Saturday, December 11, 2010

बाढ़ पीडि़त किसानों को मुआवजा 28 व 37 रुपये

बाढ़ आने पर सरकार द्वारा तरह-तरह के वादे मुआवजा देने को लेकर किए जाते हैं, जिस पर पीडित लोगों को भी आस बंध जाती हैं कि मुआवजा मिलने पर उनके कुछ जख्म तो भरेंगे लेकिन जब मुआवजा 28 रुपये या 37 रुपये मिले तो जख्मों पर नमक छिड़कने का ही मुहावरा सिद्ध होता है। ऐसा ही हो रहा है यमुनानगर जिला के बाढ़ पीडि़तों के साथ जो 2008 में आई बाढ़ के बाद से मुआवजे का इंतजार कर रहे थे। बाढ़ की मुआवजा राशि मिलने की जैसे ही यहां के किसानों को जानकारी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा लेकिन यह खुशी उस समय काफूर हो गई, जब उन्हें मुआवजे की राशि एक मजाक लगी।
यहां यह उल्लेखनीय है कि 2008 में आई बाढ़ के कारण लोगों को भारी नुकसान हुआ था लेकिन उसका मुआवजा प्राप्त करने के लिए पीडि़त किसान बार-बार सरकार से आग्रह कर रहे थे। किसानों के अनुसार सरकार ने 2008 में मुआवजे के रूप में प्रति एकड़ फसल के नष्टï होने पर पांच हजार रुपए तय किए थे। अब जब मुआवजे की राशि मिलनी आरम्भ हुई तो उनके पैरों तले से जमीन ही खिसक गई। यमुनानगर हलके के मंडी गांव की ही अगर बात की जाए तो किसी भी पीडि़त को 500 रुपये मुआवजा नहीं मिला होगा। गांव के मुरसलीम को 28 रुपए, इरफान को 28 रुपए 25 पैसे, सतरूद्ïदीन को 93 रुपए 75 पैसे, असलम को 37 रुपए, महबूब हसन को 412 रुपए, इकराम को 84 रुपए 50 पैसे, मुस्तफा 450 रुपए, जुल्फान 84 रुपए 25 पैसे, इस्लाम 337 रुपए 50 पैसे, अमजद खान 327 रुपए 50 पैसे, जमीला 262 रुपए 50 पैसे, सुदरलाल 75 रुपए, आलम हसन, तालब हसन सलीम हसन 56 रुपए 25 पैसे, नाथीराम भगवत प्रसाद 112 रुपए 50 पैसे मिले। इसी प्रकार गांव लाकडमय प्रतापपुर में नरेश कुमार को 83 रुपए, जयपाल को 84 रुपए, गुरमेज 37 रुपए मिले। गांव नवाजपुर में चंपादेवी 122 रुपए, बालादेवी 123 रुपए, रवीश कुमार 123 रुपए, मेनपाल 180 रुपए, मुकेश कुमार 181 रुपए विनोद कुमार को 180 रुपए मिले।
इन किसानों का कहना है कि हम यह नहीं समझ पाये कि सरकार ने हमें यह मुआवजा राशि दी है या हमें याद करवाया है कि सन्ï 2008 में भी बाढ़ आई थी। लेकिन एक बात पर ये किसान सरकार का इस बात पर आभार व्यक्त करते दिखाई दिए कि एक हजार से कम राशि वाले किसानों से रसीदी टिकट पर अंगूठा-दस्तखत करवाकर यह राशि प्रदान कर दी। अगर यह रकम चैक से दी जाती तो इसके लिए एकाउंट खुलवाना पड़ता और बैंक के चक्कर लगाने पड़ते।
किसानों का कहना है कि सरकार अगर हमें यह धनराशि नहीं भी देती तो अच्छा होता। हम अब तक यह नहीं समझ पाए कि सरकार द्वारा घोषित पांच हजार रुपए एकड़ के हिसाब से हमें क्या मिलना चाहिए था और जो हमें मिला वह तो ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं। उधर, राजस्व अधिकारियों का कहना है कि एक एकड़ के जितने मालिक हैं उन सभी में धनराशि बराबर-बराबर बांटी गई।
वहीं इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं विधायक अभय सिंह चौटाला यमुनानगर विधायक दिलबाग सिंह ने सरकार द्वारा इस प्रकार मुआवजा दिए जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार का किसान विरोधी होने का इससे बड़ा और क्या सबूत होगा कि 2008 में आई बाढ़ की मुआवजा राशि अब दी जा रही है और वह भी मात्र 28 रुपये।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को राहत तो दे नहीं सकती लेकिन उसे किसानों के जले पर नमक भी नहीं छिड़कना चाहिए। उन्होंने मांग की कि हरियाणा के विभिन्न जिलों में विगत माह आई बाढ़ का मुआवजा पीडि़तों को तुरन्त प्रभाव से दिया जाए। उधर, किसान नेता सतपाल कौशिक का कहना है कि किसानों में बांटा गया मुआवजा किसानो के साथ मजाक है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को राहत दे कि उनका मजाक उड़ाए।

जले पर नमक

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