शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

चौथे हरियाणा अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म समोराह की प्रैस कांफ्रेंस

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चौथे हरियाणा अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म समोराह का पहला दिन












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बेहतर दुनिया का सपना दिखाता सिनेमा- लेसली उड्विन

सुप्रसिद्ध ब्रिटिश फिल्मकार लेसली उड्विन का कहना है कि अच्छा सिनेमा बेहतर दुनिया बनाने का एक माध्यम होता है। दुनिया भर में हम जैसे फिल्मकार केवल पैसे और प्रसिद्धि के लिए नहीं, समाज को जीने लायक बनाने के लिए फिल्म बनाते हैं। यह फिल्मोत्सव इसलिए जरुरी है, क्योंकि चारों ओर अच्छे सिनेमा के लिए जगह कम होती जा रही है। लेसली उड्विन ने डीएवी गल्र्स कालेज यमुनानगर में चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय समारोह का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। यह समारोह सात अक्टूबर तक चलेगा। समारोह का शुभारंभ उनकी नई फिल्म वेस्ट इज वेस्ट से हुआ, जो उनकी ईस्ट इज ईस्ट का दूसरा भाग है।
लेसली ने कहा कि यहां आकर जो खुशी उन्हें हुई है, वह दुनिया के किसी भी दूसरे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्म वेस्ट इज वेस्ट ऐसी फिल्म है, जिसका भारत को वर्षों से इंतजार था। उन्होंने फिल्म प्रदर्शन के बाद दर्शकों के सवालों के जवाब दिए। ओमपुरी को मुख्य भूमिका में लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ओमपुरी विश्व के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक है। 
उन्होंने इस तरह के फिल्म समारोह की वकालत करते हुए कि ये फिल्म समारोह इसलिए जरुरी है कि आज ऐसी फिल्मों को मल्टीप्लेक्स व थियेटर में ओपनिंग नहीं मिल पाती। फिल्म समारोह में इस तरह के सिनेमा को प्रोमोट करने से आम जनता भी ऐसी फिल्में देख पाती है। आज का दर्शक अच्छे सिनेमा की कद्र करना जानता है। उन्होंने कहा कि हॉलीवुड व बॉलीवुड के अधिकतर फिल्म निर्माता केवल पैसे के पीछे भाग रहे हैं। इसके अलावा बड़ी स्टारकॉस्ट को फिल्म में प्रमोट कर रहे हैं। जबकि उनके हिसाब से फिल्म की कहानी और उसका भाव ही फिल्म को हिट या फ्लाप करते हैं। उडवीन ने कहा कि इन दोनों फिल्मों की कहानियों को लेसली ने नहीं, बल्कि कहानियों ने उन्हें चुना।
ऐंटरटेनमेंट सोसायटी ऑफ गोवा के सीईओ और भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजक मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के आयोजन देश में जगह-जगह होने चाहिए। जिससे अच्छै सिनेमा का एक दर्शक वर्ग तैयार हो सकें।
इस मौके पर डीएवी गल्र्स कालेज की प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि उनके लिए सौभाग्य की बात है कि लंदन की सुप्रसिद्ध फिल्मकार लेसली उडवीन उनके साथ है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माता के यहां आने से सच्चे मायनों में यह समारोह अंतर्राष्ट्रीय हो गया है। उन्होंने कहा कि अच्छे सिनेमा को पूरी दुनिया में सराहा जाता है।
फिल्म समारोह के निदेशक अजित राय ने कहा कि चौथे वर्ष यह समारोह नई ऊंचाइयों को छू रहा है और सच्चे अर्थों में विश्व स्तर का हो गया है। उन्होंने इस फिल्म समरोह के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि भारत और दुनिया भर की करीब ५० फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा सांस्कृतिक नवजागरण के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, यह फिल्म समारोह इसके स्वागत की तैयारी है। उन्होंने घोषणा की कि  इस समारोह का विस्तार देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले १० बड़े समारोह में होगा।  
वेस्ट इज वेस्ट से हुआ फिल्म समारोह का उद्घाटन-
चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह की उद्घाटन फिल्म लेसली उडवीन की वेस्ट इज वेस्ट रही। लेसली उडवीन ने बताया कि जहां पर ईस्ट इज ईस्ट  फिल्म समाप्त हुई थी, वहीं से वेस्ट इज वेस्ट फिल्म को शुरू किया गया है। फिल्म की शुरूआत में ओमपुरी वापिस पाकिस्तान लौट चुका है। जहां पर वह अपने बेटे की शादी मुस्लिम दोस्त की बेटी से करवाना चाहता है। लेकिन ओमपुरी का बेटा मना कर देता है और वह शादी के मंडप से भाग जाता है। जिसके बाद ओमपुरी अपनी दूसरी पत्नी के पास वापिस लंदन लौट जाता है। लेकिन इसी बीच ओमपुरी की दूसरी बीवी पाकिस्तान आ जाती है। जहां पर ओमपुरी की पहली पत्नी व दूसरी पत्नी के बीच संवाद होता है। फिल्म में दो सांस्कृतियों के बीच का समन्वय दिखाया गया है। लेसली उड्विन ने बताया कि उन्होंने वेस्ट इज वेस्ट की सिक्वल फिल्म ईस्ट इज वेस्ट बनाने का निर्णय लिया है।  



Mr. Manoj Srivastava - CEO, Entertainment Society of Goa, Ajit Rai - Director of Haryana International Film Festiva, Ravinder Punj - Technical Editor HIFF, Swati Gupta - Chief Reporter HIFF.
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सिनेमा की समझ पैदा करना सबसे बड़ी जरूरत : मनोज श्रीवास्तव

यमुनानगर, ३० सितंबर। हिंदी समाज में अच्छे सिनेमा की समझ विकसित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। हिंदी भाषी इलाके में पापुलर सिनेमा में गंभीर सिनेमा को पीछे कर दिया है। इसलिए छोटे-छोटे फिल्म जागरुकता कार्यक्रमों को जरूरत है ऐंटरटेनमेंट सोसायटी ऑफ गोवा के सीईओ और भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजक मनोज श्रीवास्तव ने कही।
मनोज श्रीवास्तव डीएवी गल्र्ज कॉलेज यमुनानगर में चौथे फिल्म एप्रीसिएशन कोर्स का उद्घाटन वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने अमेरिकी फिल्म सिंगिंग इन द रेन और हिंदी फिल्म अराधना के दृश्यों को व्याख्या करते हुए कला के रूप में सिनेमा के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।
श्रीवास्तव ने कहा कि यमुनानगर में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह और एप्रीसिएशन कोर्स का होना अपने आप में सुखद आश्चर्य है। यह घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। ३०० छात्र-छात्राओं का इस कोर्स में हिस्सा लेना अपने आप में विश्व रिकार्ड है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रधान सचिव शिव रमन गौड ने मुख्यातिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि सरकार इस आयोजन को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रही है। आज नई पीढ़ी के लिए सिनेमा बहुत बड़ी ताकत है। इससे पता चलता है कि सिनेमा चरित्र निर्माण और अच्छे नागरिक बनाने मे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस आयोजन को हरियाणा सरकार हर संभव सहयोग करती रहेगी।
फिल्म समारोह के निदेशक अजित राय ने कहा कि हम केवल उत्सव नहीं कर रहे हैं बल्कि समझ के साथ उत्सव कर रहे हैं। हमारा नारा है कि सिनेमा की समझ और सिनेमा का उत्सव। आज हिंदी सिनेमा समाज को सपने दिखाता है और समाज सपने देख रहा है। हम नई पीढ़ी को सपनों की दुनिया से बाहर लाकर जिंदगी की सच्चाइयों का सामना करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। विश्व सिनेमा, क्षेत्रीय सिनेमा और राष्ट्रीय सिनेमा को एक साथ प्रस्तुत कर हम सिनेमा का सबसे बड़ा संसार सामने ला रहे हैं।
अजित राय ने कहा कि जिस फिल्म एप्रीसिएशन कोर्स के लिए छात्र-छत्राओं को पूणे जाना पड़ता है और भारी पैसा खर्च करना पड़ता है उसे हम हरियाणा में नि:शुल्क प्रदान कर रहे हैं। अच्छे सिनेमा को नई पीढ़ी के बीच लेजाने का हमारा यह सामाजिक अभियान है। इससे फिल्म एवं मनोरंजन उद्योग में हरियाणा की नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ेगी। इससे विश्व स्तर पर हरियाणा की छवि बदलेगी। हरियाणा सांस्कृतिक नवजागरण के दरवाजे पर खड़ा है। यह समारोह उस नवजागरण का स्वागत करने की पहल है।
कॉलेज प्रिंसिपल सुषमा आर्य ने कहा कि फिल्म एप्रीसिएशन कोर्स में उत्तर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों से ३०० से ज्यादा छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं। जिन्हें कोर्स के दौरान फिल्म मेकिंग, एडीटिंग, स्क्रिप्ट राईटिंग व अभिनय की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। कोर्स का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सिनेमा की समझ को विकसित करना है ताकि वे आगे चलकर इसमें अपना सहयोग दे सके।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर ने कहा कि यमुनानगर का फिल्म फैस्टिवल प्रदेश के लिए मील का पत्थर है। जिसने नई पीढ़ी को नई दिशा दी है। यमुनानगर शहर प्रदेश के कोने में है, कॉलेज प्रिंसिपल सुषमा आर्य की क्षमता है कि पिछले तीन साल से इसका आयोजन लगातार कर रही है। प्रदेश सरकार व शहर के उद्योगपतियों से अगर लगातार सहयोग नहीं मिलेगा तो इस समारोह को आगे चला पाना मुश्किल होगा।
ईस्ट इज ईस्ट रही एप्रीसिएशन कोर्स की ओपनिंग फिल्म
निर्माण लेस्ली उडविल व निर्देशक डैमिल ओ डोनेल तथा लेखक आयुब खान की ईस्ट इज ईस्ट मूवी एप्रीएिशन कोर्स की ओपनिंग फिल्म रही। यह एक ब्रिटिश फिल्म है। जिसने दुनिया भर में १६० करोड रुपये का कारोबार कियार है। यह फिल्म लंदन में बसे एक पाकिस्तानी मुस्लिम परिवार की कहानी है। जिसका मुखिया जहांगीर खान इस बात से परेशान है कि उसके बच्चे इस्लामी परंपरा को छोड़ रहे हैं। जहांगीर खान की भूमिका में ओमपुरी ने यादगार अभिनय किया है व अपनी पहली बीवी बसीरा को पाकिस्तान में छोड़ आया है और लंदन में एक आयरलैंड की महिला से शादी करके रह रहा है। यह फिल्म पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों के बीच टकराहट की कहानी है। जिसे कॉमेडी के रूप में फिल्माया गया है।
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सिनेमा की सशक्त अभिव्‍यक्ति का माध्‍यम है विजुवल : अमित शरण

यमुनानगर। विजुवल के जरिए अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम सिनेमा है। लेकिन वो अभिव्यक्ति क्या हो, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उक्त शब्द जमशेदपुर से आए फिल्म मेकर अमित शरण ने डीएवी गल्र्स कालेज में चतुर्थ हरियाणा फिल्म समारोह के दौरान चलाए जा रहे फिल्म मेकिंग कोर्स के पहले दिन विद्यार्थियों को संबोंधित करते हुए कहे।
शरण ने कहा कि क्रिएटीविटी और जीविका के बीच कैसे बैलेंस बनाया जाए, यह एक आर्ट है। वर्कशाप के दौरान पहले दिन विद्यार्थियों को सिनेमा क्या है, क्यों सिनेमा बनाएं, सिनेमा बनाने के लिए विषय कैसे चुनें और फिर कैसे उसके आर्थिक पहलू को संबोधित करें, इन सभी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सिनेमा विजुवल का माध्यम है, बाकि सारी चीजें उसे सपोर्ट करती है, चाहे वह साउंड हो या फिर इफेक्टस, सिनेमा बनाने के लिए विजुवल्स में यकीन होना जरुरी है। सिनेमा के लिए विषय का चुनाव या कहानी का चुनाव आप अपने व्यक्तित्व के हिसाब से करते हैं। इसलिए अपने व्यक्तित्व पर काम करना जरुरी है। दूसरी सबसे जरुरी चीज है, संवेदनशीलता। सिनेमा के अलग-अलग वर्ग है, जैसे डाक्युमेंट्री, फिक्शन, म्यूजिक वीडियो या फिर समाचार। संवेदनशीलता इन सबसे बीच एक धागे की तरह हैं, जो क्रिएटीविटी को विजुवल्स के साथ पिरो देती है।
शरण ने विद्यार्थियों को बताया कि सिनेमा के लिए कहानियां अधिकतर साहित्य से या वास्तविक जिंदगी से ली जाती है। कोई कहानी या नोवल पढ़ते समय पाठक उसका निर्देशक खुद होता है। लेकिन जब हम सिनेमा बनाते हैं, तो वही कहानी दर्शकों के पास निर्देशक के हिसाब से पहुंचती है। कहानी के चरित्र और उसका परिवेश, निर्देशक अपनी सोच के हिसाब से फिर से रचता है। यह जरुरी है कि कहानी को सिनेमा बनाते समय उसके चरित्र और परिवेश को वास्तविक कहानी के आसपास रखा जाए। सिनेमा बनाने के लिए कैमरा, एडिटिंग और साउंड सिर्फ टूल्स हैं। माध्यम महत्वपूर्ण है, टूल्स नहीं। सिनेमा बनाने के बदलते परिवेश में मुंबईया फिल्मों से अलग हटकर फिल्में भी अब व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। बदलती हुई तकनीक जहां हाई डेफिनेशन फॉरमेट्स सिनेमा घरों तक पहुंचने लगे हैं, जिनका खर्च ३५ एमएम सिनेमा के प्रोडक्शन से बहुत कम है। वहां कहानी और अभिव्यक्ति सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। महंगी तकनीक के बहाने सिनेमा को बहुत सालों तक व्यापार और कुछ प्रोडक्शन हाऊसेज़ तक सीमित रखा गया। अब सिनेमा बनाने और दिखाने की स्वतंत्रता पहले से बहुत अधिक बढ़ गई है। अब पैसा सिनेमा की अभिव्यक्ति के बीच आड़े नहीं आता। इसके लिए जरुरी है, कि कैमरा और एडीटिंग जैसे टूल्स पर बखुबी आपका अधिकार हो। कैमरा कहानी का हिस्सा हो, ना कि किसी कहानी को कहने के दौरान कैमरा दिख जाए। अर्थात अच्छी फिल्मों में सिर्फ कहानी दिखती है, कैमरा और एडीटिंग नहीं दिखाता। इसके लिए जरुरी है, कैमरामैन का विश्वास कहानी में हो और कैमरा उसके दिमाग और शरीर का हिस्सा हो। एडीटिंग भी सिनेमा का एक ऐसा पहलु है, जिसमें जितने कम इफेक्टस का इस्तेमाल हो, उतना बेहतर है। सिंपल कट्स से कहानी में जो बात बनकर आती है, वो हजारों इफेक्ट्स और चालाकी भरे दांव-पेंचों से नहीं बनती। यह भी समझना जरुरी है कि वो व्यक्ति सबसे बेहतर क्या कर सकता है। इसे समझने के लिए एक अनुभव हेल्पफूल हो सकता है, अगर आप कोई भी काम बिना एफर्ट लगाए आसानी से कर रहे हो, इसका मतलब आप सबसे बेहतर वो काम कर सकते हैं। कम से कम सिनेमा और क्रिएटीविटी के क्षेत्र में यह फार्मूला कारगर है। 
 
 
जमशेदपुर से आए फिल्म मेकर अमित शरण डीएवी गल्र्स कालेज में चतुर्थ हरियाणा फिल्म समारोह के दौरान चलाए जा रहे फिल्म मेकिंग कोर्स के पहले दिन विद्यार्थियों को संबोंधित करते हुए।
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