शहर के दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सफाई कर्मचारिओं के कार्यकलापों को देखने पर पाया गया कि वो कचरा एकत्र करते है और उस में आग लगा देते है उस कचरे में आधिक मात्रा में पोलीथीन होती है लोगो को पता नहीं है वो पोलीथीन के निपटान का साधन उस में आग लगा देना मानते है| वो नहीं जानते कि पोलीथीन को यदि उच्च ताप पर बंद भट्टी में जलाया जाये तो बनने वाली सारी गैसे भी जल जाती है और सिर्फ CO2 गैस बनती है परन्तु यदि इन सफाई कर्मचारिओं की तरह वातावरण में सुलगा कर छोड़ दिया जाए तो ये दिन भर सुलग सुलग कर बदबूदार धुआं छोड़ती रहेगी | मेरे शहर में दिन भर अजीब सी बदबू फैली रहती है
शनिवार, 26 मार्च 2011
मेरे शहर का दुःख या सारे देश का .....
बढती आबादी के मद्देनजर शहरों में ठोस कचरा बढा है परन्तु मेरे शहर के सफाई कर्मचारिओं ने एक अजीब पर्यावरण नाशी तरीका ढूंढा है वो ठोस कचरा एकत्र करते है और उसे वहीं पर ही जला देते है |
शहर के दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सार्वजनिक सफाईव्यवस्था का अध्यन |
शहर के दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सफाई कर्मचारिओं के कार्यकलापों को देखने पर पाया गया कि वो कचरा एकत्र करते है और उस में आग लगा देते है उस कचरे में आधिक मात्रा में पोलीथीन होती है लोगो को पता नहीं है वो पोलीथीन के निपटान का साधन उस में आग लगा देना मानते है| वो नहीं जानते कि पोलीथीन को यदि उच्च ताप पर बंद भट्टी में जलाया जाये तो बनने वाली सारी गैसे भी जल जाती है और सिर्फ CO2 गैस बनती है परन्तु यदि इन सफाई कर्मचारिओं की तरह वातावरण में सुलगा कर छोड़ दिया जाए तो ये दिन भर सुलग सुलग कर बदबूदार धुआं छोड़ती रहेगी | मेरे शहर में दिन भर अजीब सी बदबू फैली रहती है
शहर के दो वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में सफाई कर्मचारिओं के कार्यकलापों को देखने पर पाया गया कि वो कचरा एकत्र करते है और उस में आग लगा देते है उस कचरे में आधिक मात्रा में पोलीथीन होती है लोगो को पता नहीं है वो पोलीथीन के निपटान का साधन उस में आग लगा देना मानते है| वो नहीं जानते कि पोलीथीन को यदि उच्च ताप पर बंद भट्टी में जलाया जाये तो बनने वाली सारी गैसे भी जल जाती है और सिर्फ CO2 गैस बनती है परन्तु यदि इन सफाई कर्मचारिओं की तरह वातावरण में सुलगा कर छोड़ दिया जाए तो ये दिन भर सुलग सुलग कर बदबूदार धुआं छोड़ती रहेगी | मेरे शहर में दिन भर अजीब सी बदबू फैली रहती है
जब हम ने एक सफाई कर्मचारी से पूछा तो उसने बताया कि कूड़ा इस लिए जलाता हूँ , हमारे पास साधन नहीं है. कामचोरी इनकी सेह्त हमारी .
वालंटियर्स जांचेंगे मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग
-प्रदेश के सात जिले में रखे जाएंगे पांच हजार से ज्यादा वालंटियर्स-
-यमुनानगर जिले में नियुक्त होंगे ६७० वालंटियर्स-
-ग्रामीण क्षेत्र में २०० व शहरी क्षेत्र में ५०० घरों की जांच करेगा एक वालंटियर-
-यमुनानगर जिले में नियुक्त होंगे ६७० वालंटियर्स-
-ग्रामीण क्षेत्र में २०० व शहरी क्षेत्र में ५०० घरों की जांच करेगा एक वालंटियर-
जगाधरी। आने वाले दिनों में अगर कोई व्यक्ति आपके घर पर आकर कूलर, गमलों व अन्य जगह पर रखे पानी में मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग (अड्डे देने वाली जगह) चेक करें, तो चौकिए मत। मलेरिया की रोकथाम के लिए डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज मलेरिया ने प्रदेश के सात जिलों में पांच हजार से ज्यादा वालंटिसर्य को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यमुनानगर जिले को भी इसमें शामिल किया गया है। मच्छर की ब्रिडिंग की जांच करने से पहले स्वास्थ्य विभाग बकायदा इन वालंटियर्स क टे्रनिंग देगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में सबसे ज्यादा मलेरिया के केसिज़ यमुनानगर, करनाल, हिसार, सिरसा, गुडग़ांव, फरीदाबाद व फतेहाबाद जिले में सामने आते हैं। इन जिलों में मलेरिया पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने इस बार पहले से ही रणनीति बनाई है। विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक उक्त जिलों में गांव व वार्ड स्तर पर वालंटियर्स रखे जाएंगे। जो कि घर-घर जाकर मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग जांचेंगे। हाल ही में डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज मलेरिया ने उक्त सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर वालंटियर्स रखने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद जिला स्तर पर वालंटियर्स रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पीएचसी व सीएचसी स्तर पर दी जाएगी टे्रनिंग-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग चेक करने के लिए जिन वालंटियर्स को नियुक्त किया जाएगा, उन्हें पीएचसी व सीएचसी स्तर पर बकायदा टे्रनिंग दी जाएगी। टे्रनिंग के दौरान उन्हें मलेरिया मच्छर व लारवे की पहचान के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। लारवे को किस प्रकार से नष्ट करना है और उसे आगे फैले कैसे रोकना है, इस बारे में भी उन्हें बताया जाएगा। ताकि वे घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में सबसे ज्यादा मलेरिया के केसिज़ यमुनानगर, करनाल, हिसार, सिरसा, गुडग़ांव, फरीदाबाद व फतेहाबाद जिले में सामने आते हैं। इन जिलों में मलेरिया पर अंकुश लगाने के लिए विभाग ने इस बार पहले से ही रणनीति बनाई है। विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक उक्त जिलों में गांव व वार्ड स्तर पर वालंटियर्स रखे जाएंगे। जो कि घर-घर जाकर मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग जांचेंगे। हाल ही में डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज मलेरिया ने उक्त सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर वालंटियर्स रखने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद जिला स्तर पर वालंटियर्स रखने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पीएचसी व सीएचसी स्तर पर दी जाएगी टे्रनिंग-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग चेक करने के लिए जिन वालंटियर्स को नियुक्त किया जाएगा, उन्हें पीएचसी व सीएचसी स्तर पर बकायदा टे्रनिंग दी जाएगी। टे्रनिंग के दौरान उन्हें मलेरिया मच्छर व लारवे की पहचान के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। लारवे को किस प्रकार से नष्ट करना है और उसे आगे फैले कैसे रोकना है, इस बारे में भी उन्हें बताया जाएगा। ताकि वे घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर सकें।
गांव में २०० व शहर में ५०० घर जांचेगा एक वालंटियर-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक वालंटियर एक सप्ताह के दौरान गांव में २०० व शहर में ५०० घरों की जांच करेगा। वह अपने द्वारा जांचेगे गए घरों पर अगले चार सप्ताह तक नजर रखेंगे। घर में जांच के दौरान वह कूलर, गमलों व छत पर पड़े टायरों में पानी को जांचेगा। जिसकी रिपोर्ट वह विभाग के अधिकारियों को देगा। अगर कहीं पर मलेरिया की ब्रिडिंग मिलेगी, तो तुरंत विभाग के अधिकारी हरकत में आ जाएंगे और उक्त जगह पर जाकर दवा का छिडक़ाव करेंगे और दवाइयां वितरित करेंगे। झूठी रिपोर्ट दी तो नपेंगे वालंटियर्स-
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अगर किसी वालंटियर्स ने झूठी रिपोर्ट दी तो वह नपेंगे। विभाग के अधिकारियों की मानें तो वालंटियर्स द्वारा जांचें गए घरों की विभाग द्वारा नियुक्ति अधिकारी द्वारा रेंडमली जांच की जाएगी। जांच के दौरान अगर कोई घर ठीक नहीं पाया गया या फिर वालंटियर्स द्वारा दी गई रिपोर्ट गलत मिली, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। ------------------------------------------------------------------------------------------------------
डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिज विभाग की ओर से जारी पत्र उन्हें मिल गया है। गांव व वार्ड स्तर पर वालंटियर्स रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही उनकी टे्रनिंग शुरू कर दी जाएगी। प्रदेश के सात जिलों में वालंटियर्स रखे जाएंगे। यमुनानगर में ६७० वालंटियर्स रखने का प्रावधान है। जो कि घर-घर जाकर मलेरिया मच्छर की ब्रिडिंग की जांच करेंगे। - डा. विजय मोहन अत्रेजा, डिप्टी सिविल सर्जन एवं जिला मलेरिया अधिकारी, यमुनानगर। ------------------------------------------------------------------------------------------------------
गुरुवार, 24 मार्च 2011
बुधवार, 23 मार्च 2011
विश्व वानिकी दिवस मनाया गया World Forestry Day
विश्व वानिकी दिवस मनाया गया World Forestry Day
इस अवसर पर एक इको मार्च किया गया इस रैली का संचालन सुनील कुमार और मनोहर लाल अध्यापको ने किया,क्लब सदस्यों ने पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ के नारे लगा कर इस दिवस बारे जागरूकता संचार किया, इस अवसर पर एक गोष्टी भी की गयी जिस में अध्यापको ने क्लब सदस्यों को विश्व वानिकी दिवस और वनों के लाभों के बारे में बताया कि वनों से हमे आक्सीजन गैस मिलती है,वन वर्षा करवाने में सहायक हैं,वन भूमि कटाव रोकते है, वन,वन्य जीवों का आश्रय हैं,वन प्रदूषण दूर करते हैं और वनों से लकड़ी की प्राप्ती तो वनों का बहुत ही गौण लाभ है परन्तु मानव इस को ही सबसे बड़ा लाभ मान कर अंधाधुन्द वनों की कटाई कर रहा है जो कि धरती के लिए घातक है
उन्होंने बताया कि एक अनुमान है कि प्रति वर्ष १५ लाख हेक्टेयर वन कटते है । भारत की राष्ट्रीय वन नीति में कहा गया था कि देश एक-तिहाई हिस्से को हरा भरा वनों युक्त रखेंगे,लेकिन पिछले वर्षों में भू-उपग्रह के चित्रों से पता चलता है कि है कि देश में 33 प्रतिशत के बजाय 13 प्रतिशत ही वन क्षेत्र रह गया है। क्लब प्रभारी एवं क्लब ग्रुप लीडर दिलबाग सिंह ने सभी क्लब सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर के यह निर्णय लिया कि इस वर्ष जुलाई अगस्त में विद्यालय के खेल के मैदान में उचित जगहों पर फल-फूल ,छाया दार एवं औषधीय पेड़ पौधे लगाएं जाएँगे
द्वारा--दर्शन लाल बवेजा(विज्ञान अध्यापक)
आज राजकीय वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय अलाहर में विश्व वानिकी दिवस मनाया गया इस उपलक्ष्य में इको मार्च और गोष्टी का आयोजन किया गया, इमली इको क्लब के सदस्यों को सम्बोधित करते हुए क्लब प्रभारी दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक ने बताया कि दुनिया भर में विश्व वानिकी दिवस प्रति वर्ष २१ मार्च को मनाया जाता है । सन् 1872 में अमेरिका के नेबरास्का में इसकी शुरूआत हुई, इस दिवस को मनाये जाने का सारा श्रेय जे-र्स्टीलंग मार्टिन को जाता है| इन्होने नेबरास्का में बड़ी संख्या में पौधे लगाए थे । इसके बाद इन्होंने अन्य निवासियों को फल-फूल, छायादार,पर्यावरण सरक्षंण और खुबसूरती हेतु पौधे लगाने की सलाह दी । उन्होंने सरकार को पौधे लगाने के लिए एक अलग विशेष दिन रखने के लिए राज़ी कर लिया । इस प्रकार तब से इस दिन विश्व वानिकी दिवस की शुरूआत हुई । प्रथम वानिकी दिवस पर एक लाख से ज्यादा पौधे लगाये गए, धीरे-धीरे पुरी दुनिया में यह दिवस एक महापर्व के रूप में मनाया जाने लगा ।
इस अवसर पर सभी सदस्यों व अध्यापकों संजय शर्मा,मुकेश रोहिल,संदीप कुमार,रविंदर कुमार का योगदान सराहनीय था |
अखबार में
द्वारा--दर्शन लाल बवेजा(विज्ञान अध्यापक)
यमुना ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूशन्स में वार्षिक उत्सव का आयोजन
यमुना ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूशन्स मे दो दिवसीय वार्षिक उत्सव की शुरूआत की गई । कार्यक्रम में चौ. देवी लाल इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट, गणपति कालेज ऑफ मैनेजमेंट, शिवालिक ग्रुप ऑफ इंस्टीटयूशन, महार्षि वेद व्यास, ऐसियन इंस्टीटयूट, अंबाला कालेज ऑफ इंजिनयरिंग, हिन्दुस्तान, गुरू गोबिन्द सिंह इंस्टीटयूट आWफ मैनेजमेंट इत्यादि के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया । रंगोली प्रतियोगिता में महार्षि वेद व्यास कालेज के विद्यार्थीयों ने प्रथम स्थान हासिल किया । डैकलामेशन में प्रथम स्थान गणपति संस्थान की महक ने प्रथम स्थान हासिल किया । एक्सटैमपोर में गुरू गोबिन्द सिंह इंस्टीटयूट के सागर भूटानी ने प्रथम स्थान हासिल किया । मंहदी में यमुना ऑफ की बी.बी.ए. की छात्रा सोनम ने प्रथम स्थान हासिल किया । स्पैल बी. में यमुना ऑफ के अंकूर ने प्रथम स्थान हासिल किया। विभिन्न तकनीकी कार्यक्रम जैसे कि पेपर प्रैजेन्टेशन, क्विज, डिबेट, स्पैल बी, पोस्टर मेकिंग, मेहन्दी, एक्सटैम्पोर, डैकलामेशन, लैन गेमिंग, फेस पेंटिग, सलाद कटिंग, ऑफ डिसकसन व रंगोली प्रतियोगिता मे छात्रों ने प्रथम स्थान प्राप्त कर पुरस्कार हासिल किए। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत की गई । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओ.बी.सी. बैंक, करनाल के डिप्टी जनरल मैनेजर श्री निहाल सिंह कासनियां रहे । मुख्य अतिथि ने भारतीय संस्कृति के अनुरूप दीप प्रजवलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया । कार्यक्रम की शुरूआत मैनेजमैंट के विद्यार्थी हिमांशू शपरा ने शब्द गाकर की । भारतीय संस्कृति की हर झलक को इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रस्तुत किया गया । पंजाब की शान भांगडा प्रस्तुत करते विद्यार्थियों ने अपने जोश से दर्शकों को भी अपने साथ नाचने पर मजबूर कर दिया । इनके इलावा कोरियोग्रफी, माईम, शोलो डांस, सालसा, कलासिकल नृत्य, फैशन प्रेड, मैजिक शो इत्यादि कार्यक्रम के मुख्य आर्कषण रहे। संस्थान के डायरैक्टर जनरल डा.एस.आर. मैंहदीरत्ता ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। डा. सर्वजीत कौर ने प्रोग्रम को सुयोजित किया तथा सभी उपस्थित लोगों का ध्न्यवाद किया। इस कार्यक्रम मे संस्थान के चैयरमैन चौ0 राजिन्द्र कुमार, डायरैक्टर जनरल डा. एस.आर.मैहदीरत्ता, डायरैक्टर डा. सर्वजीत कौर, डा. राजीव खंडूजा प्रिंसीपल, श्री निर्मल सिंह प्रिंसीपल, इंजि. त्रिलोक सिंह, श्री इन्द्रपाल सिंह, श्री सतपाल सिंह उपस्थित थे।
मंगलवार, 22 मार्च 2011
कोलॉज मेकिंग में अमनप्रीत व किरणदीप ने मारी बाजी
यमुनानगर। डीएवी गल्र्स कालेज में मंगलवार को इंटरनेशनल ईयर ऑफ कैमेस्ट्री के उपलक्ष्य में कोलॉज मेकिंग कंपीटिशन का आयोजन किया गया। जिसमें बीएससी प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष की छात्राओं ने भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को कैमेस्ट्री विभाग की अध्यक्षा डा. रवि बाठला ने पुरस्कृत किया।
डा. बाठला ने बताया कि छात्राओं ने कोलॉज मेकिंग के दौरान कैमेस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली चीजों का प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि हम डेली यूज में रोजाना रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें टूथेपेस्ट, साबून, कॉस्मेटिक्स, फूड प्रोडक्टस इत्यादि शामिल है। उपरोक्त सभी चीजों को बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि फूड प्रोडक्टस को खराब होने से बचाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। डा. बाठला के मुताबिक मोमबत्ती बनाने के लिए हाइड्रो कार्बन, प्लास्टिक व टायर बनाने के लिए पोलीमर का प्रयोग किया जाता है। जबकि पेट्रोलियम के शुद्धिकरण से हमें पेट्रोल और एलपीजी गैस मिलती है। इस प्रक्रिया में भी रसायन का प्रयोग किया जाता है।
उन्होंने बताया कि छात्राओं ने कैमिस्ट्री इन द सर्विस ऑफ मैन काइंड विषय पर कोलॉज मेकिंग की। जिसमें उन्होंने दिखाया कि दवाइयों व उर्वरक में रसायन का प्रयोग किस प्रकार से होता है। इसके अलावा उन्होंने घर में प्रयोग होने वाली माचिस, क्लीनर्स, घड़ी में पडऩे वाले सैल, कास्मेटिक्स, मास्किटो क्वाइल्स, बलिचिंग पाउडर, बेकिंग पाउडर, मीठा सोडा, सीट्रिक एसिड इत्यादि के प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिकल चीजों में भी पोलीमर का प्रयोग किया जाता है। डा. उर्मिल राणा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों में छात्राओं को अपनी प्रतिभा को दिखाने का अवसर मिलता है। कोलॉज मेकिंग के दौरान छात्राओं ने डेली यूज में होने वाली चीजों का बारिकी से अध्यन किया। जिससे उनका ज्ञान वृद्र्धन हुआ। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
निर्णायक मंडल में डा. रवि बाठला, डा. उर्मिल राणा, डा. नीना बजाज व डा. आभा शामिल रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में एरिका सुनेजा व सोनिया कांबोज ने सहयोग दिया।
इस प्रकार रहा परिणाम-
बीएससी नॉन मेडिकल प्रथम वर्ष की छात्रा अमनप्रीत कौर व किरनदीप कौर ने संयुक्त रुप से पहला, अंजली व कोमन ने दूसरा तथा जसनीत व नैंसी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
डा. बाठला ने बताया कि छात्राओं ने कोलॉज मेकिंग के दौरान कैमेस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली चीजों का प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि हम डेली यूज में रोजाना रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें टूथेपेस्ट, साबून, कॉस्मेटिक्स, फूड प्रोडक्टस इत्यादि शामिल है। उपरोक्त सभी चीजों को बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि फूड प्रोडक्टस को खराब होने से बचाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। डा. बाठला के मुताबिक मोमबत्ती बनाने के लिए हाइड्रो कार्बन, प्लास्टिक व टायर बनाने के लिए पोलीमर का प्रयोग किया जाता है। जबकि पेट्रोलियम के शुद्धिकरण से हमें पेट्रोल और एलपीजी गैस मिलती है। इस प्रक्रिया में भी रसायन का प्रयोग किया जाता है।
उन्होंने बताया कि छात्राओं ने कैमिस्ट्री इन द सर्विस ऑफ मैन काइंड विषय पर कोलॉज मेकिंग की। जिसमें उन्होंने दिखाया कि दवाइयों व उर्वरक में रसायन का प्रयोग किस प्रकार से होता है। इसके अलावा उन्होंने घर में प्रयोग होने वाली माचिस, क्लीनर्स, घड़ी में पडऩे वाले सैल, कास्मेटिक्स, मास्किटो क्वाइल्स, बलिचिंग पाउडर, बेकिंग पाउडर, मीठा सोडा, सीट्रिक एसिड इत्यादि के प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिकल चीजों में भी पोलीमर का प्रयोग किया जाता है। डा. उर्मिल राणा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों में छात्राओं को अपनी प्रतिभा को दिखाने का अवसर मिलता है। कोलॉज मेकिंग के दौरान छात्राओं ने डेली यूज में होने वाली चीजों का बारिकी से अध्यन किया। जिससे उनका ज्ञान वृद्र्धन हुआ। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
निर्णायक मंडल में डा. रवि बाठला, डा. उर्मिल राणा, डा. नीना बजाज व डा. आभा शामिल रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में एरिका सुनेजा व सोनिया कांबोज ने सहयोग दिया।
इस प्रकार रहा परिणाम-
बीएससी नॉन मेडिकल प्रथम वर्ष की छात्रा अमनप्रीत कौर व किरनदीप कौर ने संयुक्त रुप से पहला, अंजली व कोमन ने दूसरा तथा जसनीत व नैंसी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
शनिवार, 19 मार्च 2011
शुक्रवार, 18 मार्च 2011
डीएवी में सत्र समापन पर हुआ २१ कुंडीय हवन यज्ञ
डीएवी गल्र्स कालेज में सत्र समाप्ति के अवसर पर २१ कुंडीय हवन यज्ञ के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।चंडीगढ़ से आए पंडित यजब्रह्मा दाऊ दयाल जी शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ में पूर्णाहुति डलवाई और छात्राओं के सुखद व उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज प्र्रिंपिल डा. सुषमा आर्य ने की।
२१ कुंडिय हवन यज्ञ शुरू करने से पूर्व पंडित दाऊ दयाल जी शास्त्री जी ने सभी छात्राओं से आह्वान किया कि वे परमपिता परमेश्वर का ध्यान करें। जो कि सर्वत्र विद्यमान है और सर्वशक्तिमान है। योगीजन उसका ध्यान करते हैं और विद्वान उसी की महिमा का गान करते हैं। वो ही सबका पालन हार है। ओम नाम का उच्चारण करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सदैव गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। गायत्री मंत्र का जाप करने से जीवन सुगंधित हो जाता है और हमें आत्मिक बल मिलता है। उन्होंने छात्राओ से आह्वान किया कि वे ईश्वर की स्तुति का मिलकर पाठ करें। उन्होंने कहा कि योग व भक्ति के जरिए परमात्मा को पाया जा सकता है। उन्होंने प्रभू से आह्वान किया कि हे प्रभू मेरी वाणी में माधुर्य भर दो, इतना ही नहीं मेरा वाणी पर नियंत्रण रहे। ताकि जीवन में सौहार्द की भावना भरी रहे।
उन्होंने बताया कि जीवन भी एक यज्ञशाला है। इसे देवताओं की भूमि भी कहा जाता है। इसी के माध्यम से हम पुण्य कमा सकते हैं। जिसके जरिए हम जीवन में ऊंचा उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि शरीर को पाकर प्राणियों ने बुलंदियों को छूआ है। मनुष्य ने ज्ञान विज्ञान की आहूति दी है। उन्होंने कहा जब मनुष्य अच्छा खाएगा और अच्छा सोचेगा, तभी हमार अत:करण अच्छा होगा, अन्यथा नहीं। उन्होंने कहा कि संस्कृति के माध्यम से मन को निर्मल बनाया जा सकता है। जिसके बाद मन शिव संकल्पों वाला बन जाता है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे जीवन में पुरुषार्थ करें और बुलंदियों को छुए। जो विद्यार्थी जीवन में मेहनत करता है, वह ताउम्र सुख भोगता है और जो मेहनत नहीं करता उसे दुखों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता व गुरुजनों का आदर सत्कार करें और नित्य प्रतिदिन उन्हें नमस्कार करें। इससे उन्हें भगवान का भरपुर आशीर्वाद प्राप्त होगा। तभी तो कहा गया है पितृ देवो भव: आचार्य देवो भव:। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि का विकास होता है। इससे जीवन प्रकाशमय होता है। इस मंत्र का जाप करने से दीर्घायु प्राप्त होती है।
कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि डीएवी गल्र्स कालेज महापुरुषों के दिखाए हुए रास्ते पर अग्रसर है। कालेज में समय-समय पर हवन यज्ञ का आयोजन किया जाता है। ताकि युवा पीढ़ी में नैतिक गुणों का समावेश हो सकें। छात्राएं सफलता की बुलंदियों को छुएं। २१ कुंडीय हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के उपरांत कालेज परिसर में लंगर का आयोजन किय गया। जिसमें को सारे स्टाफ व छात्राओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
मंगलवार, 15 मार्च 2011
अबके भी खूब जले कृषि अवशेष यमुनानगर में
अबके भी खूब जले कृषि अवशेष यमुनानगर में
इंसान अपने आप को इस धरती का सबसे समझदार प्राणी मानता है। बावजूद इसके वह ऐसी-ऐसी हरकतें करता है कि उसकी अक्ल पर कभी-कभी तरस आने लगता है। आपने भी अपने जीवन में ऐसी तमाम घटनाएं देखी होंगी और टाल गये होंगे। लेकिन जब मामला धरती माँ का हो, तो चिन्तित होना स्वाभाविक है। ऐसी ही एक गम्भीर चिन्ता से अवगत करा रहे है आप को
अबके भी खूब जले कृषि अवशेष
एक कहावत या कुछ और बचपन से सुनते आये है कि हरियाणा का कल्चर है तो वो है एग्रीकल्चर परन्तु इस नई जनरेशन के किसानो ने तजर्बे की कमी और जल्दी जल्दी अमीर बनने की खवाहिश के मद्देनजर शोर्ट-कट अपनाने शुरू कर दिए है सरकार आदेश देती है
ये नई जनरेशन के किसान उसे समझते ही नहीं है |
पिछले चार वर्षों से जिला प्रशाशन अखबार के व लोकल टीवी चैनलों के माध्यम से कृषि अवशेष न जलाने बारे आदेश प्रसारित करवाता है शुक्र है किसानो को ये तो पता लग गया कि कोई जीवाणु/कीड़े होते है वो खेतों में ही कृषि अवशेष जलाने से मर जाते है इसलिए खेतों में ही कृषि अवशेष नहीं जलाने चाहिए हाय री ज्ञान की इन्तहा! वो कृषि अवशेष खेतों से तो उठ गए और आ गए सड़कों के किनारे किनारे कई किलोमीटर तक गन्ने की पात्ती, गेंहू के पोरे, सूरज मुखी के टंडे, धान की पुराली, लहसुन के अवशेष, पापुलर के पत्ते आदि कृषि अवशेष जला दिए जाते है पर अपने खेतों में नहीं सडको के किनारे पर |एक दम सुरक्षित एवं सरल उपाय सुबह सवेरे फेंकों रात के अँधेरे में फूंको !! क्या अपनी ऐसी तेसी करवा लेगी ग्लोबल वार्मिंग|
कृषि अवशेष को जलने से रोकना होगा,किसानो को प्रेरित करना होगा कि कृषि अवशेष जलाने से किसान थोड़ी मेहनत से तो बच जाता है परन्तु इसका खेत की उर्वरा शक्ति,पर्यावरण और जैव विविधता पर बुरा प्रभाव पड़ता है इस कुकृत्य को रोकना होगा और कृषको को जागरूक करना होगा |
इंसान अपने आप को इस धरती का सबसे समझदार प्राणी मानता है। बावजूद इसके वह ऐसी-ऐसी हरकतें करता है कि उसकी अक्ल पर कभी-कभी तरस आने लगता है। आपने भी अपने जीवन में ऐसी तमाम घटनाएं देखी होंगी और टाल गये होंगे। लेकिन जब मामला धरती माँ का हो, तो चिन्तित होना स्वाभाविक है। ऐसी ही एक गम्भीर चिन्ता से अवगत करा रहे है आप को
अबके भी खूब जले कृषि अवशेष
एक कहावत या कुछ और बचपन से सुनते आये है कि हरियाणा का कल्चर है तो वो है एग्रीकल्चर परन्तु इस नई जनरेशन के किसानो ने तजर्बे की कमी और जल्दी जल्दी अमीर बनने की खवाहिश के मद्देनजर शोर्ट-कट अपनाने शुरू कर दिए है सरकार आदेश देती है
ये नई जनरेशन के किसान उसे समझते ही नहीं है |
पिछले चार वर्षों से जिला प्रशाशन अखबार के व लोकल टीवी चैनलों के माध्यम से कृषि अवशेष न जलाने बारे आदेश प्रसारित करवाता है शुक्र है किसानो को ये तो पता लग गया कि कोई जीवाणु/कीड़े होते है वो खेतों में ही कृषि अवशेष जलाने से मर जाते है इसलिए खेतों में ही कृषि अवशेष नहीं जलाने चाहिए हाय री ज्ञान की इन्तहा! वो कृषि अवशेष खेतों से तो उठ गए और आ गए सड़कों के किनारे किनारे कई किलोमीटर तक गन्ने की पात्ती, गेंहू के पोरे, सूरज मुखी के टंडे, धान की पुराली, लहसुन के अवशेष, पापुलर के पत्ते आदि कृषि अवशेष जला दिए जाते है पर अपने खेतों में नहीं सडको के किनारे पर |एक दम सुरक्षित एवं सरल उपाय सुबह सवेरे फेंकों रात के अँधेरे में फूंको !! क्या अपनी ऐसी तेसी करवा लेगी ग्लोबल वार्मिंग|
कृषि अवशेष को जलने से रोकना होगा,किसानो को प्रेरित करना होगा कि कृषि अवशेष जलाने से किसान थोड़ी मेहनत से तो बच जाता है परन्तु इसका खेत की उर्वरा शक्ति,पर्यावरण और जैव विविधता पर बुरा प्रभाव पड़ता है इस कुकृत्य को रोकना होगा और कृषको को जागरूक करना होगा |
सोमवार, 14 मार्च 2011
रविवार, 13 मार्च 2011
ਪੰਜਾਬੀ ਲਿਖਣ ਵਾਲ੍ਯਾ ਵਾਸਤੇ
ਤੁਸੀਂ ਪੰਜਾਬੀ ਲਿਖਣਾ ਚਾਹੰਦੇ ਹੋ, te ਇਹ ਲਵੋ ਪੰਜਾਬੀ ਲਿਖਣ ਦਾ ਜੁਗਾੜ
http://shriwaheguru.com/punjabi_keyboard.html
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मंगलवार, 8 मार्च 2011
बदलनी होगी महिलाओं के प्रति सोच: यादव
जब तक महिलाओं के प्रति लोगों की सोच में बदलाव नहीं होगा, तब तक स्थिति में ज्यादा सुधार की गुंजाइश नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में आज भी महिलाएं परिवार के सभी लोगों को खाना खिलाने के उपरांत खुद पतीला चाटती नजर आती है। क्योंकि वह ऐसा करना अपना धर्म समझती है। उक्त शब्द कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग की प्रोफेसर लीला यादव ने डीएवी गल्र्स कालेज में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हरियाणा में महिलाओं की स्थिति विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने की।
प्रोफेसर यादव ने कहा कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति ज्यादा बढिय़ा नहीं है। घटते लिंगानुपात के कारण लोग २० से २५ हजार रुपए में दूसरे राज्यों से दुल्हन खरीदकर ला रहे हैं। जबकि प्रदेश में एक भैंस की कीमत ६० हजार रुपए हैं। हालांकि शिक्षा के बढ़ते प्रभाव की वजह से थोड़ा बहुत बदलाव जरुर आया है, लेकिन उतना नहीं। राजनीति में महिलाओं ने कुछ जगह बनाने की कौशिश की है, ग्रास रूट लेवल पर आरक्षण होने की वजह से महिलाओं की भागेदारी ज्यादा बढ़ी है। लेकिन महिला सरपंच व पंच आज भी पुरुष के हाथों की कटपुतलियां है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के विकास में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, इसलिए उन्हें दरकिनार नहीं किया जा सकता। घर के पैसे में महिला का भी उतना ही अधिकार होना चाहिए, जितना पुरुष का। महिलाओं को शिक्षित करना बेहद जरुरी है। ताकि सामाजिक बुराइयों के बंधन को तोड़ा जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक सिस्टम महिलाओं के हक में नहीं है। इन सभी समस्याओं से लडक़र ही महिलाओं को खुद की जगह बनानी होगी।
पंजाबी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डा. सुनील देवी ने हरियाणा लोकसभा चुनावों में महिला उम्मीद्वरों की स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीति में महिला उम्मीद्वरों की भागेदारी बहुत कम है। लीडरशीप में भी महिलाओं को हायर पोस्ट नहीं मिली। उन्होंने सामाजिक ढांचे को बदलने पर जोर दिया।
डीएवी गल्र्स कालेज के समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सीमा सेठी ने कहा कि प्रदेश में लड़कियों को कम तव्वजो दी जाती है। शिक्षा का स्तर भी बढिय़ा नहीं है। मल्टीनेशनल कंपनीज़ में मैनेजर्स की पोस्ट पर महिलाएं बहुत कम है। उसमें भी हरियाणा की महिलाओं की भागेदारी बहुत कम है। उन्होंने कहा कि सामाजिक ढांचे को बदलने की जरुरत है। तनमीत जगदेव ने लड़कियों की किशोरावस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को स्वावलंबी बनाने के लिए डीएवी गल्र्स कालेज ने उड़ान प्रोजेक्ट की शुरूआत की है। जिसमें उन्हें कंप्यूटर शिक्षा के साथ-साथ जुड़ों कराटे भी सिखाए जा रहे हैं। ताकि वे स्वयं आत्मरक्षा कर सकें।
प्रोफेसर यादव ने कहा कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति ज्यादा बढिय़ा नहीं है। घटते लिंगानुपात के कारण लोग २० से २५ हजार रुपए में दूसरे राज्यों से दुल्हन खरीदकर ला रहे हैं। जबकि प्रदेश में एक भैंस की कीमत ६० हजार रुपए हैं। हालांकि शिक्षा के बढ़ते प्रभाव की वजह से थोड़ा बहुत बदलाव जरुर आया है, लेकिन उतना नहीं। राजनीति में महिलाओं ने कुछ जगह बनाने की कौशिश की है, ग्रास रूट लेवल पर आरक्षण होने की वजह से महिलाओं की भागेदारी ज्यादा बढ़ी है। लेकिन महिला सरपंच व पंच आज भी पुरुष के हाथों की कटपुतलियां है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के विकास में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, इसलिए उन्हें दरकिनार नहीं किया जा सकता। घर के पैसे में महिला का भी उतना ही अधिकार होना चाहिए, जितना पुरुष का। महिलाओं को शिक्षित करना बेहद जरुरी है। ताकि सामाजिक बुराइयों के बंधन को तोड़ा जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक सिस्टम महिलाओं के हक में नहीं है। इन सभी समस्याओं से लडक़र ही महिलाओं को खुद की जगह बनानी होगी।
पंजाबी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डा. सुनील देवी ने हरियाणा लोकसभा चुनावों में महिला उम्मीद्वरों की स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीति में महिला उम्मीद्वरों की भागेदारी बहुत कम है। लीडरशीप में भी महिलाओं को हायर पोस्ट नहीं मिली। उन्होंने सामाजिक ढांचे को बदलने पर जोर दिया।
डीएवी गल्र्स कालेज के समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सीमा सेठी ने कहा कि प्रदेश में लड़कियों को कम तव्वजो दी जाती है। शिक्षा का स्तर भी बढिय़ा नहीं है। मल्टीनेशनल कंपनीज़ में मैनेजर्स की पोस्ट पर महिलाएं बहुत कम है। उसमें भी हरियाणा की महिलाओं की भागेदारी बहुत कम है। उन्होंने कहा कि सामाजिक ढांचे को बदलने की जरुरत है। तनमीत जगदेव ने लड़कियों की किशोरावस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को स्वावलंबी बनाने के लिए डीएवी गल्र्स कालेज ने उड़ान प्रोजेक्ट की शुरूआत की है। जिसमें उन्हें कंप्यूटर शिक्षा के साथ-साथ जुड़ों कराटे भी सिखाए जा रहे हैं। ताकि वे स्वयं आत्मरक्षा कर सकें।
प्रभजोत कौर ने हिंदी महिला कथाकारों के उपन्यासों में स्त्री विमर्श पर विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ने नारी को स्वतंत्रता प्रदान की है। डा. मीनू जैन ने प्रदेश की ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला। अंबिका शर्मा ने क्राइम अंगेस्ट विमैन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापिका आंचल ने हरियाणा की ग्रोथ में महिलाओं की क्या भूमिका है, इसके बारे में बताया। जबकि रितू कंग ने प्रदेश में महिलाओं की स्थिति को आंकड़ों के जरिए प्रस्तुत किया। कालेज के मास कम्यूनिकेशन विभाग के प्राध्यापक परमेश त्यागी ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर महिलाएं की दिक्कतें आज भी कम नहीं हुई है। बेटे की चाह या फिर सास-ससुर व ननद के तानों के जरिए उन्हें प्रताडि़त किया जा रहा है। जब तक महिलाएं खुद जागरूक नहीं होगी, इस प्रकार की समस्याओं से उन्हें दो-चार होना ही पड़ेगा। संगोष्ठ के दौरान ज्योति नरूला व राजेश कुमार ने भी अपने विचार रखें। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में असिस्टेंट प्रोफेसर मलकीत सिंह व अर्चना रावत ने सहयोग दिया।
मंच पर दिखी बंटवारे की टीस
यमुनानगर के एमएलएन कॉलेज में हुआ असगर वजाहत के नाटक जिस लाहौर नहीं देख्या का मंचन।
यह नाटक ऐसा है, जिसे बार बार देखने को मन करता है। वहीं मानवीय रिश्ते। वहीं संवेदना। वहीं चिंता। तकलीफ भी वहीं। सब कुछ वैसा ही है। कुछ भी तो नहीं बदला। लगता है आज भी हम उसी दोराहे पर खड़े हैं। वह दोहराया जहां से बंटे थे दो देश।
एक पाकिस्तान दूसरा भारत। यह सिर्फ जमीन का बंटवारा भर नहीं था। बंटवारा था इंसान का। इंसानियत का। प्यार और मोहब्बत भी बंटे थे, इस बंटवारे में। जिस लाहौर नहीं देख्या...। एक बार फिर से मंच पर वही संवेदना बिखेर गया। जिसके दर्द को दर्शक देर तक महसूस करते रहे। सोचते रहे। और शायद समझने की कोशिश कर रहे थे। उस वक्त को। जो गुजर गया। पर उसके जख्म अभी भी हरे हैं। ताजे हैं, जैसे किसी नश्तर ने अभी अभी दिए हो। खून रिस रहा हो उनमें। मुकंद लाल नेशनल (एमएलएन) कालेज के हाल में हुआ असगर वजाहत के नाटक जिस लाहौर नहीं देख्या... अभी भी उतना ही नया है, जितना पहली बार देखने पर लगा था। कसी हुई पटकथा। इस पर कसा हुआ अभिनय। इतनी बारीकी से बात कह गया। लगा कि मंच से सीधे संवाद हो रहा है। १९४७ के बंटवारे के बाद लाहौर से जब हिंदू भारत आए। एक अकेली माई हिंदू औरत लाहौर में हार गई। उसका घर लखनऊ से लाहौर आए मुस्लिम महाजिर मिर्जा साहिब को अलाट हो जाता है। घर में तन्हा औरत को पाकर वह परेशान हो जाता है। फिर शुरू होता है माई को घर से बाहर निकालने का सिलसिला। और, यहीं है बस वह नाटक। निर्देशन जावेद खान के निदेशन में मंचन किया गया नाटक अपनी छाप छोडऩे में पूरी तरह से कामयाब रहा।
रतन की अम्मा की भूमिका में अवनीत कौर और सिकंदर मिर्जा की भूमिका में मुसव्विर अली खान अपनी अपनी भूमिका को सार्थक कर गए। इसके साथ ही विक्रांत जैन, विशाल, नीलम अग्रवाल, शानू, इतिशर्मा, वसी उर्र रहमान, आनंद सौदाई, संदीप शर्मा, सोहन कुमार, ज्योति बतरा, सांची अग्रवाल, सुहैल उबादा, मेहेरबान मलिक, उसामा व शाहिद ने भी अच्छा अभिनय मंच पर प्रस्तुत किया। सभी ने इस मंचन की खुले दिल से सराहना की।
एक पाकिस्तान दूसरा भारत। यह सिर्फ जमीन का बंटवारा भर नहीं था। बंटवारा था इंसान का। इंसानियत का। प्यार और मोहब्बत भी बंटे थे, इस बंटवारे में। जिस लाहौर नहीं देख्या...। एक बार फिर से मंच पर वही संवेदना बिखेर गया। जिसके दर्द को दर्शक देर तक महसूस करते रहे। सोचते रहे। और शायद समझने की कोशिश कर रहे थे। उस वक्त को। जो गुजर गया। पर उसके जख्म अभी भी हरे हैं। ताजे हैं, जैसे किसी नश्तर ने अभी अभी दिए हो। खून रिस रहा हो उनमें। मुकंद लाल नेशनल (एमएलएन) कालेज के हाल में हुआ असगर वजाहत के नाटक जिस लाहौर नहीं देख्या... अभी भी उतना ही नया है, जितना पहली बार देखने पर लगा था। कसी हुई पटकथा। इस पर कसा हुआ अभिनय। इतनी बारीकी से बात कह गया। लगा कि मंच से सीधे संवाद हो रहा है। १९४७ के बंटवारे के बाद लाहौर से जब हिंदू भारत आए। एक अकेली माई हिंदू औरत लाहौर में हार गई। उसका घर लखनऊ से लाहौर आए मुस्लिम महाजिर मिर्जा साहिब को अलाट हो जाता है। घर में तन्हा औरत को पाकर वह परेशान हो जाता है। फिर शुरू होता है माई को घर से बाहर निकालने का सिलसिला। और, यहीं है बस वह नाटक। निर्देशन जावेद खान के निदेशन में मंचन किया गया नाटक अपनी छाप छोडऩे में पूरी तरह से कामयाब रहा।
रतन की अम्मा की भूमिका में अवनीत कौर और सिकंदर मिर्जा की भूमिका में मुसव्विर अली खान अपनी अपनी भूमिका को सार्थक कर गए। इसके साथ ही विक्रांत जैन, विशाल, नीलम अग्रवाल, शानू, इतिशर्मा, वसी उर्र रहमान, आनंद सौदाई, संदीप शर्मा, सोहन कुमार, ज्योति बतरा, सांची अग्रवाल, सुहैल उबादा, मेहेरबान मलिक, उसामा व शाहिद ने भी अच्छा अभिनय मंच पर प्रस्तुत किया। सभी ने इस मंचन की खुले दिल से सराहना की।
सोमवार, 7 मार्च 2011
चूल्हा चौंका छोड़ ली कंप्यूटर की शिक्षा
चूल्हे चौकें के चक्कर में पूरा दिन कब बीत जाता था, इसका अंदाजा ही नहीं लग पाता था। लेकिन आज वे बेहद खुश है, क्योंकि उन्होंने खुद के व्यक्तित्व विकास के लिए डीएवी गल्र्स कालेज के विमैन स्टडी सेंटर द्वारा आयोजित कंप्यूटर लिटरेसी कोर्स को पूरा कर लिया है। सोमवार को कालेज में ग्रामीण क्षेत्र की ऐसी महिलाओं व लड़कियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए, जिन्होंने तीन महीने तक इस कोर्स में भाग लिया। विमैन स्टडी सेंटर की इंचार्ज अर्चना रावत ने बताया कि ग्रामीण व शहर की विभिन्न कालोनियों में रहने वाली महिलाओं को कंप्यूटर शिक्षा देने के उद्देश्य से करीब तीन महीने पहले कंप्यूटर लिटरेसी कोर्स शुरू किया गया था। जिसमें जम्मू कालोनी, रतनपुर, तेजली, छछरौली क्षेत्र की २५ महिलाओं व लड़कियों ने भाग लिया। कोर्स के दौरान कंप्यूटर विभाग की शिक्षिकाओं ने इन्हें बेसिक कंप्यूटर, इंटरनेट, टाइपिंग, एमएस वर्ड, विडों इत्यादि की जानकारी दी गई। ताकि वे इसका प्रयोग दैनिक कार्यों में कर सकें। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी ज्यादातर लड़कियां व महिलाएं कंप्यूटर शिक्षा से वंचित है। तीन महीने तक चले इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य उन्हें कंप्यूटर की नई तकनीक से अवगत करना था। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में भी कालेज में इस प्रकार के तीन और कोर्स आयोजित किए जाएंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को कंप्यूटर की नि:शुल्क शिक्षा दी जा सकें। समारोह में डा. अलका व डा. मंजू खन्ना ने महिलाओं व लड़कियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। समारोह के दौरान विमैन स्टडीज़ कोर्स की छात्राओं को भी प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा-
छछरौली निवासी रजनी, रेखा, मंजू, जम्मू कालोनी की शारदा, सोनिया व रेखा का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वे इस प्रकार से कंप्यूटर की शिक्षा लेंगी। पहले तो उन्हें कंप्यूटर की एबीसीडी भी मालूम नहीं थे। लेकिन तीन महीनों के दौरान वे इतना जरुर सीख गई हैं कि ठीक प्रकार से उसे ओपरेट कर सकें। रतनपुरा निवासी मोहन लता, दिव्या, रोशनी व इंदू का कहना है कि कंप्यूटर सीखने के बाद अब वे अपने रिश्तेदारों के यहां ई मेल इत्यादि भेज सकती है। इसके अलावा वे अन्य कार्य भी कर रही हैं। नि:शुल्क में कंप्यूटर शिक्षा देकर मुख्यधारा से जोडऩे का श्रेय डीएवी गल्र्स कालेज के विमैन स्टडी सेंटर को जाता है।
रविवार, 6 मार्च 2011
शनिवार, 5 मार्च 2011
रक्तदान से बड़ा नहीं कोई पुनित कार्य: शर्मा
-रक्तदान शिविर में एकत्रित की १५१ यूनिट-
यमुनानगर। डीएवी गल्र्स कालेज में शुक्रवार को कालेज की एनएसएस यूनिट व रेड रिबन क्लब के सौजन्य से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर कालेज की पूर्व प्रिंसिपल डा. कमलेश भंडारी की याद में लगाया गया, जबकि इसे यमुनानगर के स्टार ब्लड डोनर केपी शशि को समर्मिपत किया गया। शिविर में १५१ यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। शिविर का उद्घाटन स्टार ब्लड डोनर के पिता एनके शर्मा ने किया। जबकि अध्यक्षता कालेज प्रिंसिल डा. सुषमा आर्या ने की।
डा. शर्मा ने कहा कि उनके बेटे केपी शशि ने यमुनानगर में सबसे ज्यादा बार ब्लड डोनेट किया है, जो कि उनके लिए उपलब्धि से कम नहीं है। उन्हें इस बात की खुशी है कि डीएवी गल्र्स कालेज ने उनके बेटे की याद में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। जिसे उनका परिवार ताउम्र याद रखेंगा। उन्होंने कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। खून की एक-एक बूंद अमूल्य है। जो कि किसी को जीवन प्रदान करने में कारगर साबित होती है।
कालेज प्रिंसिपल डा. आर्य ने कहा कि सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए कालेज सदा अग्रणीय रहता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर कालेज में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे रक्तदान के लिए सदा तैयार रहे। शिविर के दौरान डा. आर्या ने भी रक्तदान किया। रेडक्रास समिति के सचिव डा. डीआर शर्मा ने कहा कि यमुनानगर जिले के लिए यह सुखद है कि बेटियां रक्तदान के लिए आगे आ रही हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण उन्हें डीएवी गल्र्स कालेज के प्रागण में लगाए गए रक्तदान शिविर में देखने को मिला। रक्तदान के मामले में डीएवी गल्र्स कालेज का जिले मेें अग्रणीय स्थान है। जब भी सोसायटी को रक्त की जरुरत पड़ती है, तो वह समय-समय पर जिले के शिक्षण संस्थानों में शिविर का आयोजन कर रक्त एकत्रित करने का काम करती है। शिविर को सफल बनाने में रेडक्रास की टीम के साथ आए डाक्टर्स की टीम ने सहयोग दिया। मौके पर शिविर के आयोजक डा. भावना, डा. गुरशरन ने छात्राओं का मनोबल बढ़ाया।
जन्मदिन पर किया रक्तदान-
कालेज की छात्रा करिश्मा ने शुक्रवार को अपने जन्मदिन पर रक्तदान किया। करिश्मा का कहना है कि उसके लिए यह खुशी की बात है कि वह किसी का जीवन बचाने के उद्देश्य से रक्तदान कर रही है। पहली बार रक्तदान करने वाली छात्राओं से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से उन्हें शकुन मिला है। बी कॉम प्रथम वर्ष की महिमा मेहता व सुरभि मेहता का कहना है कि सेवा भाव के नाते उन्हें ब्लड दिया है। रक्तदान करने की प्रेरणा उन्हें अपने टीचर्स से मिली है। बीए मास कम्यूनिकेशन अंतिम वर्ष की छात्रा करुणा का कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसलिए वह रक्तदान कर रही है। उनके द्वारा दान किया गया रक्त किसी को जीवन प्रदान करेगा। बी-कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा मंनिद्र कौर का कहना है कि रक्तदान करने की प्रेरणा उसे अपने मम्मी पापा से मिली है।
कालेज की छात्रा करिश्मा ने शुक्रवार को अपने जन्मदिन पर रक्तदान किया। करिश्मा का कहना है कि उसके लिए यह खुशी की बात है कि वह किसी का जीवन बचाने के उद्देश्य से रक्तदान कर रही है। पहली बार रक्तदान करने वाली छात्राओं से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से उन्हें शकुन मिला है। बी कॉम प्रथम वर्ष की महिमा मेहता व सुरभि मेहता का कहना है कि सेवा भाव के नाते उन्हें ब्लड दिया है। रक्तदान करने की प्रेरणा उन्हें अपने टीचर्स से मिली है। बीए मास कम्यूनिकेशन अंतिम वर्ष की छात्रा करुणा का कहना है कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसलिए वह रक्तदान कर रही है। उनके द्वारा दान किया गया रक्त किसी को जीवन प्रदान करेगा। बी-कॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा मंनिद्र कौर का कहना है कि रक्तदान करने की प्रेरणा उसे अपने मम्मी पापा से मिली है।
शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011
बुधवार, 16 फ़रवरी 2011
जनगणना : एक फोन और समाधान
जनगणना महत्वपूर्ण कार्य है। लिहाजा, जिला प्रशासन की ओर से हेल्प लाइन नंबर शुरू किया गया है। एक फोन पर आपकी समस्या का समाधान किया जाएगा। आमजन से लेकर प्रगणक व सुपरवाइजर को दिक्कत हो तो वह 24 घंटे इन नंबर पर संपर्क कर सकता है। हर क्षेत्र के लिए यह नंबर अलग-अलग है।
डीसी एवं प्रधान जनगणना अधिकारी अशोक सांगवान ने आमजन को जनगणना अधिकारी व कर्मचारियों को सहयोग देने का आह्वïान किया। उन्होंने बताया कि जनगणना का दूसरा चरण 28 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान अपने परिवार की जनगणना अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति, प्रगणक व सुपरवाइजर को जनगणना के कार्य में कठिनाई आती है तो वे जनगणना अधिकारियों के हेल्प नंबर पर संपर्क करें। प्रशासन की ओर से जिला मुख्यालय, तहसील जगाधरी, बिलासपुर, छछरौली, नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी व स्पेशल क्षेत्र जगाधरी वर्कशाप के लिए अधिकारियों की टेलीफोन हेल्प लाइन शुरू की है जिन पर 24 घंटे कोई व्यक्ति या जनगणना के कार्य से जुड़ा कोई कर्मचारी सहायता ले सकता है।
ये हैं हेल्प लाइन नंबर
जनगणना अधिकारी (मुख्यालय) अमृत लाल से 90175-49982 तथा जिला आंकड़ा अधिकारी सुभाष शर्मा से इन नंबर 94165-50008 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा सहायक आंकड़ा अधिकारी सचिन परूथी का नंबर 89505-60076 व डीसी कैंप आफिस में 220122 व 237850 पर हेल्प लाइन चालू की गई है। जगाधरी के जनगणना चार्ज अधिकारी एवं तहसीलदार को 97290-37809, नायब तहसीलदार सुरेश कुमार को 94161-45082, कार्यालय कानूनगो आत्मप्रकाश को 94169-55422, नायब तहसीलदार मुस्तफाबाद दलजीत सिंह को 94162-64501, नायब तहसीलदार रादौर राजबीर सिंह को 94162-20933 पर संपर्क किया जा सकता हैं।
इसी तरह तहसील बिलासपुर में 01735-274533, तहसीलदार मोहिन्द्र सिंह को 94674-70444, ओपी राणा को 94160-32728, महेश कुमार नायब तहसीलदार सढौरा को 93154-11892, तहसील छछरौली में 01735-277339, तहसीलदार ईश्वर चंद को 94661-14269, रणधीर सिंह नायब तहसीलदार को 94162-46928, बलवंत सिंह कानूनगो से 94161-79863 पर हेल्प मिलेगी।
नगर निगम कार्यालय फोन नम्बर 01732-237841, अमरजीत सिंह मास्टर टे्रनी 94167-95488, रामनाथ बंसल 94663-03531, नगर निगम कार्यालय जगाधरी 01732-237842, रवि ओबराय जेई 98960-00527, रघुबीर सिंह 94668-30101 व प्रदीप कुमार 94668-08192 से हैल्प लाइन नंबर पर बात की जा सकती है। जगाधरी वर्कशाप के एपीओ पीके शर्मा से 97295-30606, परमजीत सिंह सीएसबी से 97295-33503 तथा प्रवनी बसीन से उनके नंबर 97295-33563 पर संपर्क किया जा सकता है।
डीसी एवं प्रधान जनगणना अधिकारी अशोक सांगवान ने आमजन को जनगणना अधिकारी व कर्मचारियों को सहयोग देने का आह्वïान किया। उन्होंने बताया कि जनगणना का दूसरा चरण 28 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान अपने परिवार की जनगणना अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति, प्रगणक व सुपरवाइजर को जनगणना के कार्य में कठिनाई आती है तो वे जनगणना अधिकारियों के हेल्प नंबर पर संपर्क करें। प्रशासन की ओर से जिला मुख्यालय, तहसील जगाधरी, बिलासपुर, छछरौली, नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी व स्पेशल क्षेत्र जगाधरी वर्कशाप के लिए अधिकारियों की टेलीफोन हेल्प लाइन शुरू की है जिन पर 24 घंटे कोई व्यक्ति या जनगणना के कार्य से जुड़ा कोई कर्मचारी सहायता ले सकता है।
ये हैं हेल्प लाइन नंबर
जनगणना अधिकारी (मुख्यालय) अमृत लाल से 90175-49982 तथा जिला आंकड़ा अधिकारी सुभाष शर्मा से इन नंबर 94165-50008 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा सहायक आंकड़ा अधिकारी सचिन परूथी का नंबर 89505-60076 व डीसी कैंप आफिस में 220122 व 237850 पर हेल्प लाइन चालू की गई है। जगाधरी के जनगणना चार्ज अधिकारी एवं तहसीलदार को 97290-37809, नायब तहसीलदार सुरेश कुमार को 94161-45082, कार्यालय कानूनगो आत्मप्रकाश को 94169-55422, नायब तहसीलदार मुस्तफाबाद दलजीत सिंह को 94162-64501, नायब तहसीलदार रादौर राजबीर सिंह को 94162-20933 पर संपर्क किया जा सकता हैं।
इसी तरह तहसील बिलासपुर में 01735-274533, तहसीलदार मोहिन्द्र सिंह को 94674-70444, ओपी राणा को 94160-32728, महेश कुमार नायब तहसीलदार सढौरा को 93154-11892, तहसील छछरौली में 01735-277339, तहसीलदार ईश्वर चंद को 94661-14269, रणधीर सिंह नायब तहसीलदार को 94162-46928, बलवंत सिंह कानूनगो से 94161-79863 पर हेल्प मिलेगी।
नगर निगम कार्यालय फोन नम्बर 01732-237841, अमरजीत सिंह मास्टर टे्रनी 94167-95488, रामनाथ बंसल 94663-03531, नगर निगम कार्यालय जगाधरी 01732-237842, रवि ओबराय जेई 98960-00527, रघुबीर सिंह 94668-30101 व प्रदीप कुमार 94668-08192 से हैल्प लाइन नंबर पर बात की जा सकती है। जगाधरी वर्कशाप के एपीओ पीके शर्मा से 97295-30606, परमजीत सिंह सीएसबी से 97295-33503 तथा प्रवनी बसीन से उनके नंबर 97295-33563 पर संपर्क किया जा सकता है।
सोमवार, 14 फ़रवरी 2011
रविवार, 13 फ़रवरी 2011
Yamuna nagar me Gtka akhda ke johar aur Baba Banda Singh Bhadar Light and sound Show ki Jalkiyan Cemara ki Najar se



Yamuna nagar me GTKA Akhda ke Johar aur Baba Banda Singh Bhadar Light and sound Show ki Jalkiyan Cemara ki Najar se
Yamuna Nagar ke Blogger DAV college me Parvasi Hindi International saminar ke smapan ke avsar par ik muskan ke sath vida hote huye DR Parvin chopra


Yamuna Nagar ke Blogger DAV college me Parvasi Hindi International saminar ke smapan ke avsar par ik muskan ke sath vida hote huye
1 DR Parvin chopra Vats ji ke sath me
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