पना हम सहज ही कर सकते हैं .ऐसी ही मेहनत  एक फोटोग्राफर को आकाश  की तामाम बुलंदियों तक पंहुचा  कर उसे बेश कीमती बना देती है.वर्कशॉप में उन्होंने विद्यार्थियों को हाथों हाथ प्रशिक्षण भी दिया.
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इस वर्कशॉप में दूरदर्शन के सेवा निवृत इलेक्ट्रोनिक मीडिया एडिटर और 'भारतीय सिनेमा का विकास' विषय पर बहु र्चित वृत्तचित्र बनाने वाले राजेन्द्र  कुमार  सूद ने मीडिया विद्यार्थियों को एडिटिंग की विधा के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि पहले एडिटिंग का मतलब केवल लिपी या आलेखों की कांट- छांट करना और सूधार करना माना जाता था. मगर अब संपादन की  अवधारणा  इलेक्ट्रोनिक मीडिया और चैनलों  के कारण बदल गई है . अब संपादन का मतलब है अवांछित चित्रों और आवाजों को मिटाना और प्रभाव पूर्ण  चित्रों और दृश्यों के संयोजन से पूरी मीडिया सामग्री को अर्थ पूर्ण बनाने से है ताकि विषय वस्तु का उद्देश्य और सन्देश सार्थक हो सके . श्री सूद ने मौके पर ही आवाज और प्रकाश के प्रयोगों व प्रभावों के बारे में भी ढ़ेर सारी जानकारी दी. इस वर्क शॉप के अंतिम दिन कॉलेज  प्राचार्य डॉ. वीरेंदर कौर ने सभी विद्वानों का स्वागत किया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से सम्बंदित तामाम जानकारियां देने के लिए कॉलेज प्रबंधन समिति के प्रधान सरदार भूपेंदर सिंह जौहर और पूरे कॉलेज परिवार की और से आभार प्रकट किया. डॉ.  कौर ने  यह  भी बताया  कि इस प्रकार के उपयोगिता पूर्ण कर्यशालयों का आयोजन बहुत जल्द और भी किया जायेगा ताकि मीडिया विद्यार्थी मीडिया क्षेत्र में उपयोग हो रही तकनीकों और कौशलों में पारंगत हो कर अपने पैरों पर खड़े हो सके और देश के नव निर्माण में अपना योगदान दे सकें. उन्होने मौके पर यह भी बताया की बहुत  जल्द विश्व विद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से 'मीडिया मैनेजमेंट' नामक सौ प्रतिशत रोज़गार उन्मुख पाठ्यक्रम की शुरवात की जा रही है. ताकि मीडिया में रूचि रखने वाले विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम को  पूरा कर के अपना योगदान दे सकें.  प्राचार्य ने समापन सत्र में अतिथि विद्वानों को स्मृति चित्र दे कर सम्मानित किया. राष्ट्र-गान जन गन मन के साथ इस तीन दिवसीय मीडिया वर्कशॉप का समापन हुआ.
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 २,  अप्रैल  २०१२, Dr. Uday Bhan Singh
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निजी स्कूलों में एबीसीडी सीखना हुआ महंगा

अभिभावकों से फीस, यूनिफार्म व किताबों के नाम पर हो रही वसुली

निजी स्कूलों में नन्हें बच्चों के लिए एबीसीडी सीखना एमए की पढ़ाई से ज्यादा महंगा हो गया है। निजी स्कूल संचालक प्री नर्सरी में दाखिले के नाम पर अभिभावकों से 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक फीस वसुल कर रहे हैं। इसमें यूनिफार्म, किताब तथा अन्य फंड शमिल नहीं है। अभिभावकों का कहना है कि जब तक स्कूल संचालकों पर शिक्षा विभाग द्वारा शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक उनकी मनमानी यूं ही जारी रहेगी। 
यमुनानगर जिले में 250 से ज्यादा निजी स्कूल हैं, जिनमें इन दिनों प्री नर्सरी के दाखिले हो रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर स्कूल में दाखिला दिलवाने के लिए एक स्कूल से दूसरे स्कूल में चक्कर काट रहे हैं। निजी स्कूल संचालक प्री नर्सरी में दाखिले के नाम पर अभिभावकों से 10 हजार से लेकर 50 हजार तक वसुल कर रहे हैं। जबकि एमए की एक साल की पढ़ाई करने में भी 5 से 8 हजार रुपए खर्च आता है। इससे साफ जाहिर है कि निजी स्कूलों में एबीसीडी सीखना एमए की पढ़ाई करने से कितना महंगा हो गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक निजी स्कूल के संचालक ने बताया कि उनके यहां प्री नर्सरी में दाखिले के लिए 20 हजार रुपए लिए जाते हैं। जबकि यूनिफार्म व किताबों का खर्च अलग से हैं। इसके सिक्योरिटी फंड, बिल्डिंग फंड व अन्य फंड का पैसा भी अलग से लिया जाता है। उन्होंने बताया कि दाखिला होने के बाद अगर कोई बच्चा स्कूल छोडक़र दूसरे स्कूल में जाना चाहता है, तो फीस रिफंड करने का प्रावधान नहीं है। 
डे्रस व किताबों के नाम पर लूट-
अभिभावक सुरेश कुमार, अनीता, सुषमा, नीति कौर व अश्वनी का कहना है कि निजी स्कूल संचालक अभिभावकों से बच्चों की डे्रस व किताबों के नाम पर मोटी रकम वसुल रहे हैं। बच्चों की दो डे्रसिज की एवज में जहां 2000 रुपए लिए जा रहे हैं, वहीं किताबों के नाम पर 1500 रुपए से लेकर 3000 रुपए तक वसुले जा रहे हैं। इतना ही नहीं निजी स्कूल संचालक अभिभावकों को प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें थमा रहे हैं। जबकि शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूल संचालकों को हिदायत दी हुई है कि वे बच्चों को एनसीआरटी की ही किताबें पढऩे के लिए दें। 
नहीं की जाती सिक्योरिटी वापिस-
निजी स्कूल संचालक दाखिले के समय बच्चों से जो सिक्योरिटी लेते हैं,उसे बाद में वापिस नहीं किया जाता। अभिभावक विकास कुमार,विनोद कुमार व अजय कुमार ने बताया कि बच्चे के दाखिले के समय 1000 से लेकर 2000 रुपए तक सिक्योरिटी ली जा रही है। इतना ही नहीं जिस कक्षा में 30 से 40 बच्चें होने चाहिए, उसमें 60 से 70 बच्चें बिठाए जा रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों को स्कूलों में कैसे पढ़ाया जा रहा है। 
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निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हुए हैं कि वे अपने यहां प्राइवेट पब्लिशर्स के स्थान पर एनसीआरटी की ही किताबें पढ़ाए। जिन स्कूल संचालकों ने अपने यहां पर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेची हैं, उनकी लिस्ट मंगवाई जा रही है। ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा सकें - जगजीत कौर, जिला शिक्षा अधिकारी, यमुनानगर। 
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हवन यज्ञ से किया सत्र का शुभारं

जगाधरी। एसडी पब्लिक स्कूल में नए सत्र का शुभारंभ हवन यज्ञ से हुआ। जिसमें विद्यार्थियों ने पूर्णाहुति डाली। स्कूल प्रिंसिपल ऊषा शर्मा व मुख्याध्यापिका अनु धवन ने यज्ञ का श्री गणेश किया। पंडित ने मंत्रोच्चारण के साथ हवन यज्ञ की अग्नि प्रज्ज्वलित की। 
स्कूल प्रिंसिपल ऊषा शर्मा ने कहा कि यज्ञ हमारी संस्कृति का परिचायक है। इससे जहां वातावरण शुद्ध होता है,वहीं मनुष्य में सात्विक प्रवृतियां जागृत होती है। यज्ञ से हमें श्रेष्ठ कार्य करने की शक्ति तथा उत्साह प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ करने से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्ता होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अच्छे कार्य की शुरूआत हवन यज्ञ से की जानी चाहिए, ताकि पूरा साल विद्यार्थियों में सुख समृद्धि बरकरार रहे। मौके पर प्रबंधन समिति सदस्य व सभी टीचर्स उपस्थित रहे। 

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अंतर्रांष्ट्रीय मीडिया फिल्म फैस्टीवल का भव्य आगाज


फिल्म देखने का नजरिया बदलेगा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फिल्म फैस्टीवल: कुलपति
भ्रष्टाचार के खात्में के लिए फिल्मों में सामाजिक संवेदनशीलता जरूरी: शाह 
इमानदारी के साथ काम करें मंजिल जरूर मिलेगी: सीमा बिश्वास
कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति लै जनरल डॉ डीडीएस संधु ने कहा है कि सिनेमा किसी भी समाज में लोगों का नजरिया बदलनें की क्षमता रखता है। इसलिए कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रांगण में हो रहे इस अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फिल्म उत्सव के आयोजन से लोगों का सिनेमा देखने का नजरिया बदलेगा और हरियाणा में एक नई तरह की फिल्म संस्कृति का विकास होगा। वे मंगलवार को विश्वविद्यालय के आर के सदन में जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के तत्वाधान में आयोजित पांच दिवसीय मीडिया अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फैस्टीवल के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व कुलपति लै जनरल डीडीएस संधु जाने माने फिल्म निर्देशक कुंदन शाह, अभिनेत्री सीमा बिश्वास ने दीप प्रज्जवलित कर समारोह का शुभारंभ किया। 

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ डीडीएस संधु ने कहा कि मीडिय़ा समाज को प्रभावित करता है और सिनेमा मीडिया का एक महत्वपूर्ण अंग है इसीलिए लोगों में सिनेमा को देखने का नया नजरिया पैदा करने के लिए केयू ने इस अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फिल्म उत्सव का आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा आयोजित इस फिल्म उत्सव से हरियाणा के लोगों में सिनेमा को देखने का एक अलग नजरिया पैदा होगा जिससे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में भविष्य में हरियाणा का योगदान साफ देखा जा सकेगा।  विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार आयोजित मीडिया फिल्म समारोह की श्रृंखला आने वाले समय में भी देखने को मिलेगी और इसके लिए उनके स्तर पर जो भी संभव प्रयास होगे वह वे करेंगे। 
         उन्होंने कहा कि सिनेमा और टीवी को एक ही मंच पर रखना चाहिए इन्हें हम अलग-अलग नहीं कर सकते 1योंकि ये एक दूसरे के पूरक हैं। टेलीविजन सिनेमा से ४० गुणा बड़ा है।  सिनेमा सीधे-सीधे हमारे समाज को प्रभावित करता है ऐसे में इसकी नैतिक जि6मेवारी और अधिक बढ़ जाती है और सिनेमा जगत से जुड़े लोगों को चाहिए कि वे अच्छी फिल्मों के माध्यम से समाज निर्माण में अपनी भूमिका से न्याय करें। 
         मशहूर फिल्म निर्देशक एवं पटकथा लेखक कुंदन शाह ने कहा कि फिल्म निर्माण में आज हमारा देश अग्रणी है। हमारे देश में प्रतिवर्ष १००० से अधिक फिल्मों का निर्माण हो रहा है जिसका कारोबार २००० करोड़ से भी अधिक है।  उन्होंने कहा कि इस सबके बावजूद भी हमारी फिल्मों में वो गुणवता दिखाई नहीं देती जिसकी समाज उससे अपेक्षा रखता है। फिल्म निर्देशक शाह के अनुसार आज किसी भी क्षेत्र में सच बोलना बड़ा मुश्किल हो गया है खासकर मीडिया के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि हम सभी लोगों की नैतिक जि6मेदारी है और हम इसको निभाने से पीछे नहीं हट सकते।  श्री शाह के अनुसार हम सब बिमार समाज में जी रहे हैं जिसकी दवा के रूप में मीडिया व सिनेमा को एक साथ होना होगा। 
         २००० संगीत नाटक अकादमिक अवार्ड से सुशोभित एवं अदाकारा सीमा बिश्वास ने कहा कि हरियाणा की पहचान उनकी नजरों में कुछ और थी लेकिन यहां आकर पता चला कि हरियाणा के लोग अपने मेहमानों का स्वागत कैसे करते हैं। 
         उन्होंने कहा कि हरियाणा की युवा पीढी में वो जज्बा है जो हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है। फिल्म उद्योग में भी हरियाणा के युवाओं के लिए काफी संभावनाएं हैं और मुझे आशा है कि आने वाले वर्षों में हरियाणा में एक ऐसी फिल्म संस्कृति का विकास होगा जो देश के सिनेमा इतिहास के लिए मिशाल बनेगी। 
स्वीडन से पहुंचे सिनेमा विशेषज्ञ एवं प्रोफेसर एच ड4ल्यू वैस्लर ने हिन्दी में अपने भाषण की शुरूआत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में भारतीय सिनेमा को पसंद किया जा रहा है। जर्मनी, इंगलैंड सहित कई अन्य युरोपिय देशों में भारतीय सिनेमा को पसंद करने वालों की सं2या निरंतर बढ रही है। भारतीय सिनेमा के प्रभाव के कारण ही हॉलीवुड की फिल्में भारत में कई कई भाषाओं में डब कर रिलीज की जा रही हैं।  अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फिल्मों के प्रसंशकों ने फिल्म कल्ब व फिल्म मैगजीन जैसी संस्थाएं बन रही हैं जो निश्चित रूप से भारतीय सिनेमा के विकास का आइना है। उन्होंने इस आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति को बधाई दी।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राजबीर सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फिल्म फैस्टीवल का आयोजन विश्वविद्यालय व संस्थान के लिए गर्व का विषय है। मीडिया फिल्म समारोह का उददेश्य हरियाणा में फिल्म संस्कृति को बढावा देना है।  फिल्म उद्योग में अपार संभावनाएं हैं लेकिन हरियाणा अभी इस क्षेत्र में काफी पीछे है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया फिल्म फैस्टीवल के आयोजन से युवाओं को एक नई दिशा मिलेगी और वे एक नए क्षेत्र में अपने लिए संभावनाएं खोज सकेंगे। विश्वविद्यालय के लिए यह एक ऐतिहासिक ल6हा है जब सीमा विश्वास, फिल्म निर्देशक कुंदन शाह सहित कई बड़ी हस्तियां विश्वविद्यालय के समारोह में शामिल हो रही हैं जो वास्तव में भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
फिल्म फैस्टीवल के निदेशक अजीत राय ने इस मौके पर अंतराष्ट्रीय मीडिया फिल्म फैस्टीवल के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि अगले पांच दिनों में विश्वविद्यालय के इस महोत्सव में २५ से अधिक अंतराष्ट्रीय स्तर की फिल्में दिखाई जाएंगी और पांच सौ से अधिक विद्यार्थी इस उत्सव का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने इस समारोह के भव्य आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति लै जनरल डॉ डीडीएस संधु व संस्थान के निदेशक प्रो राजबीर सिंह को बधाई दी। इस मौके पर विश्वविद्यालय के डीन एकेडमी अफेयर डॉ गिरिश चौपड़ा, जनसंपर्क विभाग के निदेशक प्रो ब्रिजेश साहनी, युवा एवं सांस्कृतिक कल्याण विभाग के निदेशक अनुप लाठर, विभिन्न विभागों के चेयरमैन सहित कई अन्य गणमान्य अतिथि व छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
कुलपति ने किया प्रर्दशनी का उदघाटन
         कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति लै जनरल डीडीएस संधु ने भारतीय फिल्मों में संगीत के गौरवशाली इतिहास को बयां करती प्रदर्शनी का उदघाटन किया।
         इस प्रदर्शनी में भारतीय संगीत के ऐतिहासिक सफर को पोस्टरों के माध्यम से बड़े सुंदर अंदाज में बयां किया गया है।
         नेशनल फिल्म आरकाइव ऑफ इंडिया के सौजन्य से आयोजित की गई यह प्रदर्शनी दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केन्द्र है।

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सोमवार, 2 अप्रैल 2012

गुरू नानक खालसा कालेज ने कब्‍जाया तीसरा स्‍थान

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फर्स्‍ट एड ट्रेनिंग का बैच होगा शुरू

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