Saturday, October 1, 2011

सिनेमा की समझ पैदा करना सबसे बड़ी जरूरत : मनोज श्रीवास्तव

यमुनानगर, ३० सितंबर। हिंदी समाज में अच्छे सिनेमा की समझ विकसित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। हिंदी भाषी इलाके में पापुलर सिनेमा में गंभीर सिनेमा को पीछे कर दिया है। इसलिए छोटे-छोटे फिल्म जागरुकता कार्यक्रमों को जरूरत है ऐंटरटेनमेंट सोसायटी ऑफ गोवा के सीईओ और भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजक मनोज श्रीवास्तव ने कही।
मनोज श्रीवास्तव डीएवी गल्र्ज कॉलेज यमुनानगर में चौथे फिल्म एप्रीसिएशन कोर्स का उद्घाटन वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने अमेरिकी फिल्म सिंगिंग इन द रेन और हिंदी फिल्म अराधना के दृश्यों को व्याख्या करते हुए कला के रूप में सिनेमा के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।
श्रीवास्तव ने कहा कि यमुनानगर में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह और एप्रीसिएशन कोर्स का होना अपने आप में सुखद आश्चर्य है। यह घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है। ३०० छात्र-छात्राओं का इस कोर्स में हिस्सा लेना अपने आप में विश्व रिकार्ड है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रधान सचिव शिव रमन गौड ने मुख्यातिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि सरकार इस आयोजन को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रही है। आज नई पीढ़ी के लिए सिनेमा बहुत बड़ी ताकत है। इससे पता चलता है कि सिनेमा चरित्र निर्माण और अच्छे नागरिक बनाने मे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस आयोजन को हरियाणा सरकार हर संभव सहयोग करती रहेगी।
फिल्म समारोह के निदेशक अजित राय ने कहा कि हम केवल उत्सव नहीं कर रहे हैं बल्कि समझ के साथ उत्सव कर रहे हैं। हमारा नारा है कि सिनेमा की समझ और सिनेमा का उत्सव। आज हिंदी सिनेमा समाज को सपने दिखाता है और समाज सपने देख रहा है। हम नई पीढ़ी को सपनों की दुनिया से बाहर लाकर जिंदगी की सच्चाइयों का सामना करने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। विश्व सिनेमा, क्षेत्रीय सिनेमा और राष्ट्रीय सिनेमा को एक साथ प्रस्तुत कर हम सिनेमा का सबसे बड़ा संसार सामने ला रहे हैं।
अजित राय ने कहा कि जिस फिल्म एप्रीसिएशन कोर्स के लिए छात्र-छत्राओं को पूणे जाना पड़ता है और भारी पैसा खर्च करना पड़ता है उसे हम हरियाणा में नि:शुल्क प्रदान कर रहे हैं। अच्छे सिनेमा को नई पीढ़ी के बीच लेजाने का हमारा यह सामाजिक अभियान है। इससे फिल्म एवं मनोरंजन उद्योग में हरियाणा की नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ेगी। इससे विश्व स्तर पर हरियाणा की छवि बदलेगी। हरियाणा सांस्कृतिक नवजागरण के दरवाजे पर खड़ा है। यह समारोह उस नवजागरण का स्वागत करने की पहल है।
कॉलेज प्रिंसिपल सुषमा आर्य ने कहा कि फिल्म एप्रीसिएशन कोर्स में उत्तर भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों से ३०० से ज्यादा छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं। जिन्हें कोर्स के दौरान फिल्म मेकिंग, एडीटिंग, स्क्रिप्ट राईटिंग व अभिनय की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। कोर्स का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में सिनेमा की समझ को विकसित करना है ताकि वे आगे चलकर इसमें अपना सहयोग दे सके।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर ने कहा कि यमुनानगर का फिल्म फैस्टिवल प्रदेश के लिए मील का पत्थर है। जिसने नई पीढ़ी को नई दिशा दी है। यमुनानगर शहर प्रदेश के कोने में है, कॉलेज प्रिंसिपल सुषमा आर्य की क्षमता है कि पिछले तीन साल से इसका आयोजन लगातार कर रही है। प्रदेश सरकार व शहर के उद्योगपतियों से अगर लगातार सहयोग नहीं मिलेगा तो इस समारोह को आगे चला पाना मुश्किल होगा।
ईस्ट इज ईस्ट रही एप्रीसिएशन कोर्स की ओपनिंग फिल्म
निर्माण लेस्ली उडविल व निर्देशक डैमिल ओ डोनेल तथा लेखक आयुब खान की ईस्ट इज ईस्ट मूवी एप्रीएिशन कोर्स की ओपनिंग फिल्म रही। यह एक ब्रिटिश फिल्म है। जिसने दुनिया भर में १६० करोड रुपये का कारोबार कियार है। यह फिल्म लंदन में बसे एक पाकिस्तानी मुस्लिम परिवार की कहानी है। जिसका मुखिया जहांगीर खान इस बात से परेशान है कि उसके बच्चे इस्लामी परंपरा को छोड़ रहे हैं। जहांगीर खान की भूमिका में ओमपुरी ने यादगार अभिनय किया है व अपनी पहली बीवी बसीरा को पाकिस्तान में छोड़ आया है और लंदन में एक आयरलैंड की महिला से शादी करके रह रहा है। यह फिल्म पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों के बीच टकराहट की कहानी है। जिसे कॉमेडी के रूप में फिल्माया गया है।

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