
गुरुवार, 29 मार्च 2012
पीला पंजा

सोमवार, 26 मार्च 2012
वीओ एक यमुनानगर में सैनी समाज के प्रतिनिधियों ने इक्टठे होकर मुख्यमंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हम लोगों ने मुख्यमंत्री को कुरूक्षेत्र में इस लिए बुलाया था कि मुख्यमंत्री हम लोगों के बीच में आए और उन्हें समाज के लोग सम्मानित करे लेकिन मुख्यमंत्री ने इन लोगों को माली कह डाला जोकि समाज के लोगों ने इस शब्द को समाज के अपमानित करने की बात कही है हालाकि मुख्यमंत्री का यह कहना था कि एक जमीनदार जो छह भीगे में जमीन को बोता है वह समाज के लोग एक बीगे में बोह देते है और जमीनदार के बदले समाज के लोग एक बीगे की फसल होती है इसी में मुख्ष्मंत्री के मुहं से निकलने माली शब्द अब परेशानी का विष्य बन गया है
बाइट सैनी समाज के प्रदेशाध्यक्ष अनिल कुमार
वीओ दो मुंख्यमंत्री ने 24 मार्च को यह शब्द कहने के बाद 25 मार्च को समाज के लोगो ंतक संदेश पहुंचाने के लिए चंडीगढ में डीपीआरओ के माध्य से अपने मुंह से निकलने शब्द को वापस लेने की बात कही है लेकिन समाज के लोग इस बात से खफा हो गए है कि मुख्यमंत्री ने एक तो गल्ती की है उपर से समाज के लोगों से सीधे तौर पर वह माफी भी नही मांग रहे ऐसे में उन्हें इसका नतीजा चुनावों के दौरान ता ेमिलेेगा ही है साथ ही साथ प्रदेशाध्यक्ष ने यह भी कहा कि पीछडा वर्ग समाज के बैनर तले वह कुरूक्षेत्र में इक्टठा होकर दिल्ली के जंत्रमंत्र पर धरना प्रदर्शन करेंगे
बाइट सैनी समज के प्रदेशाध्यक्ष अनिल कुमार सैनी
हेयर रिबोंडिंग पर टिप्स
शनिवार, 24 मार्च 2012
जिला स्तरीय गणित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में राजकीय उच्च विद्यालय, तेजली की टीम विजयी
आज बी॰ आर॰ सी॰ यमुनानगर के कार्यालय में सर्व शिक्षा अभियान द्वारा जिला स्तरीय गणित प्रश्नोत्तरी (मैथ क्विज) प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न स्कूलों के लगभग ५५ विद्यार्थियों ने भाग लिया। ५५ विद्यार्थियों की पहले लिखित परीक्षा ली गयी तथा १८ विद्यार्थियों को क्विज के लिये शॉर्टलिस्ट किया गया। इन १८ विद्यार्थियों की छह टीमें A, B, C, D, E बनाकर प्रतियोगिता सम्पन्न हुयी। क्विज के प्रश्न ऍससीईआरटी के द्वारा तैयार किये गये थे जिन्हें प्रोजैक्टर के माध्यम से पूछा गया।
(बायें से ऍसऍसए के श्री धर्मबीर, डीपीसी महोदय, जिला शिक्षा अधिकारी महोदया, विद्यार्थी तथा तेजली के गणित अध्यापक श्रीश कुमार)
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली C टीम में राजकीय उच्च विद्यालय तेजली के छात्र आशीष कुमार तथा रा॰ उ॰ वि॰ फतेहपुर, रा॰ उ॰ वि॰ सब्जी मण्डी की छात्रायें शामिल थी। प्रतियोगिता के उपरान्त सर्व शिक्षा अभियान के श्री धर्मबीर जी ने ऐसी प्रतियोगिताओं के महत्व पर प्रकाश डाला। डीपीसी महोदय ने छात्रों को मेहनत करते हुये देश निर्माण हेतु कार्य करने का सन्देश दिया। अन्त में मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती जगजीत कौर ने विजेताओं को पुरस्कार वितरित किये। प्रथम स्थान का पुरस्कार विजेता टीम के विद्यार्थियों एवं तेजली के गणित अध्यापक श्रीश कुमार ने प्राप्त किया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने चण्डीगढ़ जायेगी।
उल्लेखनीय है कि महान गणितज्ञ रामानुजन की १२५ वीं जयन्ती के अवसर पर राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी सिलसिले में शिक्षा विभाग द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत इस प्रकार के आयोजन किये जा रहे हैं।
शुक्रवार, 23 मार्च 2012
Swimming pool at DAV College for Girls
Convocation at DAV College for Girls
बुधवार, 21 मार्च 2012
स्वामी विवे·ानंद हर युग ·ी आवश्य·ता: बवेजा
-राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत हुए १९ शोधपत्र-
यमुनानगर। स्वामी विवे·ानंद हर युग ·ी आवश्य·ता है। वे ऐसे समय पर आए जब भारत ·ो उन·ी बहुत ज्यादा आवश्य·ता थी। उक्त शब्द विवे·ानंद स्टडी सेंटर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ·े ·ो-ओडिनेटर डा. सुधीर बवेजा ने डीएवी गल्र्स ·ालेज में विवे·ानंद स्टडी सेंटर द्वारा विवे·ानंद एंड यूथ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ·े दौरान ·हे। ·ार्य·्रम ·ी अध्यक्षता ·ालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने ·ी। संगोष्ठी में १९ शोध पत्र प्रस्तुत ·िए गए।
डा. बवेजा ने ·हा ·ि स्वामी विवे·ानंद जी ·ो घनीभुत भारत ·हा जाता है, उन्होंने सभी दर्शनों ·ा समंवित रूप प्रस्तुत ·िया है। जिन्हें हम जीवन में व्यावहारि· रूप से अपना ·र जी स·ते हैं। विवे·ानंद जी ·ी सबसे बड़ी खासियत यह थी ·ि वे निरंतर युवाओं से संचाररत रहते थे। विवे·ानंद हर युवा ·े अंदर बसते हैं, जब युवा अपने अंदर ·े विवे· ·ो जगा लेगा, तो उस·े जीवन में आनंद ही आनंद होगा। स्वामी जी प्रत्ये· युवा ·ो आत्मविश्वास ·ा पाठ पढ़ाते थे। ·िसी से प्रतिस्पर्धा न ·र·े, अपनी दिव्यता ·ो उजागर ·र·े अपना जीवन सफल बनाने ·ी बात ·रते थे। स्वामी विवे·ानंद हर युग ·ी आवश्य·ता है। वे ऐसे समय पर आए जब भारत ·ो उन·ी बहुत ज्यादा आवश्य·ता थी। आज ·े वातावरण ·ी परिस्थितियां ऐसी है, हमें पग-पग पर स्वामी विवे·ानंद ·ी ओर देखना पड़ रहा है।
गांधी यूजियम सेंटर नई दिल्ली ·े डिप्टी डायरेक्ट अनिल दत्त मिश्रा ने ·हा ·ि स्वामी जी ने हमेशाा वाणी व आचरण ·ी शुद्धता तथा पवित्रता व लगन पर बल दिया। विवे·ानंद ने ·हा ·ि अगर स्वयं पर विश्वास है, तो आगे बढऩे से ·ोई नहीं रो· स·ता। स्वामी जी ·े मुताबि· ·ोई भी बड़ी चीज ए· दिन में अचीव नहीं ·ी जा स·ती, उस·े लिए निरंतर प्रयास ·ी आवश्य·ता पड़ती है। ले·िन आज ·ा युवा ए· दिन में सब ·ुछ पाना चाहता है। विवे·ानंद ने २०० साल पहले देश ·े वि·ास ·ी बात ·ही थी, जो ·ि आज भी प्रासांगि· है। उन्होंने ·हा था ·ि जब यूथ में एनर्जी आएगी, तब देश खुद-ब-खुद बदल जाएगा। ·िसी भी देश ·ा इतिहास देख लीजिए युथ ने ही आजादी दिलवाई है। डीएवी गल्र्स ·ालेज ·े हिंदी विभागाध्यक्षा डा. विश्वप्रभा ने ·हा ·ि स्वामी जी दूरदृष्टि रखते थे। उन·ा समस्त ज्ञान उपनिषदों ·ा निचोड़ है। उन्होंने सैदव धर्म ·े रूढ़ रूप पर प्रहार ·िया। उन्होंने आध्यात्मि· व लौ·ि· शिक्षा साथ-साथ ग्रहण ·रने पर बल दिया।
·ालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने ·हा ·ि सेमीनार ·ा मु य उद्देश्य युवाओं ·ो स्वामी जी ·े जीवन से परिचित ·रवाना है। स्वामी विवे·ानंद स्टडी सेंटर ·े ·ो-ओडिनेटर डा. मल·ीत सिंह ने बताया ·ि सेमीनार में १९ शोध पत्र प्रस्तुत ·िए गए। जिसमें राम·ृष्ण शारदा मिशन नई दिल्ली से आईं नीता मुखर्जी, राम·ृष्ण मिशन नई दिल्ली से आए प्रोफेसर सुनील ·ुमार, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से आए गौतम ·लोतरा, ए·ता सैनी, अमनबीर सिंह, ·ुवि से आए डा. रा·ेश ·ुमार मु य वक्ता रहे।
ÚñUÇU ·ý¤æâ ÖßÙ ×ð´ àæéM¤ ·¤è »§üU ȤSÅüU °ÇU ÅðþUçÙ´» ×ð´ ÚñUÇU ·ý¤æâ âç¿ß àØæ× âéÎÚU Ùð Øéßæ¥æð´ ·¤æð çȤË× ·¤ð ×æŠØ× âð ÂýæÍç×·¤ ç¿ç·¤ˆâæ ·ð¤ ÀUæðÅðU-ÀæðÅðU çÅUŒâ çΰ ¥æñÚU ·¤ãUæ ç·¤ ȤSÅüU °ÇU ·¤æ ™ææÙ Âýæ# ·¤ÚU ãU× ç·¤âè Öè ÃØçQ¤ ·ð¤ ÁèßÙ ·¤è ÚUÿææ ·¤ÚU â·¤Ìð ãñ´U ©U‹ãUæð´Ùð Øéßæ¥æð´ ·¤æð ¥æuUæÙ ç·¤Øæ ç·¤ ßæð ȤSÅüU °ÇU ·è âðßæ ·ð¤ âæÍ-âæÍ ÕðÅUè Õ¿æ¥æð ¥çÖØæÙ ·ð¤ çܰ Öè »æ¡ß-»æ¡ß Áæ·¤ÚU ·¤æ× ·¤ÚÔ´U çÁââð ·¤è ·¤‹Øæ Öêý‡æ ãUˆØæ Áñâð Áƒæ‹Ø ¥ÂÚUæŠæ ·¤æð Êæ âð ç×ÅUæØæ Áæ â·ð¤ Ð
©U‹ãUæð´Ùð ÕÌæØæ ç·¤ çÁÜæ ©UÂæØéQ¤ ¥àææð·¤ âæ´»ßæÙ ·ð¤ ׿»üÎàæüÙ ×ð´ çÁÜð ÖÚU ×ð´ ȤSÅüU °ÇU ·¤è ÅþðUçÙ´» àæéM¤ ·¤è »§üU ãñU ¥Õ ·¤æð§üU Öè âæ×æçÁ·¤ â´»ÆUÙ, »ýæ× ´¿æØÌ, Øéßæ ·¤ËÕ °ß´ âæ×æçÁ·¤ ·¤æØü·¤Ìæü ÚñUÇU ·ý¤æâ ÖßÙ ×ð´ ÂýæÍüÙæ ˜æ Îð·¤ÚU »æ´ß SÌÚU ÂÚU ãUè } çÎßâèØ È¤SÅüU °ÇU ÅðþUçÙ´» ¥æØæðçÁÌ ·¤ÚUßæ â·¤Ìæ ãñU çÁâ·ð¤ çܰ Øéßæ¥æð´ ·¤æð ÅðþUçÙ´» ·¤ÚUÙð ·ð¤ çܰ Ø×éÙæÙ»ÚU ÙãUè´ ¥æÙæ ÂÇð¸U»æ Ð
सोमवार, 19 मार्च 2012
-»æ´Šæè ß ÙðãUM¤ ·ð¤ ÌéÜÙæˆ×·¤ ¥ŠØØÙ ÂÚU ãéU¥æ âð×èÙæÚU-
-»æ´Šæè ß ÙðãUM¤ ·ð¤ çß¿æÚŠææÚUæ âð M¤-Õ-M¤ ãéU° ÂýçÌÖæ»è-
Ø×éÙæÙ»ÚUÐ ÇUè°ßè »Ëâü ·¤æÜðÁ ×𴠻洊æè ¥æñÚU ÙðãUM¤ ·¤æ ÌéÜÙæˆ×·¤ ¥ŠØØÙ çßáØ ÂÚU Îæð çÎßâèØ ÚUæcÅþUèØ â´»æðDUè ·¤æ ¥æØæðÁÙ ·¤æUÜðÁ ·ð¤ »æ´Šæè ÌÍæ ÙðãUM¤ SÅUÇUè âð´ÅUÚU ·ð¤ ÌˆßæßŠææÙ ×ð´ ç·¤Øæ »ØæÐ ·¤æÜðÁ çÂý´çâÂÜ ÇUæ. âéá׿ ¥æØü ÌÍæ ¥‹Ø ßQ¤æ¥æð´ Ùð Îè Âý’’ßçÜÌ ·¤ÚU ·¤æØü·ý¤× ·¤æ àæéÖæÚ´UÖ ç·¤ØæÐ âð×èÙæÚU ·ð¤ ÂãUÜð çÎÙ 25 àææðŠæ Â˜æ ÂýSÌéÌ ç·¤° »°Ð
´ÁæÕ çßàßçßlæÜØ âð ¥æ° §UçÌãUæâ ·ð¤ ÂýæðÈð¤âÚU ÚUæÁèß Üæð¿Ù Ùð ·¤ãUæ ç·¤ »æ´ŠæèßæÎ ¥æñÚU ÙðãUM¤ßæÎ âè¹Ùð ßæÜè ¿èÁ ÙãUè´ ãñUÐ §Uâ·¤æ âÕâð ÕÇ¸æ ©UÎæãUÚU‡æ ¥óææ ãUÁæÚÔU ãñ´UÐ »æ´Šæè Áè ·¤è âÕâð ÕÇ¸è ¹æçâØÌ ØãU Íè ç·¤ ßð ·¤ ØêçÙ·ð¤àæÙ ·ð¤ âæÍ-âæÍ ÕãéUÌ ’ØæÎæ çܹÌð ÍðÐ ØãUè ßÁãU ãñU ç·¤ »æ´Šæè Áè ¥ÂÙð çß¿æÚUæð´ ·¤æð ’ØæÎæ âð ’ØæÎæ Üæð»æð´ Ì·¤ Âãé´U¿æÙð ×ð´ âÿæ× ÚUãðUÐ »æ´Šæè Áè Ùð ·¤Öè Öè ÎêâÚUæð´ ÂÚU ¥ÂÙð çß¿æÚU ÙãUè´ ÍæðÂð´, Üðç·¤Ù ¥æßàØ·¤Ìæ ÂǸÙð ÂÚU ©U‹ãUæð´Ùð ¥ÂÙè ×Ù×Áèü Öè ·¤èÐ ©U‹ãUæð´Ùð ÀUæ˜ææ¥æð´ âð ¥æuUæÙ ç·¤Øæ ç·¤ ßð ¥ÂÙð çß¿æÚUæð´ ·¤æð ÎëɸU ÕÙæÙð ·ð¤ çܰ ’ØæÎæ âð ’ØæÎæ ÂɸUæ§üU- çܹæ§üU ·¤ÚÔ´UÐ »æ´Šæè Áè Öæ»ßÌ »èÌæ âð ÁéÇð¸U ãéU° ÍðÐ ØãUè ßÁãU ãñU ç·¤ ßð âãUè-»ÜÌ ·¤æ ¿ØÙ ·¤ÚUÙð ×ð´ ÕãéUÌ âæð¿ çß¿æÚU ·¤ÚUÌð ÍðР´ÁæÕ ØêçÙßçâüÅUè ¿´ÇUè»É¸ âð ¥æ° ÂýæðÈð¤âÚU ÅUè¥æÚU àæ×æü Ùð ·¤ãUæ ç·¤ »æ´Šæè ¥æñÚU ÙðãUM¤ ·¤è ÌéÜÙæ ÙãUè´ ãUæð â·¤ÌèÐ ÙðãUM¤ Áè âæ§´Uâ ¥æñÚU Üæð·¤Ì´˜æ ·ð¤ ÂÿæŠæÚU Íð, ÁÕç·¤ »æ´Šæè Áè Ùð âÎñß ¥æˆ×ÕÜ ÂÚU ÁæðÚU çÎØæ ãñUÐ »æ´Šæè Áè ·ð¤ çܰ â׿Á ÂãUÜð ãñ´U ¥æñÚU ÚUæ’Ø ÕæÎ ×ð´Ð »æ´Šæè Áè ·ð¤ ×éÌæçÕ·¤ ÂØæüßÚU‡æ ãU׿ÚÔU çܰ ãñ´U, ãU×ð´ ©Uâ·¤è ÚUÿææ ·¤ÚUÙæ ¿æçãU°Ð ·é¤L¤ÿæð˜æ çßàßçßlæÜØ âð âðßæçÙßëÌ ÂýæðÈð¤âÚU ÚUÙÕèÚU ¿æñŠæÚUè Ùð ÙðãUM¤ ¥æñÚU »æ´Šæè ·ð¤ ´¿æØÌè ÚUæÁ ÂÚU çßSÌæÚU âð ¿¿æü ·¤èÐ »æ´Šæè Áè Ùð ãU×ðàææ SßÚUæÁ ·¤è ÕæÌ ·¤èÐ âÚU·¤æÚU Ùð ÚUæCþUèØ »ýæ× SßÚUæÁ ØæðÁÙæ ¿Üæ§üUÐ Üðç·¤Ù SßÚUæÁ ·¤ãUæ´ ÂÚU ãñU, ØãU âæð¿Ùð ßæÜè ÕæÌ ãñUÐ ·¤æÜðÁ çÂý´çâÂÜ Ùð âÖè ßQ¤æ¥æð´ ·¤æ ¥æÖæÚU ÃØQ¤ ç·¤ØæÐ
»æ´Šæè ÌÍæ ÙðãUM¤ SÅUÇUè âð´ÅUÚU ·ð¤ ·¤ÙßèÙÚU ÇUæ. ×Ü·¤èÌ çâ´ãU Ùð ·¤ãUæ ç·¤ »÷ÜæðÕÜæ§UÁðàæÙ ·¤æ ÖæÚUÌ ÂÚU €Øæ ÂýÖæß ÂǸ ÚUãUæ ãñUÐ »æ´Šæè ¥æñÚU ÙðãUM¤ Ùð âéŠææÚU ·ð¤ çܰ €Øæ-€Øæ ·¤Î× ©UÆUæ°, ÁÙ âæŠææÚU‡æ ·ð¤ çß·¤æâ ·ð¤ çܰ €Øæ ãUæðÙæ ¿æçãU°Ð §UˆØæçÎ ×égæð´ ÂÚU âð×èÙæÚU ·ð¤ ÎæñÚUæÙ ¿¿æü ·¤è Áæ°»èÐ ©U‹ãUæð´Ùð ·¤ãUæ ç·¤ Îðàæ ·ð¤ çß·¤æâ ×ð´ çßÎðàæè §UÙßðSÅU×ð´ÅU ·¤æð ÕɸUæßæ çÎØæ Áæ ÚUãUæ ãñUÐ âð×èÙæÚU ·¤æ ×é Ø ©UgðàØ ÀUæ˜ææ¥æð´ Ì·¤ »æ´Šæè ß ÙðãUM¤ ·ð¤ çß¿æÚUæð´ ·¤æð Âãé´U¿æÙæ ãñUÐ Ìæç·¤ ßð Âçà¿×è â ØÌæ ·ð¤ ÂèÀðU Ù ÎæñÇð´U¸Ð âð×èÙæÚU ·ð¤ ÂãUÜð çÎ٠´ÁæÕè ØêçÙßçâüÅUè ÂçÅUØæÜæ âð ¥æ° ÂýæðÈð¤âÚU ãUÚUÕ´â ÂæÆU·¤, ´ÁæÕ ØêçÙßçâüÅUè ¿´ÇUè»É¸U âð ¥æ° ÇUæ. ×Ùèá àæ×æü, Ù§üU ç΄è âð ¥æ° ÇUæ. ¥çÙÜ Îžæ çןææ, ´ÁæÕ ØêçÙßçâüÅUè ¿´ÇUè»É¸U âð ¥æ° ÂýæðÈð¤âÚU °×°Ü àæ×æü, ·é¤L¤ÿæð˜æ çßàßçßlæÜØ âð ¥æ§üU ÂýæðÈð¤âÚU âÚUæðÁ ×çÜ·¤ ÌÍæ çÙM¤Â׿ Ùð ¥ÂÙð çß¿æÚU ÂýSÌéÌ ç·¤°Ð âð×èÙæÚU ×ð´ 250 âð ’ØæÎæ çßlæÍèü Öæ» Üð ÚUãðU ãñ´