Tuesday, April 10, 2012

यमुनानगर में हुआ इंटरनेट हिंदी लेखक सम्मेलन

हमारे हाथ में इंटरनेट पर हिंदी रूपी ऐसी तलवार है जिससे हम बहुत कुछ कर सकते हैं लेकिन वास्तव में हम उससे घास ही खोद रहे हैं। उक्त बात ब्लॉगर  मिलन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि यमुनानगर की प्रवासी साहित्यकार डॉ. कविता वाचक्नवी ने कही।

यमुनानगर में संपन्न हुए ब्लॉगर सम्मेलन में हिन्दी चिट्ठाकार (ब्लॉगर) एकत्रित हुये। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि लंदन से पधारी साहित्यकार डॉ. कविता वाचक्नवी हिन्दी भारत नामक ब्लॉग की संचालिका हैं जिस पर हिन्दी भाषा, साहित्य एवं समसामयिक विषयों पर अपने विचार लिखती हैं और स्त्रीविमर्श की मुखर लेखिका हैं।

ब्लॉगिंग के द्वारा हिन्दी साहित्य के प्रसार के बारे में विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति का बेहतरीन माध्यम है। यहाँ पर हम खुद लेखक और खुद ही प्रकाशक हैं इसलिए विचारों की अभिव्यक्ति के बीच कोई बाधक नहीं है। सबसे बड़ी बात कि हमें बिना कुछ खर्च किए एक बड़ा पाठक वर्ग मिल जाता है। उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए इसके कंप्यूटरीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। आज की युवा पीढ़ी के लिए उन्होंने हिंदी की पुस्तकों के डिजिटलाइजेशन पर  विशेष बल दिया। उन्होने कहा कि सरकार को कंप्यूटर के क्षेत्र में हिंदी समर्थन को अनिवार्य बनाना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि हिंदी उत्थान की दिशा में विदेशों में भारत की अपेक्षा अधिक काम हो रहा है क्योंकि वे हिंदी की मार्किट पर कब्जा जमाना चाहते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित  चिट्ठाकार गणित अध्यापक श्रीश बेंजवाल हिन्दी कम्प्यूटिंग विशेषज्ञ हैं तथा हिन्दी में ई-पण्डित नामक लोकप्रिय टैक्नोलॉजी ब्लॉग चलाते हैं। वे यमुनानगर के पहले हिन्दी ब्लॉगर हैं। डॉ॰ प्रवीण चोपड़ा रेलवे में चिकित्सक हैं तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सम्बन्धी ब्लॉग सेहतनामा और मीडिया डाक्टर चलाते हैं। दर्शनलाल बवेजा विज्ञान अध्यापक हैं, विज्ञान लेखन में सक्रिय हैं तथा विज्ञान गतिविधियाँ नामक ब्लॉग चलाते हैं। रविन्द्र पुंज ग्राफिक्स डिजाइनर हैं तथा यमुनानगर हलचल नामक न्यूज ब्लॉग और आरकेपुंज नामक ब्लॉग चलाते हैं। हिन्दी अध्यापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उमेश प्रताप वत्स कवि एवं कथाकार हैं तथा उमेश का अखाड़ा नामक ब्लॉग लिखते हैं।

कार्यक्रम में हिन्दी ब्लॉगिंग के स्वरूप तथा प्रचार-प्रसार के बारे में विचार विमर्श हुआ। प्रवीण चोपड़ा तथा दर्शनलाल बवेजा ने विज्ञान एवं स्वास्थ्य ब्लॉगिंग सम्बंधी अपने अनुभव साझा किये। रविन्द्र पुंज ने ब्लॉग को पत्रकारिता के माध्यम के तौर पर प्रयोग करने सम्बंधी जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन उमेश प्रताप वत्स ने अपनी कविता से किया। यमुनानगर के हिन्दी ब्लॉगरों का प्रयास है कि इंटरनेट पर हिन्दी भाषा लोकप्रिय हो और अधिक से अधिक यमुनानगर वासी इससे जुड़ें।
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गौरतलब है कि ब्लॉग एक डायरी शैली की वेबसाइट होती है तथा ब्लॉग लिखने वाला ब्लॉगर कहलाता है। हिन्दी में ब्लॉग को चिट्ठा तथा ब्लॉगर को चिट्ठाकार कहा जाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो इंटरनेट को लेखन के माध्यम के तौर पर प्रयोग करने वाला ब्लॉगर कहलाता है।
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2 comments:

  1. बहुत खूब.
    यमुना नगर के सभी ब्लोगरों का अभिनंदन कि आप लोग इस विधा का प्रयोग साहित्येतर विषयों के लिए बखूबी कर रहे हैं.

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  2. बहुत बढ़िया, सारी जानकारी समेट दी आपने।

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टिप्पणी के लिये धन्यवाद।