मंगलवार, 22 मार्च 2011

कोलॉज मेकिंग में अमनप्रीत व किरणदीप ने मारी बाजी

यमुनानगर। डीएवी गल्र्स कालेज में मंगलवार को इंटरनेशनल ईयर ऑफ कैमेस्ट्री के उपलक्ष्य में कोलॉज मेकिंग कंपीटिशन का आयोजन किया गया। जिसमें बीएससी प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष की छात्राओं ने भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को कैमेस्ट्री विभाग की अध्यक्षा डा. रवि बाठला ने पुरस्कृत किया।
डा. बाठला ने बताया कि छात्राओं ने कोलॉज मेकिंग के दौरान कैमेस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली चीजों का प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि हम डेली यूज में रोजाना रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें टूथेपेस्ट, साबून, कॉस्मेटिक्स, फूड प्रोडक्टस इत्यादि शामिल है। उपरोक्त सभी चीजों को बनाने के लिए विभिन्न  प्रकार के रसायनों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि फूड प्रोडक्टस को खराब होने से बचाने के लिए रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। डा. बाठला के मुताबिक मोमबत्ती बनाने के लिए हाइड्रो कार्बन, प्लास्टिक व टायर बनाने के लिए पोलीमर का प्रयोग किया जाता है। जबकि पेट्रोलियम के शुद्धिकरण से हमें पेट्रोल और एलपीजी गैस मिलती है। इस प्रक्रिया में भी रसायन का प्रयोग किया जाता है।
उन्होंने बताया कि छात्राओं ने कैमिस्ट्री इन द सर्विस ऑफ मैन काइंड विषय पर कोलॉज मेकिंग की। जिसमें उन्होंने दिखाया कि दवाइयों व उर्वरक में रसायन का प्रयोग किस प्रकार से होता है। इसके अलावा उन्होंने घर में प्रयोग होने वाली माचिस, क्लीनर्स, घड़ी में पडऩे वाले सैल, कास्मेटिक्स, मास्किटो क्वाइल्स, बलिचिंग पाउडर, बेकिंग पाउडर, मीठा सोडा, सीट्रिक एसिड इत्यादि के प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिकल चीजों में भी पोलीमर का प्रयोग किया जाता है। डा. उर्मिल राणा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों में छात्राओं को अपनी प्रतिभा को दिखाने का अवसर मिलता है। कोलॉज मेकिंग के दौरान छात्राओं ने डेली यूज में होने वाली चीजों का बारिकी से अध्यन किया। जिससे उनका ज्ञान वृद्र्धन हुआ। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
निर्णायक मंडल में डा. रवि बाठला, डा. उर्मिल राणा, डा. नीना बजाज व डा. आभा शामिल रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में एरिका सुनेजा व सोनिया कांबोज ने सहयोग दिया।
इस प्रकार रहा परिणाम-
बीएससी नॉन मेडिकल प्रथम वर्ष की छात्रा अमनप्रीत कौर व किरनदीप कौर ने संयुक्त रुप से पहला, अंजली व कोमन ने दूसरा तथा जसनीत व नैंसी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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शनिवार, 19 मार्च 2011

होली की बधाई

बुराई पर अच्‍छाई के प्रतीक, पावन और रंगों के त्‍यौहार होली की हार्दिक बधाई.
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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

डीएवी में सत्र समापन पर हुआ २१ कुंडीय हवन यज्ञ

डीएवी गल्र्स कालेज में सत्र समाप्ति के अवसर पर २१ कुंडीय हवन यज्ञ के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।चंडीगढ़ से आए पंडित यजब्रह्मा दाऊ दयाल जी शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ में पूर्णाहुति डलवाई और छात्राओं के सुखद व उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज प्र्रिंपिल डा. सुषमा आर्य ने की।

२१ कुंडिय हवन यज्ञ शुरू करने से पूर्व पंडित दाऊ दयाल जी शास्त्री जी ने सभी छात्राओं से आह्वान किया कि वे  परमपिता परमेश्वर का ध्यान करें। जो कि सर्वत्र विद्यमान है और सर्वशक्तिमान है। योगीजन उसका ध्यान करते हैं और विद्वान उसी की महिमा का गान करते हैं। वो ही सबका पालन हार है। ओम नाम का उच्चारण करने से सभी दुख दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सदैव गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। गायत्री मंत्र का जाप करने से जीवन सुगंधित हो जाता है और हमें आत्मिक बल मिलता है। उन्होंने छात्राओ से आह्वान किया कि वे ईश्वर की स्तुति का मिलकर पाठ करें। उन्होंने कहा कि योग व भक्ति के जरिए परमात्मा को पाया जा सकता है। उन्होंने प्रभू से आह्वान किया कि हे प्रभू मेरी वाणी में माधुर्य भर दो, इतना ही नहीं मेरा वाणी पर नियंत्रण रहे। ताकि जीवन में सौहार्द की भावना भरी रहे।
उन्होंने बताया कि जीवन भी एक यज्ञशाला है। इसे देवताओं की भूमि भी कहा जाता है। इसी के माध्यम से हम पुण्य कमा सकते हैं। जिसके जरिए हम जीवन में ऊंचा उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि शरीर को पाकर प्राणियों ने बुलंदियों को  छूआ है। मनुष्य ने ज्ञान विज्ञान की आहूति दी है। उन्होंने कहा जब मनुष्य अच्छा खाएगा और अच्छा सोचेगा, तभी हमार अत:करण अच्छा होगा, अन्यथा नहीं। उन्होंने कहा कि संस्कृति के माध्यम से मन को निर्मल बनाया जा सकता है। जिसके बाद मन शिव संकल्पों वाला बन जाता है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे जीवन में पुरुषार्थ करें और बुलंदियों को छुए। जो विद्यार्थी जीवन में मेहनत करता है, वह ताउम्र सुख भोगता है और जो मेहनत नहीं करता उसे दुखों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता व गुरुजनों का आदर सत्कार करें और नित्य प्रतिदिन उन्हें नमस्कार करें। इससे उन्हें भगवान का भरपुर आशीर्वाद प्राप्त होगा। तभी तो कहा गया है पितृ देवो भव: आचार्य देवो भव:। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि का विकास होता है। इससे जीवन प्रकाशमय होता है। इस मंत्र का जाप करने से दीर्घायु प्राप्त होती है।
कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि डीएवी गल्र्स कालेज महापुरुषों के दिखाए हुए रास्ते पर अग्रसर है। कालेज में समय-समय पर हवन यज्ञ का आयोजन किया जाता है। ताकि युवा पीढ़ी में नैतिक गुणों का समावेश हो सकें। छात्राएं सफलता की बुलंदियों को छुएं। २१ कुंडीय हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के उपरांत कालेज परिसर में लंगर का आयोजन किय गया। जिसमें को सारे स्टाफ व छात्राओं ने प्रसाद ग्रहण किया। 
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मंगलवार, 15 मार्च 2011

अबके भी खूब जले कृषि अवशेष यमुनानगर में

अबके  भी खूब जले  कृषि अवशेष यमुनानगर में
इंसान अपने आप को इस धरती का सबसे समझदार प्राणी मानता है। बावजूद इसके वह ऐसी-ऐसी हरकतें करता है कि उसकी अक्ल पर कभी-कभी तरस आने लगता है। आपने भी अपने जीवन में ऐसी तमाम घटनाएं देखी होंगी और टाल गये होंगे। लेकिन जब मामला धरती माँ का हो, तो चिन्तित होना स्वाभाविक है। ऐसी ही एक गम्भीर चिन्ता से अवगत करा रहे है आप को
अबके भी खूब जले कृषि अवशेष
एक कहावत या कुछ और बचपन से सुनते आये है कि हरियाणा का कल्चर है तो वो है एग्रीकल्चर परन्तु इस नई जनरेशन के किसानो ने तजर्बे की कमी और जल्दी जल्दी अमीर बनने की खवाहिश के मद्देनजर शोर्ट-कट अपनाने शुरू कर दिए है सरकार आदेश देती है
ये नई जनरेशन के किसान उसे समझते ही नहीं है |
पिछले चार वर्षों से जिला प्रशाशन अखबार के व लोकल टीवी चैनलों के माध्यम से कृषि अवशेष न जलाने बारे आदेश प्रसारित करवाता है शुक्र है किसानो को ये तो पता लग गया कि कोई जीवाणु/कीड़े होते है वो खेतों में ही कृषि अवशेष जलाने से मर जाते है इसलिए खेतों में ही कृषि अवशेष नहीं जलाने चाहिए हाय री ज्ञान की इन्तहा! वो कृषि अवशेष खेतों से तो उठ गए और आ गए सड़कों के किनारे किनारे कई किलोमीटर तक गन्ने की पात्ती, गेंहू के पोरे, सूरज मुखी के टंडे, धान की पुराली, लहसुन के अवशेष, पापुलर के पत्ते आदि कृषि अवशेष जला दिए जाते है पर अपने खेतों में नहीं सडको के किनारे पर |एक दम सुरक्षित एवं सरल उपाय सुबह सवेरे फेंकों रात के अँधेरे में फूंको !! क्या अपनी ऐसी तेसी करवा लेगी ग्लोबल वार्मिंग|
कृषि अवशेष को जलने से रोकना होगा,किसानो को प्रेरित करना होगा कि कृषि अवशेष जलाने से किसान थोड़ी मेहनत से तो बच जाता है परन्तु इसका खेत की उर्वरा शक्ति,पर्यावरण और जैव विविधता पर बुरा प्रभाव पड़ता है इस कुकृत्य को रोकना होगा और कृषको को जागरूक करना  होगा |





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Notice

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सोमवार, 14 मार्च 2011

रविवार, 13 मार्च 2011

ਪੰਜਾਬੀ ਲਿਖਣ ਵਾਲ੍ਯਾ ਵਾਸਤੇ

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मंगलवार, 8 मार्च 2011

बदलनी होगी महिलाओं के प्रति सोच: यादव


जब तक महिलाओं के प्रति लोगों की सोच में बदलाव नहीं होगा, तब तक स्थिति में ज्यादा सुधार की गुंजाइश नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में आज भी महिलाएं परिवार के सभी लोगों को खाना खिलाने के उपरांत खुद पतीला चाटती नजर आती है। क्योंकि वह ऐसा करना अपना धर्म समझती है। उक्त शब्द कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग की प्रोफेसर लीला यादव ने डीएवी गल्र्स कालेज में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हरियाणा में महिलाओं की स्थिति विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान कहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने की।
प्रोफेसर यादव ने कहा कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति ज्यादा बढिय़ा नहीं है। घटते लिंगानुपात के कारण लोग २० से २५ हजार रुपए में दूसरे राज्यों से दुल्हन खरीदकर ला रहे हैं। जबकि प्रदेश में एक भैंस की कीमत ६० हजार रुपए हैं। हालांकि शिक्षा के बढ़ते प्रभाव की वजह से थोड़ा बहुत बदलाव जरुर आया है, लेकिन उतना नहीं। राजनीति में महिलाओं ने कुछ जगह बनाने की कौशिश की है, ग्रास रूट लेवल पर आरक्षण होने की वजह से महिलाओं की भागेदारी ज्यादा बढ़ी है। लेकिन महिला सरपंच व पंच आज भी पुरुष के हाथों की कटपुतलियां है। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश के विकास में महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, इसलिए उन्हें दरकिनार नहीं किया जा सकता। घर के पैसे में महिला का भी उतना ही अधिकार होना चाहिए, जितना पुरुष का। महिलाओं को शिक्षित करना बेहद जरुरी है। ताकि सामाजिक बुराइयों के बंधन को तोड़ा जा सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक सिस्टम महिलाओं के हक में नहीं है। इन सभी समस्याओं से लडक़र ही महिलाओं को खुद की जगह बनानी होगी।
पंजाबी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डा. सुनील देवी ने हरियाणा लोकसभा चुनावों में महिला उम्मीद्वरों की स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजनीति में महिला उम्मीद्वरों की भागेदारी बहुत कम है। लीडरशीप में भी महिलाओं को हायर पोस्ट नहीं मिली। उन्होंने सामाजिक ढांचे को बदलने पर जोर दिया।
डीएवी गल्र्स कालेज के समाजशास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सीमा सेठी ने कहा कि प्रदेश में लड़कियों को कम तव्वजो दी जाती है। शिक्षा का स्तर भी बढिय़ा नहीं है। मल्टीनेशनल कंपनीज़ में मैनेजर्स की पोस्ट पर महिलाएं बहुत कम है। उसमें भी हरियाणा की महिलाओं की भागेदारी बहुत कम है। उन्होंने कहा कि सामाजिक ढांचे को बदलने की जरुरत है।  तनमीत जगदेव ने लड़कियों की किशोरावस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को स्वावलंबी बनाने के लिए डीएवी गल्र्स कालेज ने उड़ान प्रोजेक्ट की शुरूआत की है। जिसमें उन्हें कंप्यूटर शिक्षा के साथ-साथ जुड़ों कराटे भी सिखाए जा रहे हैं। ताकि वे स्वयं आत्मरक्षा कर सकें। 

प्रभजोत कौर ने हिंदी महिला कथाकारों के उपन्यासों में स्त्री विमर्श पर विचार प्रकट किए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ने नारी को स्वतंत्रता प्रदान की है। डा. मीनू जैन ने प्रदेश की ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला। अंबिका शर्मा ने क्राइम अंगेस्ट विमैन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापिका आंचल ने हरियाणा की ग्रोथ में महिलाओं की क्या भूमिका है, इसके बारे में बताया। जबकि रितू कंग ने प्रदेश में महिलाओं की स्थिति को आंकड़ों के जरिए प्रस्तुत किया। कालेज के मास कम्यूनिकेशन विभाग के प्राध्यापक परमेश त्यागी ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर महिलाएं की दिक्कतें आज भी कम नहीं हुई है। बेटे की चाह या फिर सास-ससुर व ननद के तानों के जरिए उन्हें प्रताडि़त किया जा रहा है। जब तक महिलाएं खुद जागरूक नहीं होगी, इस प्रकार की समस्याओं से उन्हें दो-चार होना ही पड़ेगा। संगोष्ठ के दौरान ज्योति नरूला व राजेश कुमार ने भी अपने विचार रखें। कालेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में असिस्टेंट प्रोफेसर मलकीत सिंह व अर्चना रावत ने सहयोग दिया।
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कन्‍या भ्रूण हत्‍या एक अभिशाप - रैली का आयोजन


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