मंगलवार, 31 मई 2011
आओ साग बनाएं, खाएं और खिलाएं ।
आओ साग बनाएं, खाएं और खिलाएं ।
वैसे तो बासा कुछ नहीं खाते,
सुबह का बना रात को फैंक आते।
पर जब बात आये साग की,
तो दो-दो दिन का एडवांस बनाते।। आओ साग बनाएं.....
फ्री के भाव मिलता है,
जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है।
बनाते हुए जब पड़ता है रिड़कना,
तो फ्री में कसरत हो जाये।। आओ साग बनाएं.....
तो बिन साग लगे बेसवाद।
नानी के घर जाना हो,
तो साग जरूर मिलना चाहिए वहां।। आओ साग बनाएं.....
अगर पड़ौसी के भी बना हो,
तो मांग कर भी ले आते हैं साग।
शादी में भी सबसे पहले अब लोग,
देखते साग की स्टॉल।। आओ साग बनाएं.....
सोमवार, 30 मई 2011
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 2011 : World No Tobacco Day 31-05-2011
विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 2011 World No Tobacco Day 2011
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| विश्व तम्बाकू निषेध दिवस ३१-०५-११ |
निकोटियाना प्रजाति की वनस्पति के पत्तों को सुखा कर नशा करने के लिए तम्बाकू तैयार किया जाता है; दुनिया का काफी प्राचीन नशा करने का पदार्थ होने के कारण यह आज भी बहुत प्रचलित है तम्बाकू का नशा दो प्रकार से किया जाता है चबा कर या फिर धुंआ बना कर यानी धूम्रपान के द्वारा, चबाने वाले तम्बाकू पान में, पान मसाला, खैनी, मूसा का गुल, गुटखा, तम्बाकू का पानी, मावा, सनस, मिश्री, बज्जर, मैनपुरी स्टायल, जर्दा, क्रीमी तम्बाकू आदि प्रकार प्रचलित हैं | जबकि धूम्रपान प्रकार मे पूरी दुनिया मे तम्बाकू प्रयोग मे लाया जाता है सिगरेट,बीडी,सिगार,पाईप,चुरुट,हुक्का,हुक्ली,चिलम आदि सस्ते नशे की तलाश मे गरीब बंदे की सायकिल पान बीडी के खोखे पर रुकती है. और 2 से 7 रुपयों मे दिन भर का नशे का सामान खरीद लेता है और चढ़ जाता है कैंसर के ट्रैक पर असीमित दुखों की यात्रा पर बेमौत मरने के लिए.
एक बार सन 1997 की बात है मै विज्ञान प्रदर्शनी के लिए हैदराबाद गया हुआ था मेरे एक साथी को राज दरबार,गोवा नामक पान मसाला उर्फ गुटका चबाने की आदत थी जब वो हैदराबाद पहुंचा तो उसे पता चला कि यहाँ गुटके पर बैन है और नहीं मिलते,उस के तो होश उड़ गए और बोला कि 12 दिन कैसे कटेगें. मैंने सोचा अब 12 दिन माल ना मिलने के कारण शायद इस की आदत छूट जाए परन्तु उस ने अगले दिन सुबह तक 1 रूपये वाले गुटके को 5 रुपयों मे खरीदना तय कर लिया किसी पान वाले से; और उन 12 दिनों मे उस ने 700-800 रूपये उस पान वाले के पास गुटकों की खरीद मे लगा दिए और जिस काम के लिए वास्तव मे वो गया था यानी प्रदर्शनी उस मे कोई खास रूचि नहीं दिखाई.
यहाँ तीन प्रश्न उठते हैं?
सरकारों को,
१. क्या तम्बाकू उत्पादों बैन कर देना सही उपाय है ?
२. क्या इन तम्बाकू उत्पादों को बहुत महंगा कर देना चाहिए ?
३. क्या इनका उत्पादन सिर्फ सरकार ही करे और इनको भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत ले लें?
तम्बाकू सेवन के कुछ रोचक तथ्य,
-धूम्रपान 5000-3000 ई.पू.के प्रारम्भिक काल में शुरू हुआ .
-कई सभ्यताओं ने प्राचीन काल मे तम्बाकू को धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसे सुगंध उत्पन्न करने के लिए जलाया.
-विश्व में तम्बाकू 1500 इस्वी के अंतिम दौर में प्रचलित हुआ .
-तम्बाकू की सर्वथा आलोचना हुई.
-तम्बाकू बहुत हद तक मदिरा का स्थान लेने मे कामयाब हुआ.
-धूम्रपान और फेफड़े के कैंसर का सम्बन्ध पता चलने के बाद इसका प्रचलन कुछ कम हुआ.
-तम्बाकू के धुआं मे उपस्थित हज़ारों रसायन हृदय गति, स्मृति और सतर्कता और प्रतिक्रिया की अवधि को बढ़ा देता है.
-तम्बाकू पुरुषों के साथ साथ महिलाओं मे भी प्रचलित है.
-गरीबों में अमीरों की तुलना में धूम्रपान की संभावना अधिक होती है.
-विकासशील देशों के लोगों में विकसित देशों के लोगों की तुलना धूम्रपान की संभावना अधिक होती है.
-धूम्रपान/चबाने के अलावा दर्दनिवारक दवा के रूप में भी तम्बाकू का उपयोग होता है.
-नगदी फसल के रूप मे उगाए जाने के बाद तम्बाकू को भूरा सोना कहा गया.
-तम्बाकू की खेती की ज़मीन की उर्वरा शक्ति शीघ्र ही कम हो जाती है.
-सन 2000 में 1.22 लोग धूम्रपान करते थे , 2010 में 1.45 बिलियन लोग और 2025 में 1.5 से 1.9 बिलियन लोग धूम्रपान कर रहें होंगे.
आओ 31-05-2011 को तम्बाकू निषेध दिवस पर तम्बाकू के प्रयोग के खिलाफ माहौल तैयार करें और नयी पीढ़ी को इसके प्रभावों से बचाएं.
गुरुवार, 26 मई 2011
शनिवार, 21 मई 2011
बुधवार, 18 मई 2011
यमुनानगर के विधायक दिलबाग सिंह ने प्रशासन पर लगाये गंभीर आरोप
यमुनानगर। प्रतिबंध ·े बावजूद खनन ·ा ·ार्य प्रशासनि· अधि·ारियों ·ी मिलीभगत से ·ांगे्रसियों द्वारा ·िये जाने ·ा आरोप लगाते हुए यमुनानगर विधाय· दिलबाग सिंह ने उन्हें रंगेहाथों प·ड़वाने ·ा दावा ·रते हुए ·हा ·ि यह जानबूझ ·र उत्तरप्रदेश से रेत, बजरी नहीं आने दे रहे ता·ि वह अपना माल ब्लै· में बेच स·े।
आमतौर पर ·म बोलने वाला यमुनानगर ·ा यह इनेलो विधाय· दिलबाग सिंह आज सर·ार व प्रशासनि· अधि·ारियों ·े रवैये से इतना खिन्न था ·ि विशेषतौर पर अपने ·ार्यालय में पत्र·ार सम्मेलन बुला·र सर·ार व प्रशासन ·ो ·टघरे में खड़ा ·िया। उन्होंने ·हा ·ि आम लोगों ·े लिए हरियाणा में खनन पर प्रतिबंध है ले·िन सता में बैठे लोग प्रशासनि· अधि·ारियों ·ी छत्रछाया में सरेआम खनन ·े ·ार्य ·ो अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने ·हा ·ि अगर इस बात ·े प्रमाण भी चाहिये तो वह ·ै्रशर जोन ·ो चलते हुए प·डवा स·ते हैं। उन्होने ·हा ·ि जब खनन ·ा ·ार्य बंद है तो ·ै्रशर ·ैसे चल रहे हैं। जिला सचिवालय यमुनानगर ·े समक्ष पिछले 30 दिनों से ·्रमि· भूख हड़ताल पर बैठे ·ै्रशर से संबन्धित लोगों ·े आंदोलन ·ो दिखावा ·रार देते हुए उन्होंने आरोप लगाया ·ि दिन मे ये लोग यहां संघर्ष ·ा दिखावा ·रते हैं और रात्रि ·ो अपने ·ै्रशर चलवाते हैं। उन्होंने ·हा ·ि हरियाणा में प्रतिबंध ·े बाद यहां ·े अने· ·ै्रशर जोन से जुड़े लोगों ने अपनी जमीनें बेच·र व ·र्ज ले·र उत्तरप्रदेश में ·ाम ·रना आरंभ ·िया था। उत्तरप्रदेश से तैयार माल ·ो हरियाणा ·े माध्यम से दिल्ली सहित राज्य ·े अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा जा रहा था ले·िन हरियाणा सर·ार व प्रशासनि· अधि·ारियों ने जानबूझ ·र उत्तरप्रदेश से आने वाले सारे रास्ते बंद ·रवा दिये। उन्होनें बताया ·ि खनन जोन में 123 ·ै्रशर हैं जिनमें ·रीब 64 ·ै्रशर ऐसे हैं जो संबन्धित विभागो ·े नार्म भी पूरे नहीं ·रते है ले·िन सता पक्ष से जुड़े होने ·े ·ारण उन·े खिलाफ ·ोई ·ार्रवाही नहीं ·ी जा रही। उन्होंने आरोप लगाया ·ि ·लेसर जंगल ·े वेस्ट मैटीरीयल ·ा प्रयोग भी ·ै्रशर जोन में ·िया जा रहा है। जमीनों ·ा अधिग्रहण ·र भूमि मालि·ो ·ो भूमि ·े दाम भी भेदभाव पूर्ण नीति ·े तहत दिए जा रहे हैं। यमुनानगर ·े राटौली सहित ·ई गांवों ·ी जमीन हुड्डïा ·े सैक्टर ·ाटने ·े लिए अधिग्रहण ·ी जा रही है ले·िन भूमि मालि·ो ·ो मात्र साढे आठ लाख रूपये प्रति ए·ड़ ·ी राशि दी जा रही है जब·ि उस·ा बाजार भाव आज ए· से तीन ·रोड रूपये त· है। यह ·िसान न्याय पाने ·े लिए दर-दर भट· रहें हैं ले·िन उन·ी सुनने वाला ·ोई नहीं है। उन्होंने ·हा ·ि जिला अधि·ारियों ·ा भी मात्र ए· ही उद्देश्य रास्तो ·ो बंद ·रवाना है और जिला ·ी सुध लेने ·ा उन·े पास ·ोई समय नहीं है।
यमुनानगर में युवक की हत्या से सनसनी
यमुनानगर। शमशान घाट पर खून से लथपथ युव· ·े शव से सनसनी फैल गई। युव· घर से खेतों में ·ाम ·रने ·े लिए नि·ला था। सूचना मिलते ही युव· ·े परिजन व पुलिस घटनास्थल पर पहुंची।
प्राप्त विवरण अनुसार गांव गनौला छछरौली निवासी रणजीत मंगलवार शाम अपनी पत्नी ·रनेलों देवी ·ो यह ·ह ·र नि·ला था ·ी वह खेत ·ो जोतने ·े लिए जा रहा है। सुबह ·रीब साढ़े छह बजे उस·ा शव गांव ·े ही शमशान घाट में पड़ा हुआ मिला। सिर पर चोटें होने ·े ·ारण अनुमान लगाया जा रहा है ·ि हमलावरों ने तेजधार हथियारों से हमला ·र·े रणजीत सिंह ·ो मौत ·े घाट उतार दिया। वहीं मृत· ·े आस पास पड़ी हुई शराब ·ी खाली बोतल व गिलास मिले। इससे यह अंदाजा लगाया जाता है ·ि रात ·ो ·ुछ लोगों ·े साथ रणजीत ने शराब पी और शराब पीने ·े बाद ·िसी बात ·ो ले·र शराबियों में झगड़ा हो गया, इस झगड़े में रणजीत ·ो अपनी जान से हाथ धोने पड़े। बेश· अभी त· इस मामले में ·िसी ·ी गिरफ्तारी नहीं हुई है, ले·िन गांव वासियों ·ा ·हना है ·ि यदि पुलिस ईमानदारी से आरोपी ·ो प·डऩा चाहे तो प·ड़ स·ती है क्यों·ि जो लोग रात ·ो रणजीत ·े साथ शराब पी रहे थे उन्हीं ·ो प·डऩे ·े लिए जाल बिछा दिया जाये तो आरोपी गिरफ्तार हो स·ते है। पुलिस ने शव ·ो अपने ·ब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम ·े बाद परिजनों ·ो सौंप दिया।
वहीं छछरौली थाना प्रभारी तरसेम सिंह ·ा ·हना है ·ि मृत· युव· ·ी पत्नी ·रनेलों देवी ·े ब्यान पर अज्ञात हमलावरों ·े खिलाफ धारा 302 ·े तहत मामला दर्ज ·र लिया गया है। शव ·ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही मामला स्पष्ट हो जायेगा और वहीं मामले में छानबीन निरंतर जारी है।
सोमवार, 2 मई 2011
दिल्ली में ब्लॉग जगत - दूरियां बनी नजदीकियां
तारीख : 30 अप्रैल, 2011
दिन : शनिवार
समय : सुबह के 4 बजे।
सुबह के 4 बजे से पहले भी कई बार उठ गया। ऐसा मन में आ रहा था कहीं अलार्म सुनाई ना दिया हो और मैं सोता ही रह जाउं और दिल्ली जाने वाली टृेन जिसकी मैंने 20 दिन पहले ही बुकिंग करवा दी थी, छुट ना जाए। लेकिन 4 बजे तक अलार्म के बजने से पहले हीअलार्म बंद कर उठ खड़ा हुआ और दिल्ली को कह दिया- मैं आ रहा हूं दिल्ली।
समय : सुबह के साढे 6 बजे।
श्री श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' का फोन आता है, कहां हो रविंद्र जी।
समय : सुबह के 7 बजे।
दिन : शनिवार
समय : सुबह के 4 बजे।
सुबह के 4 बजे से पहले भी कई बार उठ गया। ऐसा मन में आ रहा था कहीं अलार्म सुनाई ना दिया हो और मैं सोता ही रह जाउं और दिल्ली जाने वाली टृेन जिसकी मैंने 20 दिन पहले ही बुकिंग करवा दी थी, छुट ना जाए। लेकिन 4 बजे तक अलार्म के बजने से पहले हीअलार्म बंद कर उठ खड़ा हुआ और दिल्ली को कह दिया- मैं आ रहा हूं दिल्ली।
श्री श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' का फोन आता है, कहां हो रविंद्र जी।
मैंने कहा कि आपके सामने पहुंच रहा हूं दो मिंट में। लेकिन एक मिंट में ही मैं उनके सामने प्रत्यक्ष खड़ा था अपनी बाईक पर। हम दोनों ने रेल का टाईम कंफर्म किया, जोकि 10 मिंट लेट थी।
इतने में ही उमेश वत्स जी का फोन आता है कि शालीमार एक्सप्रेस 'जिस गाड़ी से हमने दिल्ली तक का सफर तय करना था' स्टेशन की तरफ बढ़ रही है। आपको मैं बता दूं कि अगर आप अंबाला से वाया जगाधरी, दिल्ली जाना चाहते हैं तो रास्ते में जगाधरी वर्कशाप का स्टेशन आता है और वत्स जी भी वहीं से गाड़ी में सवार हो चुके थे, जोकि अब वो भी हमारे साथ दिल्ली जा रहे थे, देश भर से आने वाले ब्लॉगरों से मिलने के लिए। गाड़ी स्टेशन पर आ चुकी थी और हम भी सवार हो गये इस पर।
समय : सुबह के 7 बजे साढे 11 बजे।
गाड़ी पर बैठने के बाद सिलसिला शुरू हुआ वत्स जी की कविताओं से। दिल्ली तक पहुंचते पहुंचते उन्होंने दो कविताएं लिख डाली और लगभग पांच कविताएं भी सुनाई, जोकि देश-भक्ति से लबरेज थी। श्रीश जी ने भी अपने सॉफटवेयर बारे चर्चा की। मैं भी भला क्यों पीछे रहता, वो एक कहते मैं दो बताता। हमारे साथ बैठे लोगों ने भी हमारी बातों में सवाद लेना शुरू किया। दिल्ली तक का सफर कैसे बीत गया, पता ही नहीं हम
समय : सुबह के साढे 11 बजे।
हमने दिल्ली रेलवे पर कदम रखा, तो सीधे मैटरो की तरफ लपके, क्योंकि श्रीश जी ने मिनी लैपी जो खरीदना था। तो पहुंच गये कंप्यूटर मार्किट नेहरू प्लेस। फिर शुरू हुआ सिलसिला मित्रों को फोन करने का, कि तुमने जो सामान मंगवाया था वह इस रेट पर है लाना है तो बताओ। बहुत दुकानें घूमें पर मन की तसल्ली नहीं हुई और हम बिना लैपी के ही प्रगति मैदान मैटरो स्टेशन पर पहुंच गये। किस्मत अच्छी थी कि अविनाश वाचसपति को फोन किया और उन्होंने बताया कि वे आसपास ही हैं और हिंदी साहित्य भवन ही जा रहे हैं। जैसे ही वो अपनी गाडी के साथ पहुंचे, तो हम तीनों ने उस पर कब्जा जमा लिया।
समय : दोपहर के साढे 3 बजे।
हम अपने गणतव्य पर पहुंच चुके थे। जैसे ही हमने भवन के अंदर कदम रखा, तो वहां चारों और रखी साहित्यिक किताबों में खो गये, जलपान ग्रहण किया। अब शुरू हुआ सिलसिला जानने-पहचानने का। सबसे पहले नजर आये प्रमोद तांवर जी, जिनसे ब्लॉग की दुनियां में बहुत बार बातचीत हुई हैं, मतलब ब्लॉग फ्रेंडस। मैंने जाकर उनको कहा कि आप प्रमोद जी, उन्होंने कहा कि हां। बस फिर ढेरों बाते। इतने में लंबी-लंबी मूछों वाले एक शख्स ने ध्यान खींचा, तो मैंने मौका ना लपककर उनकी तरफ हाथ बढाया और कहा ललित शर्मा जी। वो मुस्कुराये और कहा हां भाई। फिर गिरी राज जी से मिलकर मैंने कहा कि पहचाना आपने। मैं रविंद्र, इतना कहते ही वो कहने लगे पुंज। फिर तो सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक श्री श्रीश जी को मंच पर ब्लॉगिंग पर बोलने के लिए नहीं बुलाया गया। फिर नंबर आया वत्स जी का। उन्होंने बैठे-बैठे उस दिन पर कविता ही बना डाली और संजोग देखो, अविनाश वाचस्पति जी ने उनको कुछ बोलने के लिए बुला भी लिया।
समय : अब ना समय पूछो, पता ही नहीं चला समय का तो, जैसे पंख लगाकर फुर हो गया।
उत्तरा्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का आगमण होता है। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। तत्पश्चात् अविनाश वाचस्पति और रवीन्द्र प्रभात द्वारा संपादित हिन्दी ब्लॉगिंग की पहली मूल्यांकनपरक पुस्तक ‘हिन्दी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नई क्रांति’, रवीन्द्र प्रभात का नया उपन्यास ‘ताकी बचा रहे लोकतंत्र’, निशंक जी की पुस्तक ‘सफलता के अचूक मंत्र’ तथा रश्मिप्रभा द्वारा संपादित परिकल्पना की त्रैमासिक पत्रिका ‘वटवृक्ष’ का लोकार्पण किया गया। इसके बाद चौंसठ हिंदी ब्लॉगरों का सारस्वत सम्मान हुआ। इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी विश्वबंधु गुप्ता ने कहा कि जीवन के उद्देश्य ऐसे होने चाहिए कि जिसमें मानवीय सेवा निहित हो।
इस अवसर पर निशंक जी उन्होंने परिकल्पना डॉट कॉम की ओर से देश विदेश के इक्यावन चर्चित और श्रेष्ठ तथा नुक्कड़ डॉट कॉम की ओर से हिंदी ब्लॉगिंग में विशिष्टता हासिल करने वाले तेरह ब्लॉगरों को सारस्वत सम्मान प्रदान किया।
चाय-पानी के छोटे से ब्रेक के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्रों ने कालजयी साहित्यकार रविन्द्र नाथ टैगोर की बंगला नाटिका लावणी का हिंदी रूपांतरण प्रस्तुत कर सभागार में उपस्थित दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य निकेतन की 50 वर्षों की यात्रा को आयामित कराती पावर पोईन्ट प्रस्तुति भी हुई। इस अवसर पर रात्रि भोज का भी आयोजन था। रात को ठहरने की भी व्यवस्था थी।
अगले दिन हमने वहां नाश्ता किया और फिर से श्रीशजी और वत्स जी शुरू हो गये लैपी की खोज में। वाचस्पति जी ने भी फोन घुमाये और एक परिचित की मदद से श्रीशजी को एक मिनी दिलवा दिया। फिर उसी शालीमार में दोपहर साढे 3 बजे सवार होकर वापिस घर के लिए रवाना हो गये।
सारे कार्यक्रम के दौरान ऐसा लगा, मानों हम एक ही फैमिली में बैठे हैं। सब एक दूसरे को जानते हैं और बहुत पुरानी जान-पहचान है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई और भगवान से प्रार्थना, कि अगले वर्ष इससे भी अच्छा कार्यक्रम करने के लिए उनको आर्शीवाद और मार्गदर्शन दें।
गाड़ी पर बैठने के बाद सिलसिला शुरू हुआ वत्स जी की कविताओं से। दिल्ली तक पहुंचते पहुंचते उन्होंने दो कविताएं लिख डाली और लगभग पांच कविताएं भी सुनाई, जोकि देश-भक्ति से लबरेज थी। श्रीश जी ने भी अपने सॉफटवेयर बारे चर्चा की। मैं भी भला क्यों पीछे रहता, वो एक कहते मैं दो बताता। हमारे साथ बैठे लोगों ने भी हमारी बातों में सवाद लेना शुरू किया। दिल्ली तक का सफर कैसे बीत गया, पता ही नहीं हम
समय : सुबह के साढे 11 बजे।
हमने दिल्ली रेलवे पर कदम रखा, तो सीधे मैटरो की तरफ लपके, क्योंकि श्रीश जी ने मिनी लैपी जो खरीदना था। तो पहुंच गये कंप्यूटर मार्किट नेहरू प्लेस। फिर शुरू हुआ सिलसिला मित्रों को फोन करने का, कि तुमने जो सामान मंगवाया था वह इस रेट पर है लाना है तो बताओ। बहुत दुकानें घूमें पर मन की तसल्ली नहीं हुई और हम बिना लैपी के ही प्रगति मैदान मैटरो स्टेशन पर पहुंच गये। किस्मत अच्छी थी कि अविनाश वाचसपति को फोन किया और उन्होंने बताया कि वे आसपास ही हैं और हिंदी साहित्य भवन ही जा रहे हैं। जैसे ही वो अपनी गाडी के साथ पहुंचे, तो हम तीनों ने उस पर कब्जा जमा लिया।
समय : दोपहर के साढे 3 बजे।
हम अपने गणतव्य पर पहुंच चुके थे। जैसे ही हमने भवन के अंदर कदम रखा, तो वहां चारों और रखी साहित्यिक किताबों में खो गये, जलपान ग्रहण किया। अब शुरू हुआ सिलसिला जानने-पहचानने का। सबसे पहले नजर आये प्रमोद तांवर जी, जिनसे ब्लॉग की दुनियां में बहुत बार बातचीत हुई हैं, मतलब ब्लॉग फ्रेंडस। मैंने जाकर उनको कहा कि आप प्रमोद जी, उन्होंने कहा कि हां। बस फिर ढेरों बाते। इतने में लंबी-लंबी मूछों वाले एक शख्स ने ध्यान खींचा, तो मैंने मौका ना लपककर उनकी तरफ हाथ बढाया और कहा ललित शर्मा जी। वो मुस्कुराये और कहा हां भाई। फिर गिरी राज जी से मिलकर मैंने कहा कि पहचाना आपने। मैं रविंद्र, इतना कहते ही वो कहने लगे पुंज। फिर तो सिलसिला तब तक चलता रहा, जब तक श्री श्रीश जी को मंच पर ब्लॉगिंग पर बोलने के लिए नहीं बुलाया गया। फिर नंबर आया वत्स जी का। उन्होंने बैठे-बैठे उस दिन पर कविता ही बना डाली और संजोग देखो, अविनाश वाचस्पति जी ने उनको कुछ बोलने के लिए बुला भी लिया।
समय : अब ना समय पूछो, पता ही नहीं चला समय का तो, जैसे पंख लगाकर फुर हो गया।
उत्तरा्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का आगमण होता है। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। तत्पश्चात् अविनाश वाचस्पति और रवीन्द्र प्रभात द्वारा संपादित हिन्दी ब्लॉगिंग की पहली मूल्यांकनपरक पुस्तक ‘हिन्दी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नई क्रांति’, रवीन्द्र प्रभात का नया उपन्यास ‘ताकी बचा रहे लोकतंत्र’, निशंक जी की पुस्तक ‘सफलता के अचूक मंत्र’ तथा रश्मिप्रभा द्वारा संपादित परिकल्पना की त्रैमासिक पत्रिका ‘वटवृक्ष’ का लोकार्पण किया गया। इसके बाद चौंसठ हिंदी ब्लॉगरों का सारस्वत सम्मान हुआ। इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी विश्वबंधु गुप्ता ने कहा कि जीवन के उद्देश्य ऐसे होने चाहिए कि जिसमें मानवीय सेवा निहित हो।
इस अवसर पर निशंक जी उन्होंने परिकल्पना डॉट कॉम की ओर से देश विदेश के इक्यावन चर्चित और श्रेष्ठ तथा नुक्कड़ डॉट कॉम की ओर से हिंदी ब्लॉगिंग में विशिष्टता हासिल करने वाले तेरह ब्लॉगरों को सारस्वत सम्मान प्रदान किया।
चाय-पानी के छोटे से ब्रेक के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्रों ने कालजयी साहित्यकार रविन्द्र नाथ टैगोर की बंगला नाटिका लावणी का हिंदी रूपांतरण प्रस्तुत कर सभागार में उपस्थित दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य निकेतन की 50 वर्षों की यात्रा को आयामित कराती पावर पोईन्ट प्रस्तुति भी हुई। इस अवसर पर रात्रि भोज का भी आयोजन था। रात को ठहरने की भी व्यवस्था थी।
अगले दिन हमने वहां नाश्ता किया और फिर से श्रीशजी और वत्स जी शुरू हो गये लैपी की खोज में। वाचस्पति जी ने भी फोन घुमाये और एक परिचित की मदद से श्रीशजी को एक मिनी दिलवा दिया। फिर उसी शालीमार में दोपहर साढे 3 बजे सवार होकर वापिस घर के लिए रवाना हो गये।
सारे कार्यक्रम के दौरान ऐसा लगा, मानों हम एक ही फैमिली में बैठे हैं। सब एक दूसरे को जानते हैं और बहुत पुरानी जान-पहचान है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई और भगवान से प्रार्थना, कि अगले वर्ष इससे भी अच्छा कार्यक्रम करने के लिए उनको आर्शीवाद और मार्गदर्शन दें।
यमुना नगर को सम्मान मिला दिल्ली में वाह जी वाह बधाईयां ....
यमुना नगर को सम्मान मिला दिल्ली में वाह जी वाह ....
बहुमुखी प्रतिभाओं से भरे इस यमुना नगर शहर को उस समय खुशियों का खजाना मिल गया जब यमुना नगर के मात्र ५ सक्रिय हिंदी चिठ्ठाकारों में से २ को दिल्ली के हिंदी भवन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्रीमान निशंक जी के कर कमलों से सम्मान प्राप्त हुआ |
ये अति मेहनती हिंदी चिठ्ठाकार है,
श्री मान श्रीश शर्मा बेंजवाल "ई-पंडित"
श्री मान रविन्द्र पुंज जी
मुख्यमंत्री जी ने इनको अपने हाथों से एक शील्ड(स्मृति चिह्न) और एक प्रमाण पत्र दे कर सम्मानित किया है |
जैसा कि सब जानते हैं यमुना नगर से ५ ब्लोगर सक्रिय तौर पर विभिन्न विषयों पर हिंदी में चिठ्ठाकारी करते है जो कि
तकनीकी ब्लोगर श्रीश शर्मा बेंजवाल "इ-पंडित",रविन्द्र पुंज जी ग्राफिक डिजाईनर ,
मीडिया डॉक्टर प्रवीन चोपडा जी हेल्थ पर,
विज्ञान अद्यापक दर्शन बवेजा यानी कि मै विज्ञान विषयों पर,
और उमेश प्रताप वत्स कविता का ब्लॉग चलाते हैं |
इन ५ ब्लोगरों में से ३ को सम्मानीय नुक्कड़ डॉट काम पर भी लिखने का सौभाग्य प्राप्त है यानी ये नुक्कड़ टीम के भी सदस्य है |
श्री अविनाश जी और रविन्द्र प्रभात जी का यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है और सभी आयोजक बधाई के पात्र हैं भविष्य में भी इस प्रकार के सम्मान समारोह हिंदी ब्लोगिंग को बढ़ावा देने में बहुत उपयोगी सिद्ध होंगे |
यमुनानगर के दोनों ब्लोगर साथीयों को बहुत बहुत बधाई......
सेवानिवृति पर दी विदाई
बिलासपुर। शनिवर को राजकीय माध्यमिक विद्यालय कपूरी कलां में कला अध्यापक पंडित मेघनाथ शर्मा को उनकी सेवानिवृति पर स्टाफ सदस्यों ने विदाई पार्टी दी। जिसमें स्कूल के सभी शिक्षकों व पंडित मेघनाथ शर्मा के परिजनों ने भाग लिया। विदाई समारोह के दौरान स्कूल के सभी शिक्षक व विद्यार्थी भाव विभोर हो गए।
स्कूल के हेड मास्टर अशोक शर्मा ने कहा कि पंडित मेघनाथ शर्मा हमारी स्कूल की टीम के सचिन तेंदूलकर रहे हैं। जब भी जरुरत पड़ती उन्होंने सभी मोर्चें संभाले हैं। स्कूल में अंदर उन्होंने डिस्पिलीन को मेंटेन किया हुआ था। स्कूल में बच्चों व शिक्षकों के बीच अगर कोई विवाद होता, तो उसे निपटाने में जज की भूमिका अदा करते थे और छानबीन करने के बाद सही निर्णय देते थे। शर्मा की विदाई के उपरांत उन्हें काफी हानि उठानी पड़ेगी, क्योंकि उनकी कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता । अरुण शास्त्री ने कहा कि शर्मा जी बहु प्रतिभा के धनी है। जहां वे धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं, वहीं उन्हें लेखन व गायन का भी शौक है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ने भगवान श्रीराम ने १४ वर्ष का वनवास काट कर राक्षसों का संहार किया था, उसी प्रकार से पंडित मेघनाथ शर्मा ने कपूरी कला के स्कूल में १४ वर्षों के दौरान अंधकार व अज्ञान रूपी राक्षसों का संहार कर विद्यार्थियों में विद्या की जोत प्रज्ज्वलित की। उनके सरल स्वभाव की वजह से उनकी स्मृतियां ताउम्र उनके दिलों में विद्यमान रहेंगी। हरियाणा राज्य अध्यापक संघ के प्रधान बलदेव ने कहा कि शर्मा जी ने कभी भी काम से जी नहीं चुराया और अपनी मेहनत के बल पर स्कूल को नई बुलंदियों पर पहुंचाया है। सेवानिवृत अध्यापक रविदत्त ने पंडित मेघनाथ शर्मा को बधाई दी और उनकी लंबी आयु की कामना की। पंडित मेघनाथ शर्मा ने कहा कि विद्यालय में शिक्षण कार्य करते समय उन्हें अपने सहयोगियों से जो स्नेह मिला है, इसके लिए वे उनके ऋणी है। विदाई समारोह के दौरान पंडित मेघनाथ शर्मा ने आंखों को नम करने वाली एक कविता प्रस्तुत की। जिसे सुनकर वहां मौजुद सभी की आंखें नम हो गई। उन्होंने कहा कि विदाई चाहे कैसी भी हो, वह कष्टदायक होती है। लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्होंने करीब ३० साल तक शिक्षा विभाग में नौकरी की है। मौके पर साइंस अध्यापिका मनविंद्र कौर, हरजिंद्र, पीटीआई हितेंद्र, रामसिंह, हंसराज, अनिल कुमार, रामकुमार, राकेश गुप्ता, पंडित मेघनाथ शर्मा की धर्मपत्नी निर्मल शर्मा, बेटी शैलजा व प्रवेश, बेटा योगेश कुमार व अन्य लोग उपस्थित रहें।
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