शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011
34th Zonal Youth Festival 2011
Hindu Girls
College, Jagadhri (Yamuna Nagar) has been privileged by Kurukshetra University to organize the 34th
Zonal Youth Festival 2011 to be held on 30, 31 October & 01 November 2011
from 10.00 a.m. in the college campus.
मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011
लिगेसी इण्डिया मैगजीन में यमुनानगर के ब्लॉगर श्रीश बेंजवाल ‘ई-पण्डित’ की चर्चा
लिगेसी इण्डिया पत्रिका के ताजा अंक में यमुनानगर के तकनीकी लेखक एवं चिट्ठाकार श्रीश बेंजवाल शर्मा की चर्चा हुयी है। श्रीश हिन्दी ब्लॉगजगत में ई-पण्डित के नाम से प्रसिद्ध हैं। हिन्दी कम्प्यूटिंग एवं ब्लॉगिंग पर कई लेख लिखने के अतिरिक्त हिन्दी सम्बन्धी कई सॉफ्टवेयर टूल बना चुके हैं।
(चित्र को स्पष्ट देखने के लिये उस पर क्लिक करें)
शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011
मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011
सोमवार, 3 अक्टूबर 2011
फिल्में बेचने के लिए महिलाओं का हो रहा इस्तेमाल: गोविंद ठुकराल
यमुनानगर। सिनेमा में महिलाओं को ज्यादातर
कमोडिटी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। सिर्फ २५ फीसदी फिल्मों में ही महिलाओं को
ही सही तरीके से दिखाया जाता है। जबकि बाकी ७५
फीसदी सिनेमा में महिलाओं का इस्तेमाल सिनेमा को बेचने के लिए किया जाता है।
यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार गोविंद ठुकराल का। ठुकराल चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म
समरोह में महिला समाज और सिनेमा विषय पर आयोजित विशेष सेमिनार में बतौर मु य अतिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता
कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने की।
ठुकराल ने कहा कि बंगाली, मराठी इत्यादि फिल्मों में महिलाओं के किरदारों को बड़ी संजीदगी
से पेश किया जाता है। यही वजह है कि वहां क्षेत्रीय फिल्मों में महिलाओं की भूमिका
उभर कर सामने आती है। लेकिन हिंदी फिल्मों में इसके विपरित हो रहा है। उन्होंने कहा
कि आज फिल्मों में महिलाओं को लेकर फुहड़ता ज्यादा दिखाई जा रही है। जो कि गलत है।
इस मामले में दर्शकों की जि ोदारी बढ़ जाती है। जब तक वे महिलाओं को सिर्फ इस्तेमाल
की वस्तु साबित करने वाली फिल्मों को नहीं नकारेंगे, तब तक समाज में लोगों का महिलाहओं के प्रति नजरिया नहीं बदलेगा। उन्होंने मदर इंडिया,
दो बीघा जमीन, मिर्च मसाला,
पाथेर पांचाली का जिक्र करते हुए कहा कि इन फिल्मों में महिलाओं
के किरदारों को पूरी दुनिया ने सराहा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में महिलाओं के
सशक्त किरदार वाली फिल्मों में कमर्शियल वैल्यु कम होती है, यही वजह है कि वे फिल्में चल नहीं पाती। उन्होंने कहा कि आज हर क्षेत्र में महिलाओं
की खुद की पहचान है। जबकि पहले वे अपने पति, पिता व दादा के नाम से जानी जाती थी। उन्होंने कहा कि छात्राओं को महिलाओं से संबंधित
मुद्दों की विशेष जानकारी होनी चाहिए।
फिल्म मेकर गजेंद्र एस सोत्रिया ने क्षेत्रीय
सिनेमा में महिलओं के किरदारों को किस प्रकार से प्रस्तुत किया है। इसके बारे में विस्तार
से चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने कहा कि महिलाओं का सिनेमा व सामाज में जो योगदान
है, वह अतुल्नीय है। इसलिए हमारी जि मेदारी बनती है कि हम महिलाओं
को आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित करें। ताकि वे देश के विकास में अपनी भागेदारी निभा
सकें।
कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि
महिला-समाज और सिनेमा विषय पर आयोजित सेमिनार का मु य उद्देश्य कालेज की छात्राओं को
फिल्मों व समाज में महिला की भूमिका से अवगत कराना है। उन्होंने कहा कि युवा देश का
ाविष्य है और जब तक युवा पीढ़ी को इस प्रकार की चीजों के बारे में नहीं बताया जाएगा,
तब तक देश के विकास में अपनी भागेदारी सुनिश्चित नहीं कर सकते।
इसके अलावा उन्होंने आज के संदर्भ में बन रही फिल्मों व उनमें महिलाओं के किरदारों
के बारे में विस्तार से चर्चा की। सेमिनार के दौरान मु य अतिथि ने विद्यर्थियों द्वारा
पूछे गए प्रश्नों का बड़ी संजीदगी से जवाब दिया। कार्यक्रम के दौरा मंच संचालक डा.
भावना सेठी ने किया। मौके पर हिंदी विभाग की अध्यक्षा डा. विश्वप्रभा, डा. गुरशरन कौर, डा. दीपिका
घई उपस्थित रही।
-फिल्म मेकिंग के लिए
संजीदा होना जरुरी: संजीव शर्मा-
यमुनानगर। फिल्म मेकिंग के लिए संजीदा होना
बेहद जरुरी है। क्योंकि फिल्म मेकर की समाज क प्रति बहुत बड़ी जवाबदेही बनती है। उक्त
शब्द मुंबई से आए एक्टर एंड डायरेक्टर संजीव शर्मा ने डीएवी गल्र्स कालेज में चौथे
हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के दौरान चलाए जा रहे फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स
के दौरान बाहर से आए विद्याथियों से रू-ब-रू होते हुए कहे।
संजीव ने कहा कि फिल्म मेकिंग में डायरेक्शन
के लिए सबसे पहले स्क्रिप्ट की समझ होनी चाहिए। फिल्म बनाने में कितना पैसा खर्च किया
जाएगा, इसका पता होना बेहद जरुरी है। इसके अलावा
स्क्रिप्ट के हिसाब से करेक्टर की कास्टिंग जरुरी है। उन्होंने कहा कि अगर सही से करेक्टर
का चयन हो जाता है, तो फिल्म मेकिंग का २५ प्रतिशत काम पूरा हो
जाता है। इसके बाद टेक्निकली स्टाफ व लोकेशन की समझ होना भी बहुत जरुरी है। उन्होंने
कहा कि फिल्म की सफलता के लिए उसकी मार्केटिंग जरुरी है। संजीव ने बताया कि फिल्म रूपी
जहाज में डायरेक्टर कैप्टन होता है। उन्होंने बताया कि एप्रीशिएशन कोर्स के दौरान विद्यार्थियों
को ईरानी फिल्म द लाइफ फार ड्रंकन हॉर्मिज दिखाई गई। इस फिल्म से संबंधित स्क्रिप्ट,
सिनेमेटोग्राफी, एडिटिंग व डायरेक्शन
पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा विद्यार्थियों को फिल्म मेकिंग के लिए एप्टीट्यूड
डवलेप कैसे किया जाए, इसके बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने
कहा कि आज का युवाओं के लिए फिल्म मेकिंग, सिनेमेटोग्राफी,
एडिटिंग में कैरियर बनाने की अपार संभावाए हैं। कालेज में जो
कोर्स चलाया जा रहा है, उसका मु य उद्देश्य
विद्यार्थियों में फिल्म मेकिंग की स्किल्स डवलेप करना है। ताकि वे इस क्षेत्र में
बुलंदियों को छू सकें। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों का बड़ी
संजीदगी से जवाब दिया।
वहीं दूसरी ओर चल रहे इसी कोर्स में सिनेमेटोग्राफर
वीके मलिक ने विद्यार्थियों को बताया कि सिनेमेटोग्राफी में उन्हें कंपोजिशन,
मुड लाइट, कैमरा के मुवमेंट स्टोरी
के हिसाब से कैसे होना चाहिए, इसके बारे में जानकारी
होनी चाहिए। इसके अलावा लोकेशन को किस ढ़ंग से खिंचना (शूट करना) है, ताकि उसकी खुबसूरती पर्दे पर नजर आए। उन्होंने कहा कि अगर लोकेशन
ठीक प्रकार से नहीं खिंची जाएगी, तो सारी मेहतन पर पानी
फिरना लाजमी है। इसके अलावा उन्होंने कैमरा हंडलिंग, कैमरा के टाइप्स तथा सिनेमेटोग्राफी की लेटेस्ट तकनीक क्या है। इसके बारे में विस्तार
से जानकारी दी।
कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने बताया
कि इस बारे उत्तरी भारत की वि िान्न विश्वविद्यालयों व कालेजिज से २५० विद्यार्थी भाग
ले रहे हैं। जिन्हें सिनेमेटोग्राफी की बारिकियों से अवगत कराया जा रहा है।
रविवार, 2 अक्टूबर 2011
हरियाणवी दर्शकों को प्रशिक्षित करने की जरुरत: सतीश कौशिक
यमुनानगर। मशहूर निर्माता निर्देशक एवं अभिनेता
सतीश कौशिक का कहना है कि हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह जैसे आयोजन राज्य में
सिनेमा की संस्कृति को बढ़ावा देने में मददगार साबित होंगे। इसके लिए समारोह के आयोजक
डीएवी कालेज फॉर गल्र्स यमुनानगर की प्रिंसिपल सुषमा आर्य और फिल्म समारोह के निदेशक
अजित राय बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में क्लासिक सिनेमा के लिए दर्शकों
को ट्रेनिंग देने की जरुरत है, ताकि हरियाणा में सामाजिक
मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाने का माहौल तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि वे खुद हरियाणावी
संस्कृति और समाज पर आधारित फिल्में बनाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। कौशिक
ने कहा कि उन्हें हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह से जुडक़र गर्व महसूस हो रहा
है और वे आगे भी जुड़े रहेंगे।
सतीश कौशिक ने कहा कि हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था
पर आधारित फिल्म मेरा नाम मेरा धाम की स्क्रिप्ट तैयार है। जिस पर वे जल्द ही फिल्म
बनाने जा रहे हैं। जिसका निर्देशन सिरसा के रहने वाले राजेश बब्बर करेंगे। सतीश ने
कहा कि हरियाणा में फिल्म संस्कृति विकसित करने की दिशा में हरियाणा फिल्म विकास निगम
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और उन्होंने इसकी स्थापना के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सुझाव दिया है।
सतीश कौशिक ने कहा कि हरियाणा में बजट थियेटरों की स्थापना होनी
चाहिए। जिससे दर्शकों को वाजिब कीमत पर फिल्में देखने को मिल सकें, तभी हरियाणा
जैसे राज्य में फिल्म संस्कृति का विकास हो पाएगा। उन्होंने कहा कि टेलीविजन ने राष्ट्रीय
स्तर पर हरियाणवी भाषा और संस्कृति को स्वीकार कर लिया है। इसका ही असर है कि ना आना
इस देश लाडो जैसे दो तीन सीरियल बड़े चैनलों पर दिखाए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद
जताई कि हरियाणवी सिनेमा में भी ऐसे प्रयास सार्थक एवं सफल हो सकते हैं।
एनएसडी से रिजेक्ट होने के बाद भी नहीं हारी हिम्मत: वाजपेयी
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से कई बार
रिजेक्ट होने के बाद भी अंदर छुपे हुए अभिनेता ने हार नहीं मानी। यही कारण है कि आज
गंभीर रोल की वजह से दुनियाभर में पहचान बनी हुई है। उक्त शब्द सुप्रसिद्ध अभिनेता
मनोज वाजपेयी ने डीएवी गल्र्स कालेज में चल रहे चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म
समारोह के दौरान कही। मनोज बाजपेयी मेकिंग ऑफ एन एक्टर कार्यक्रम में शिरकत करने आए
थे, जिसका संचालन मोहल्ला लाइव डॉट कॉम के मॉडरेटर अविनाश ने किया।
मनोज बाजपेयी ने बताया कि उनके पिता उन्हें
डाक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन उन्होंने डाक्टर की पढ़ाई के लिए परीक्षा नहीं दी और
वे सीधा दिल्ली पहुंच गए और रंगमंच से जुड़ गए। रंगमंच पर शुरू में ऐसे लोगों से पाला
पड़ा जो जीवन को दूसरे नजरिए से देखते थे। अपना अनुभव बांटते हुए वाजपेयी ने कहा कि
श्रीराम सेंटर में नेटुआ नाटक प्रस्तुत करते समय जब बत्ती गुल हो गई तो, वहां पर कैंडल्स के बीच उन्होंने शो किया। थियेटर की मशहूर शख्सियत
बैरी जॉन से थियेटर की तालीम ले चुके मनोज वाजपेयी से जब यह पूछा गया कि आखिर क्या
वजह रही वो गंभीर सिनेमा की ओर मुड़े और शाहरूख खान ने कमर्शियल सिनेमा का रूख किया,
तो उन्होंने कहा कि शाहरूख शुरू से ही चार्मिंग रहे है। यही
वजह है कि उन्होंने कमर्शियल सिनेमा को अपनाया और उसमें आगे बढ़े, जबकि मनोज ने समानांतर सिनेमा को चुना। मनोज ने बताया कि उनकी
शुरू से ही इच्छा रही है कि वह नसीर, ओमपुरी की तरह
सिनेमा करें और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हासिल करें। यही वजह है कि वे शुरू से ही
रंगमंच के प्रति समर्पित रहे हैं। शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन में मानसिंह की
भूमिका निभाने के बाद शेखर कपूर ने उनसे कहा था कि तुम्हारा काम अभिनय करना है,
जबकि कैमरा मैन का काम उसे कैप्चर करना है। तुम अभिनय नहीं करोगे,
तो उसे बार-बार करना पड़ेगा। मनोज बाजपेयी ने बताया कि तब से
शेखर कपूर की ये सीख उन्हें याद है। उन्होंने कहा कि अपनी फिल्मों के सबसे बड़े आलोचक
वे खुद है और फिल्म पूरी होने के बाद कभी भी अपनी फिल्म नहीं देखी।
मनोज वाजपेयी ने बताया कि उनकी पहली फिल्म
बैंडिट क्वीन थी, जो कि शेखर कपूर के साथ थी। इस फिल्म में
उन्होंने जो चरित्र निभाया था, वह खामोशी वाला था।
लेकिन ये फिल्म करने के ४-५ साल तक उन्हें
कोई काम नहीं मिला। इम्तिहान और स्वाभिमान जैसे सीरियलों में काम करने के बाद उन्हें
कुछ पैसे तो मिले, लेकिन पहचान नहीं। उन्होंने बताया कि सत्या,
शूल, जुबैदा, दिल पर मत ले यार इत्यादि फिल्मों में उन्होंने यादगार अभिनय
किया है। भारी संख्या में दर्शकों ने भी मनोज वाजपेयी से सवाल पूछे। दर्शकों ने मनोज
के कैरियर, उनकी फिल्मी जिंदगी के उतार चढ़ावा और निभाए
गए चरित्रों को लेकर कई सवाल दागे, जिनका मनोज ने बड़ी
चतुराई से सामना किया। जिनमें श्वेता सिंह और नवीन कुमार के सवालों को खुद मनोज ने बेहतरीन सवाल बताया और उन्हें
अपनी फिल्म की डीवीडी भेंट की।
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