मंगलवार, 8 मार्च 2011
मंच पर दिखी बंटवारे की टीस
यमुनानगर के एमएलएन कॉलेज में हुआ असगर वजाहत के नाटक जिस लाहौर नहीं देख्या का मंचन।
यह नाटक ऐसा है, जिसे बार बार देखने को मन करता है। वहीं मानवीय रिश्ते। वहीं संवेदना। वहीं चिंता। तकलीफ भी वहीं। सब कुछ वैसा ही है। कुछ भी तो नहीं बदला। लगता है आज भी हम उसी दोराहे पर खड़े हैं। वह दोहराया जहां से बंटे थे दो देश।
एक पाकिस्तान दूसरा भारत। यह सिर्फ जमीन का बंटवारा भर नहीं था। बंटवारा था इंसान का। इंसानियत का। प्यार और मोहब्बत भी बंटे थे, इस बंटवारे में। जिस लाहौर नहीं देख्या...। एक बार फिर से मंच पर वही संवेदना बिखेर गया। जिसके दर्द को दर्शक देर तक महसूस करते रहे। सोचते रहे। और शायद समझने की कोशिश कर रहे थे। उस वक्त को। जो गुजर गया। पर उसके जख्म अभी भी हरे हैं। ताजे हैं, जैसे किसी नश्तर ने अभी अभी दिए हो। खून रिस रहा हो उनमें। मुकंद लाल नेशनल (एमएलएन) कालेज के हाल में हुआ असगर वजाहत के नाटक जिस लाहौर नहीं देख्या... अभी भी उतना ही नया है, जितना पहली बार देखने पर लगा था। कसी हुई पटकथा। इस पर कसा हुआ अभिनय। इतनी बारीकी से बात कह गया। लगा कि मंच से सीधे संवाद हो रहा है। १९४७ के बंटवारे के बाद लाहौर से जब हिंदू भारत आए। एक अकेली माई हिंदू औरत लाहौर में हार गई। उसका घर लखनऊ से लाहौर आए मुस्लिम महाजिर मिर्जा साहिब को अलाट हो जाता है। घर में तन्हा औरत को पाकर वह परेशान हो जाता है। फिर शुरू होता है माई को घर से बाहर निकालने का सिलसिला। और, यहीं है बस वह नाटक। निर्देशन जावेद खान के निदेशन में मंचन किया गया नाटक अपनी छाप छोडऩे में पूरी तरह से कामयाब रहा।
रतन की अम्मा की भूमिका में अवनीत कौर और सिकंदर मिर्जा की भूमिका में मुसव्विर अली खान अपनी अपनी भूमिका को सार्थक कर गए। इसके साथ ही विक्रांत जैन, विशाल, नीलम अग्रवाल, शानू, इतिशर्मा, वसी उर्र रहमान, आनंद सौदाई, संदीप शर्मा, सोहन कुमार, ज्योति बतरा, सांची अग्रवाल, सुहैल उबादा, मेहेरबान मलिक, उसामा व शाहिद ने भी अच्छा अभिनय मंच पर प्रस्तुत किया। सभी ने इस मंचन की खुले दिल से सराहना की।
एक पाकिस्तान दूसरा भारत। यह सिर्फ जमीन का बंटवारा भर नहीं था। बंटवारा था इंसान का। इंसानियत का। प्यार और मोहब्बत भी बंटे थे, इस बंटवारे में। जिस लाहौर नहीं देख्या...। एक बार फिर से मंच पर वही संवेदना बिखेर गया। जिसके दर्द को दर्शक देर तक महसूस करते रहे। सोचते रहे। और शायद समझने की कोशिश कर रहे थे। उस वक्त को। जो गुजर गया। पर उसके जख्म अभी भी हरे हैं। ताजे हैं, जैसे किसी नश्तर ने अभी अभी दिए हो। खून रिस रहा हो उनमें। मुकंद लाल नेशनल (एमएलएन) कालेज के हाल में हुआ असगर वजाहत के नाटक जिस लाहौर नहीं देख्या... अभी भी उतना ही नया है, जितना पहली बार देखने पर लगा था। कसी हुई पटकथा। इस पर कसा हुआ अभिनय। इतनी बारीकी से बात कह गया। लगा कि मंच से सीधे संवाद हो रहा है। १९४७ के बंटवारे के बाद लाहौर से जब हिंदू भारत आए। एक अकेली माई हिंदू औरत लाहौर में हार गई। उसका घर लखनऊ से लाहौर आए मुस्लिम महाजिर मिर्जा साहिब को अलाट हो जाता है। घर में तन्हा औरत को पाकर वह परेशान हो जाता है। फिर शुरू होता है माई को घर से बाहर निकालने का सिलसिला। और, यहीं है बस वह नाटक। निर्देशन जावेद खान के निदेशन में मंचन किया गया नाटक अपनी छाप छोडऩे में पूरी तरह से कामयाब रहा।
रतन की अम्मा की भूमिका में अवनीत कौर और सिकंदर मिर्जा की भूमिका में मुसव्विर अली खान अपनी अपनी भूमिका को सार्थक कर गए। इसके साथ ही विक्रांत जैन, विशाल, नीलम अग्रवाल, शानू, इतिशर्मा, वसी उर्र रहमान, आनंद सौदाई, संदीप शर्मा, सोहन कुमार, ज्योति बतरा, सांची अग्रवाल, सुहैल उबादा, मेहेरबान मलिक, उसामा व शाहिद ने भी अच्छा अभिनय मंच पर प्रस्तुत किया। सभी ने इस मंचन की खुले दिल से सराहना की।
सोमवार, 7 मार्च 2011
चूल्हा चौंका छोड़ ली कंप्यूटर की शिक्षा
चूल्हे चौकें के चक्कर में पूरा दिन कब बीत जाता था, इसका अंदाजा ही नहीं लग पाता था। लेकिन आज वे बेहद खुश है, क्योंकि उन्होंने खुद के व्यक्तित्व विकास के लिए डीएवी गल्र्स कालेज के विमैन स्टडी सेंटर द्वारा आयोजित कंप्यूटर लिटरेसी कोर्स को पूरा कर लिया है। सोमवार को कालेज में ग्रामीण क्षेत्र की ऐसी महिलाओं व लड़कियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिन्होंने तीन महीने तक इस कोर्स में भाग लिया। विमैन स्टडी सेंटर की इंचार्ज अर्चना रावत ने बताया कि ग्रामीण व शहर की विभिन्न कालोनियों में रहने वाली महिलाओं को कंप्यूटर शिक्षा देने के उद्देश्य से करीब तीन महीने पहले कंप्यूटर लिटरेसी कोर्स शुरू किया गया था। जिसमें जम्मू कालोनी, रतनपुर, तेजली, छछरौली क्षेत्र की २५ महिलाओं व लड़कियों ने भाग लिया। कोर्स के दौरान कंप्यूटर विभाग की शिक्षिकाओं ने इन्हें बेसिक कंप्यूटर, इंटरनेट, टाइपिंग, एमएस वर्ड, विडों इत्यादि की जानकारी दी गई। ताकि वे इसका प्रयोग दैनिक कार्यों में कर सकें। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी ज्यादातर लड़कियां व महिलाएं कंप्यूटर शिक्षा से वंचित है। तीन महीने तक चले इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य उन्हें कंप्यूटर की नई तकनीक से अवगत करना था। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में भी कालेज में इस प्रकार के तीन और कोर्स आयोजित किए जाएंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को कंप्यूटर की नि:शुल्क शिक्षा दी जा सकें। समारोह में डा. अलका व डा. मंजू खन्ना ने महिलाओं व लड़कियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। समारोह के दौरान विमैन स्टडीज़ कोर्स की छात्राओं को भी प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा-
छछरौली निवासी रजनी, रेखा, मंजू, जम्मू कालोनी की शारदा, सोनिया व रेखा का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे इस प्रकार से कंप्यूटर की शिक्षा लेंगी। पहले तो उन्हें कंप्यूटर की एबीसीडी भी मालूम नहीं थे। लेकिन तीन महीनों के दौरान वे इतना जरुर सीख गई हैं कि ठीक प्रकार से उसे ओपरेट कर सकें। रतनपुरा निवासी मोहन लता, दिव्या, रोशनी व इंदू का कहना है कि कंप्यूटर सीखने के बाद अब वे अपने रिश्तेदारों के यहां ई मेल इत्यादि भेज सकती है। इसके अलावा वे अन्य कार्य भी कर रही हैं। नि:शुल्क में कंप्यूटर शिक्षा देकर मुख्यधारा से जोडऩे का श्रेय डीएवी गल्र्स कालेज के विमैन स्टडी सेंटर को जाता है।
रविवार, 6 मार्च 2011
शनिवार, 5 मार्च 2011
रक्तदान से बड़ा नहीं कोई पुनित कार्य: शर्मा
-रक्तदान शिविर में एकत्रित की १५१ यूनिट-
यमुनानगर। डीएवी गल्र्स कालेज में शुक्रवार को कालेज की एनएसएस यूनिट व रेड रिबन क्लब के सौजन्य से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर कालेज की पूर्व प्रिंसिपल डा. कमलेश भंडारी की याद में लगाया गया, जबकि इसे यमुनानगर के स्टार ब्लड डोनर केपी शशि को समर्मिपत किया गया। शिविर में १५१ यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। शिविर का उद्घाटन स्टार ब्लड डोनर के पिता एनके शर्मा ने किया। जबकि अध्यक्षता कालेज प्रिंसिल डा. सुषमा आर्या ने की।
डा. शर्मा ने कहा कि उनके बेटे केपी शशि ने यमुनानगर में सबसे ज्यादा बार ब्लड डोनेट किया है, जो कि उनके लिए उपलब्धि से कम नहीं है। उन्हें इस बात की खुशी है कि डीएवी गल्र्स कालेज ने उनके बेटे की याद में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। जिसे उनका परिवार ताउम्र याद रखेंगा। उन्होंने कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। खून की एक-एक बूंद अमूल्य है। जो कि किसी को जीवन प्रदान करने में कारगर साबित होती है।
कालेज प्रिंसिपल डा. आर्य ने कहा कि सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए कालेज सदा अग्रणीय रहता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर कालेज में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे रक्तदान के लिए सदा तैयार रहे। शिविर के दौरान डा. आर्या ने भी रक्तदान किया। रेडक्रास समिति के सचिव डा. डीआर शर्मा ने कहा कि यमुनानगर जिले के लिए यह सुखद है कि बेटियां रक्तदान के लिए आगे आ रही हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण उन्हें डीएवी गल्र्स कालेज के प्रागण में लगाए गए रक्तदान शिविर में देखने को मिला। रक्तदान के मामले में डीएवी गल्र्स कालेज का जिले मेें अग्रणीय स्थान है। जब भी सोसायटी को रक्त की जरुरत पड़ती है, तो वह समय-समय पर जिले के शिक्षण संस्थानों में शिविर का आयोजन कर रक्त एकत्रित करने का काम करती है। शिविर को सफल बनाने में रेडक्रास की टीम के साथ आए डाक्टर्स की टीम ने सहयोग दिया। मौके पर शिविर के आयोजक डा. भावना, डा. गुरशरन ने छात्राओं का मनोबल बढ़ाया।
जन्मदिन पर किया रक्तदान-
कालेज की छात्रा करिश्मा ने शुक्रवार को अपने जन्मदिन पर रक्तदान किया। करिश्मा का कहना है कि उसके लिए यह खुशी की बात है कि वह किसी का जीवन बचाने के उद्देश्य से रक्तदान कर रही है। पहली बार रक्तदान करने वाली छात्राओं से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से उन्हें शकुन मिला है। बी कॉम प्रथम वर्ष की महिमा मेहता व सुरभि मेहता का कहना है कि सेवा भाव के नाते उन्हें ब्लड दिया है। रक्तदान करने की प्रेरणा उन्हें अपने टीचर्स से मिली है। बीए मास कम्यूनिकेशन अंतिम वर्ष की छात्रा करुणा का कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसलिए वह रक्तदान कर रही है। उनके द्वारा दान किया गया रक्त किसी को जीवन प्रदान करेगा। बी-कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा मंनिद्र कौर का कहना है कि रक्तदान करने की प्रेरणा उसे अपने मम्मी पापा से मिली है।
कालेज की छात्रा करिश्मा ने शुक्रवार को अपने जन्मदिन पर रक्तदान किया। करिश्मा का कहना है कि उसके लिए यह खुशी की बात है कि वह किसी का जीवन बचाने के उद्देश्य से रक्तदान कर रही है। पहली बार रक्तदान करने वाली छात्राओं से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से उन्हें शकुन मिला है। बी कॉम प्रथम वर्ष की महिमा मेहता व सुरभि मेहता का कहना है कि सेवा भाव के नाते उन्हें ब्लड दिया है। रक्तदान करने की प्रेरणा उन्हें अपने टीचर्स से मिली है। बीए मास कम्यूनिकेशन अंतिम वर्ष की छात्रा करुणा का कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसलिए वह रक्तदान कर रही है। उनके द्वारा दान किया गया रक्त किसी को जीवन प्रदान करेगा। बी-कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा मंनिद्र कौर का कहना है कि रक्तदान करने की प्रेरणा उसे अपने मम्मी पापा से मिली है।
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