Friday, March 15, 2013

यमुना नदी जल का मुद्दा,


Posted On March - 13 - 2013

यमुना नदी जल का मुद्दा

यमुनानगर/ छछरौली,13 मार्च (हप्र/निस)। हरियाणा के यमुनानगर में यमुना नदी पर जलाशय बनाए जाने से नदी में बारहों महीने अच्छी मात्रा में पानी बह सकता है। यमुना जल पर आधारित प्रस्तावित बांधों किशाऊ तथा रेणुका डैम बनने से न केवल लगातार गिरते जल स्तर में सुधार आएगा, बल्कि सस्ती बिजली भी प्राप्त होगी। केंद्र की मंजूरी के बावजूद उपरोक्त बांध परियोजनाओं का निर्माण कार्य ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। यमुना बचाओ आन्दोलनकारियों की मांग है कि हथनीकुंड बैराज से 10 हजार क्यूसिक पानी यमुना में छोड़ा जाए, जबकि पांच राज्यों में जल वितरण के उपरांत नदी में पानी शेष बचता ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कामन पूल से न्यूनतम 160 क्यूसिक पानी नदी में छोड़ा जाता है। 1995 में पांच राज्यों हिमाचल, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व हरियाणा के बीच यमुना जल पर समझौता हो जाने के बाद एक बार फिर नदी जल का मुद्दा गर्मा गया है। एक ओर जहां बृजवासी यमुना नदी में रेगुलर पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे हैं, वहीं पानी की कमी को लेकर नदी जल के साझेदार राज्य एक दूसरे पर कम पानी देने के आरोप लगाते रहे हैं। यमुना में लगातार पानी की उपलब्धता घट रही है। बरसों से लटकी पड़ी यमुना जल पर आधारित बिजली परियोजनाएं ठंडे बस्ते में चली जाने से पावर लास तो है ही, दूसरी तरफ यमुनानदी पर कोई डैम नहीं बनाए जाने के कारण नदी की धारा भी अब दम तोडऩे लगी है। मानसून सीजन को छोड़ शेष दिनों यमुना नदी का जल बहाव सिमट कर 5 हजार क्यूसिक से भी नीचे पहुंच जाता है। लगातार घटता जल बहाव चिंता का विषय बन गया है।
यमुना पर बने जलाशय पहाडिय़ों पर अच्छी बरसात से जल बहाव अचानक बढ़ जाता है। नदी पर कोई जलाशय नहीं होने के कारण बरसाती पानी बेकार चला जाता है। जलाशय बनने से काफी हद तक पानी को रोका जा सकेगा, जिससे नदी में निश्चित मात्रा में पानी बहेगा। रेगुलर पानी मिलने से सरपल्स पानी को नदी में छोड़ा जा सकेगा।

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